इजरायल चुनाव में ऐतिहासिक मतदान, 7 घंटे में टूटा 50 साल पुराना रिकॉर्ड; नेतन्याहू-आइजेनकोट में कांटे का मुकाबला
इजरायल के आम चुनाव में रिकॉर्ड तोड़ मतदान हुआ, जिसने 50 साल से अधिक पुराना रिकॉर्ड तोड़ दिया। यह चुनाव ...और पढ़ें
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इजरायल चुनाव में सात घंटे के भीतर टूटा 50 साल पुराना रिकॉर्ड। (रॉयटर्स)
HighLights
इजरायल चुनाव में 50 साल का मतदान रिकॉर्ड टूटा।
नेतन्याहू को पूर्व सेना प्रमुख गादी आइजेनकोट से कड़ी चुनौती।
हमास हमले के बाद सुरक्षा, अर्थव्यवस्था, राजनीतिक दिशा अहम मुद्दे।
जागरण न्यूज नेटवर्क, नई दिल्ली। इजरायल में मंगलवार को आम चुनाव में हिस्सा लेने के लिए बड़ी संख्या में मतदाता मतदान केंद्रों पर पहुंचे। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के नेतृत्व पर जनमत संग्रह माने जा रहे इस चुनाव में मतदान की रफ्तार ने महज सात घंटे में पांच दशक से अधिक पुराना रिकॉर्ड तोड़ दिया।
केंद्रीय चुनाव समिति के मुताबिक, दोपहर दो बजे तक 44.9 प्रतिशत पात्र मतदाता वोट डाल चुके थे। 2022 के चुनाव में इसी समय तक 38.9 प्रतिशत मतदान हुआ था। यह 1973 के बाद इस समय तक दर्ज सबसे ऊंचा आंकड़ा है। नेतन्याहू के सामने पूर्व सेना प्रमुख गादी आइजेनकोट हैं, जो उन्हें कांटे की टक्कर दे रहे हैं।
रायटर्स के अनुसार, 7 अक्टूबर 2023 को हमास के हमले और उसके बाद गाजा समेत क्षेत्र में हुए युद्ध के बाद यह पहला चुनाव है। मतदाताओं के सामने सुरक्षा, युद्ध की जवाबदेही, अर्थव्यवस्था और देश की राजनीतिक दिशा जैसे अहम मुद्दे हैं। हालांकि, रिकॉर्ड रफ्तार से मतदान के बावजूद यह कहना जल्दबाजी होगी कि इसका सीधा फायदा किस पक्ष को मिलेगा।
नेतन्याहू को आइजेनकोट की चुनौती
एपी के अनुसार, नेतन्याहू की दक्षिणपंथी लिकुड पार्टी का मुकाबला पूर्व सेना प्रमुख गादी आइजेनकोट के नेतृत्व वाले विपक्ष से है। नेतन्याहू एक्स पर अपने समर्थकों से मतदान बढ़ाने की अपील करते रहे।
उन्होंने दावा किया कि विपक्ष और अरब मूल के इजरायली मतदाता बड़ी संख्या में वोट डाल रहे हैं, इसलिए उनके समर्थकों को भी मतदान केंद्र पहुंचना चाहिए। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने भी नेतन्याहू का समर्थन किया है।

आइजेनकोट के लिए चुनाव सात अक्टूबर के हमले के दौरान हुई सुरक्षा चूक की जवाबदेही का मुद्दा भी है। उनके बेटे और दो भतीजे गाजा में सैन्य तैनाती के दौरान मारे गए थे। ऐसे में उन्हें जनता की हमदर्दी भी मिलने की उम्मीद है। विपक्षी दल राष्ट्रीय जांच की मांग कर रहे हैं, जबकि नेतन्याहू सरकार इस मुद्दे पर आलोचना का सामना करती रही है।
अरब मतदाताओं पर भी नजर
इजरायल की आबादी में अरब नागरिकों की हिस्सेदारी करीब 20 प्रतिशत है। उनकी भागीदारी बढ़ने से चुनावी समीकरण प्रभावित हो सकते हैं। विपक्ष को उम्मीद है कि अधिक मतदान से नेतन्याहू के गठबंधन को चुनौती मिलेगी।

हालांकि, आइजेनकोट ने अरब दलों के साथ औपचारिक गठबंधन से इनकार किया है। चुनाव विश्लेषकों के मुताबिक, अरब दलों का समर्थन सरकार गठन में निर्णायक हो सकता है।
केंद्रीय चुनाव समिति ने मतपत्रों में सुनियोजित छेड़छाड़ के ऑनलाइन दावों को खारिज करते हुए कहा है कि ऐसे किसी प्रयास का फिलहाल प्रमाण नहीं मिला है। अलग-अलग मतदान केंद्रों से मिली शिकायतों पर कार्रवाई की जा रही है।
73 लाख से ज्यादा मतदाता तय करेंगे देश का भविष्य
प्रेट्र के अनुसार, मंगलवार सुबह सात बजे से शुरू हुआ मतदान रात 10 बजे तक चलेगा। इजरायल में 73,31,981 पात्र मतदाता हैं। वोट डालने के लिए देशभर में 12018 मतदान केंद्र बनाए गए हैं। दोपहर तक 48 प्रतिशत इजरायली सैनिक मतदान कर चुके थे।
विदेश में रहने वाले 80 हजार इजरायली नागरिक वोट डालने के लिए स्वदेश पहुंचे हैं। 850 मतदान केंद्र इजरायल और इजरायल के बाहर स्थित सैन्य अड्डों में बनाए गए हैं। अस्पतालों और जेलों में भी मतदान केंद्र बनाए गए हैं। इजरायल में मतपत्रों के माध्यम से वोट डाला जाता है।
बहुमत नहीं मिला तो क्या होगा
इजरायल की संसद नेसेट में 120 सीटें हैं। किसी एक दल के लिए बहुमत हासिल करना कठिन है, इसलिए चुनाव के बाद गठबंधन की बातचीत निर्णायक होगी। 26वीं नेसेट के लिए आधिकारिक परिणाम चार नवंबर तक आने की उम्मीद है।
सरकार गठन की प्रक्रिया
राष्ट्रपति आइजक हर्जोग विभिन्न दलों के प्रतिनिधियों से बातचीत के बाद उस सांसद को सरकार बनाने का मौका देंगे, जिसके पास बहुमत जुटाने की बेहतर संभावना होगी। पहले उम्मीदवार को 28 दिन मिलते हैं, जिसे अधिकतम 14 दिन बढ़ाया जा सकता है।
असफल रहने पर दूसरे उम्मीदवार को 28 दिन दिए जा सकते हैं। इसके बाद 61 सांसद किसी तीसरे उम्मीदवार का नाम प्रस्तावित कर सकते हैं, जिसे सरकार बनाने के लिए 14 दिन मिलेंगे। सभी प्रयास विफल होने पर नए चुनाव का रास्ता खुल सकता है।
नेतन्याहू के लिए चुनौती केवल अधिक वोट हासिल करना नहीं, बल्कि संसद में सहयोगियों का पर्याप्त समर्थन जुटाना भी है। रिकॉर्ड मतदान ने चुनाव को और दिलचस्प बना दिया है, लेकिन सत्ता की तस्वीर परिणाम और गठबंधन की बातचीत के बाद ही साफ होगी।
