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क्या है साउथ पार्स और क्यों है महत्वपूर्ण? दुनिया के सबसे बड़े गैस भंडार पर इजरायल की स्ट्राइक

Published: Thu, 19 Mar 2026 07:07 PM (IST)

पश्चिम एशिया में इजरायल द्वारा ईरान के साउथ पार्स गैस भंडार पर हमला वैश्विक ऊर्जा बाजारों और आर्थिक स्थिरता पर ...और पढ़ें

साउथ पार्स पर इजरायल की स्ट्राइक। (रॉयटर्स)

साउथ पार्स पर इजरायल की स्ट्राइक। (रॉयटर्स)

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जागरण न्यूज नेटवर्क, नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी टकराव अब एक ऐसे मोड़ पर पहुंच गया है, जहां इसकी गूंज सिर्फ युद्ध क्षेत्र तक सीमित नहीं रही, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजारों और आर्थिक स्थिरता तक फैलने लगी है। इजरायल द्वारा ईरान के सबसे बड़े गैस भंडार साउथ पार्स पर किया गया हमला इस संघर्ष का अब तक का सबसे संवेदनशील और दूरगामी प्रभाव वाला कदम माना जा रहा है। यह पहली बार है जब इस जंग में सीधे किसी बड़े ऊर्जा उत्पादन केंद्र को निशाना बनाया गया है।

विशेषज्ञों के अनुसार, यह सिर्फ सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि ईरान की आर्थिक रीढ़ और ऊर्जा सुरक्षा पर सीधा प्रहार है, जिसका असर पूरी दुनिया पर पड़ सकता है।

क्या है साउथ पार्स और क्यों है इतना अहम?

फारस की खाड़ी में स्थित साउथ पार्स गैस फील्ड दुनिया का सबसे बड़ा ज्ञात प्राकृतिक गैस भंडार है, जो ईरान और कतर के बीच साझा है। करीब 9,700 वर्ग किलोमीटर में फैला यह क्षेत्र न सिर्फ भौगोलिक दृष्टि से विशाल है, बल्कि ईरान की ऊर्जा व्यवस्था का केंद्रीय स्तंभ भी है। यह गैस फील्ड अकेले ही ईरान के कुल गैस उत्पादन का लगभग 70 प्रतिशत उपलब्ध कराता है। देश की बिजली आपूर्ति, औद्योगिक उत्पादन और घरेलू गैस जरूरतों का बड़ा हिस्सा इसी पर निर्भर है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, इसमें करीब 51 ट्रिलियन क्यूबिक मीटर गैस भंडार मौजूद है, जो इसे वैश्विक ऊर्जा मानचित्र पर अत्यंत महत्वपूर्ण बनाता है। ऐसे में इस पर हमला सीधे-सीधे ईरान की अर्थव्यवस्था, औद्योगिक गतिविधियों और आम नागरिकों के जीवन पर असर डाल सकता है।

South Pars

हमले का असर : गहराता ऊर्जा संकट

प्रारंभिक रिपो‌र्ट्स के अनुसार, हमले में साउथ पार्स के कुछ हिस्सों को नुकसान पहुंचा है, जिससे ईरान के कुल गैस उत्पादन का करीब 12 प्रतिशत हिस्सा प्रभावित हो सकता है। पहले से ही गैस और बिजली की कमी से जूझ रहे ईरान के लिए यह स्थिति गंभीर संकट का रूप ले सकती है।

इसका सीधा असर उद्योगों, बिजली उत्पादन और आम लोगों की दैनिक जरूरतों पर पड़ेगा। विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि अगर उत्पादन में गिरावट लंबी चली, तो यह देश के भीतर आर्थिक दबाव और सामाजिक असंतोष को भी बढ़ा सकती है।

दुनिया क्यों चिंतित है?

यह हमला केवल ईरान तक सीमित नहीं है। इसका प्रभाव वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर भी तेजी से दिखाई देने लगा है। हमले के बाद ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतों में पांच प्रतिशत से अधिक की तेजी दर्ज की गई है, जो संभावित आपूर्ति संकट की आशंका को दर्शाती है। ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि अगर पश्चिम एशिया में ऊर्जा ढांचों को निशाना बनाने का सिलसिला जारी रहा, तो वैश्विक गैस और तेल आपूर्ति बाधित हो सकती है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अस्थिरता और महंगाई बढ़ने की आशंका है।

क्षेत्रीय तनाव और गहराया

इस हमले के बाद पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ गया है। ईरान ने कड़ी प्रतिक्रिया की चेतावनी देते हुए सऊदी अरब, यूएई और कतर के प्रमुख तेल-गैस ठिकानों को संभावित निशाना बताया है। वहीं कतर ने इस हमले को खतरनाक और गैर-जिम्मेदाराना करार दिया है, जबकि यूएई ने इसे क्षेत्रीय स्थिरता के लिए गंभीर खतरा बताया है। विश्लेषकों का कहना है कि अब यह संघर्ष बहु-देशीय टकराव का रूप ले सकता है, जिसमें पूरे खाड़ी क्षेत्र की ऊर्जा संरचनाएं जोखिम में आ सकती हैं।

मरम्मत आसान नहीं, असर लंबा होगा

इतने विशाल और जटिल ऊर्जा ढांचे को नुकसान पहुंचने के बाद उसकी मरम्मत त्वरित रूप से संभव नहीं होती। इतिहास बताता है कि 2003 के इराक युद्ध के बाद ऊर्जा ढांचे को पूरी तरह बहाल करने में वर्षों लग गए थे। इसी तरह यूक्रेन में भी ऊर्जा प्रणालियों की मरम्मत लंबे समय तक बाधित रही है। ऐसे में साउथ पार्स की उत्पादन क्षमता को पूर्ण रूप से बहाल करने में लंबा समय लग सकता है, जिससे ऊर्जा संकट और गहरा सकता है।

ऊर्जा से आगे की लड़ाई

पश्चिम एशिया में ऊर्जा केवल आर्थिक संसाधन नहीं, बल्कि राजनीतिक और रणनीतिक शक्ति का भी आधार है। साउथ पार्स गैस फील्ड ईरान और कतर के बीच सहयोग और संतुलन का एक महत्वपूर्ण माध्यम रहा है। इस पर हमला न केवल ऊर्जा आपूर्ति को प्रभावित करेगा, बल्कि क्षेत्रीय कूटनीतिक समीकरणों को भी बदल सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऊर्जा संसाधनों को निशाना बनाना इस बात का संकेत है कि अब यह संघर्ष एक व्यापक रणनीतिक जंग का रूप ले चुका है।

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