अमेरिका से युद्ध से बचने के लिए ईरान वार्ता को तैयार, सऊदी अरब निभा सकता है अहम किरदार
अमेरिका के साथ युद्ध के आसार के बीच ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मुहम्मद ...और पढ़ें

अमेरिका से युद्ध से बचने के लिए ईरान वार्ता को तैयार (फोटो- रॉयटर)
HighLights
ईरानी राष्ट्रपति ने कहा, वह युद्ध टालने के लिए किसी भी प्रक्रिया का स्वागत करेंगे
ईरान में महंगाई के विरोध में प्रदर्शनों के दौरान कुल 6,126 लोग मारे गए
रॉयटर, तेहरान। अमेरिका के साथ युद्ध के आसार के बीच ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मुहम्मद बिन सलमान से फोन पर बात की है। ईरानी राष्ट्रपति ने कहा, वह युद्ध टालने के लिए किसी भी प्रक्रिया का स्वागत करेंगे।
उन्होंने कहा कि ईरान अंतरराष्ट्रीय कानून का पूरा सम्मान करता है और हर मसले पर बातचीत के लिए तैयार है। इस बीच अमेरिका की मानवाधिकारों के लिए कार्य करने वाली न्यूज एजेंसी ने कहा है कि ईरान में महंगाई के विरोध में प्रदर्शनों के दौरान कुल 6,126 लोग मारे गए। 28 दिसंबर से शुरू हुए ये प्रदर्शन 16 जनवरी तक चले थे।
लंबे समय से जारी प्रतिबंधों और हालिया सैन्य गतिरोध के बीच, ईरान ने अमेरिका के साथ बातचीत के द्वार खोलने की इच्छा जताई है।
ईरान के विदेश मंत्रालय के अनुसार, यदि अमेरिका आपसी सम्मान के आधार पर और पुराने समझौतों (जैसे परमाणु समझौता) की शर्तों पर लौटने को तैयार है, तो ईरान युद्ध के बजाय संवाद को प्राथमिकता देगा। इस पहल का मुख्य उद्देश्य आर्थिक संकट को कम करना और क्षेत्र में पूर्ण स्तर के युद्ध की संभावना को समाप्त करना है।
- युद्ध टालने की प्राथमिकता: ईरान ने स्पष्ट किया है कि वह क्षेत्र में किसी भी तरह के सैन्य टकराव का विस्तार नहीं चाहता और कूटनीति को प्राथमिकता दे रहा है।
- परमाणु समझौते पर चर्चा: वार्ता का मुख्य केंद्र 2015 के परमाणु समझौते को पुनर्जीवित करना और उस पर लगी पाबंदियों को हटाना हो सकता है।
- आर्थिक राहत की मांग: ईरान की प्राथमिकता अमेरिकी प्रतिबंधों को हटाना है, जिससे उसकी गिरती अर्थव्यवस्था को सहारा मिल सके।
- क्षेत्रीय स्थिरता: विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वार्ता सफल होती है, तो सीरिया, लेबनान और यमन जैसे क्षेत्रों में जारी छद्म युद्ध में भी कमी आ सकती है।
- अमेरिका की शर्त: वाशिंगटन ने पहले ही संकेत दिया है कि किसी भी गंभीर वार्ता के लिए ईरान को अपनी बैलिस्टिक मिसाइल गतिविधियों और क्षेत्रीय हस्तक्षेप पर लगाम लगानी होगी।
