जेनिन, प्रेट्र। यहूदी धार्मिक नेता की हत्‍या के मामले में इजरायल की सेना ने फिलिस्तीन के कब्जे वाले पश्चिमी क्षेत्र पर छापेमारी की। इजरायल की सेना की ये छापेमारी बीती पूरी रात चली। इजरायली सेना ने बयान जारी कर कहा कि जेनिन पर छापेमारी के दौरान दो इजरायली सैनिक घायल हो गए। बुधवार देर रात से शुरू हुई और गुरुवार सुबह तक जारी रही इस छापेमारी के दौरान कई लोगों की गिरफ्तारी हुई है।

इस ऑपरेशन में एक फिलीस्तीनी की मौत 

फिलिस्तीन के स्वास्थ्य मंत्रालय ने इस ऑपरेशन में एक फिलीस्तीनी की मौत की पुष्टि की है, जिसका नाम अहमद जारार बताया जा रहा है। 22 साल का अहमद, नासिर जारार का बेटा था। उसके परिवार ने बताया कि नासिर जारार इस्लामिक आतंकी संगठन हमास से जुड़ा था, जो इजरायली सेना के हाथों दूसरे फिलिस्तीनी युद्ध में मारा गया था। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि ऑपरेशन के दौरान जारार के परिवार के दो घरों को भी ध्वस्त कर दिया गया था। इजरायल की सेना ने कहा कि छापे के दौरान हिंसक दंगा भड़काने की कोशिश की गई थी। फिलिस्तीनी दंगाइयों ने आईईडी को फेंका और इजरायल की सेना पर पथराव और फायरिंग भी की।

फिलिस्तीनियों ने ऑन लाइन पोस्ट किया छापेमारी का वीडियो 

फिलिस्तीनी प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि उन्होंने देखा आज संघर्म में कम से कम दो फिलिस्तीनियों को गिरफ्तार किया गया। फिलिस्तीनियों द्वारा ऑनलाइन पोस्ट किए गए वीडियो में कई इजराइली सेना के वाहन हथियारों के साथ शहर में प्रवेश करते दिख रहे हैं। बता दें इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भारत की यात्रा पर एक बयान में कहा, 'हम उन सभी लोगों को ट्रैक करेंगे जो हम पर हमला करते हैं और हम उन्हें जवाबदेह बनाएंगे।'

9 जनवरी को यहूदी धार्मिक नेता की हत्या हुई 

9 जनवरी को 35 वर्षीय यहूदी धार्मिक नेता राजियल शेहवाह को हवत गिलाद में गोली मार दी गई थी, जोब वेस्ट बैंक के नाबुलस के पास रहते थे। तब से इजरायल की सेना हमलावरों की तलाश कर रही है। शेहवाह की हत्या के बाद नाबुलस के चारों तरफ चेक प्वाइंट और चौकियां की तैनाती कर दी गई थी।

नाबुलस क्षेत्र में इजरायल के लोगों और फिलीस्तीनियों के बीच अक्सर तनाव बना रहा है। करीब 6,00,000 इजरायलियों के बसने वाले लोग वेस्ट बैंक में रहते हैं और करीब तीन लाख फिलिस्तीनियों ने कब्जा पूर्वी यरुशलम पर कब्जा कर रखा है।

बता दें कि 6 दिसंबर को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इजरायल की राजधानी के रूप में यरुशलम को मान्यता देने के फैसले ने फिलीस्तीनी क्षेत्रों में अशांति पैदा की दी थी। ट्रंप की घोषणा के बाद 18 फिलिस्तीनी मारे गए थे, जिनमें से ज्यादातर की मौत इजरायल की सेना के साथ हुए संघर्ष के दौरान हुई।

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Posted By: Nancy Bajpai