इजरायल ने 'आयरन बीम' से रोका हिजबुल्लाह का हमला, कैसे काम करता है यह पावरफुल डिफेंस सिस्टम?
ईरान समर्थित हिजबुल्लाह ने इजरायल पर हमला किया। लेकिन इजरायली सेना ने अपने शक्तिशाली 'आयरन बीम' डिफेंस सिस्टम से इन मिसाइलों को रोक दिया।

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान पर एक के बाद एक कई हमले किए हैं। ईरान की तरफ से भी अमेरिका के साथी देशों पर मिसाइलें दागी गई हैं। इस जंग में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत से हिजबुल्लाह भी भड़क गया है।
लेबनान में बसा ईरान समर्थित उग्रवादी संगठन हिजबुल्लाह ने रविवार देर रात इजरायल पर बड़ा हमला किया। लेकिन इजरायली सेना के डिफेंस सिस्टम ने इन हमलों को पूरी तरह रोक दिया।
इजरायल ने हिजबुल्लाह के हमलों को किया नाकाम
इजरायल की सेना ने बॉर्डर पार से आने वाली कुछ मिसाइलों को देश के पावरफुल डिफेंस सिस्टम 'आयरन बीम' से रोक दिया। हिजबुल्लाह ने इजरायल पर किए इस हमले की जिम्मेदारी ली।
हिजबुल्लाह का कहना है कि उसने इजरायल पर ये हमला ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई की मौत का बदला लेने के लिए किया है। लेकिन इजरायली सेना ने दावा किया है कि इस हमले में उन्हें किसी तरह का कोई नुकसान नहीं हुआ है, क्योंकि आयरन बीम ने मिसाइलों को मार गिराया।
इजरायल का पावरफुल डिफेंस सिस्टम 'आयरन बीम'
इजरायल वॉर रूम के जारी एक वीडियो में आयरन बीम की शक्ति का प्रदर्शन किया गया, जिसे तेल अवीव का युद्ध के नए दौर का डिफेंस सिस्टम बताया गया है।
इजरायली सेना ने फुटेज में दिखाया कि हिजबुल्लाह की मिसाइलों को आसमान में ही रोक दिया गया। सेना ने जानकारी देते हुए बताया कि आयरन बीम का इस्तेमाल पहली बार किया गया है।
मॉडर्न आयरन बीम टेक्नोलॉजी के अलावा, इजरायल मिसाइलों को गिराने के लिए अपने जाने-माने आयरन डोम डिफेंस सिस्टम का भी इस्तेमाल करता है।
कैसे काम करता है आयरन बीम?
इजरायल के रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, आयरन बीम को आयरन डोम के साथ ही डेवलप किया गया है। आयरन बीम मिसाइलों, ड्रोन, रॉकेट और मोर्टार सहित कई तरह के हवाई खतरों को बेअसर करने के लिए डिजाइन किया गया है।
इजरायली अधिकारियों का कहना है कि यह टेक्नोलॉजी युद्ध के एक नए दौर की शुरुआत कर सकती है, क्योंकि देश को ईरान और लेबनान के हिजबुल्लाह से बढ़ते खतरों का सामना करना पड़ रहा है।
इजरायल आयरन बीम पर एक दशक से ज्यादा समय से काम कर रहा है। इस डिफेंस सिस्टम को पहली बार 2014 में दिखाया गया था और डेवलपमेंट और फाइनल टेस्टिंग पूरी होने के बाद सितंबर 2025 में इसे ऑपरेशनल घोषित किया गया था।
पारंपरिक इंटरसेप्टर मिसाइलों के उलट, आयरन बीम लेजर-बेस्ड सिस्टम है, जो लगातार एनर्जी सोर्स पर निर्भर करता है। इसमें जब तक पावर मौजूद है, सिस्टम में एम्युनिशन खत्म होने का खतरा नहीं रहता है। इजरायली अधिकारियों ने इस टेक्नोलॉजी को प्रोजेक्टाइल हमलों से बचाव में गेम-चेंजर बताया है।
