9323550000000 खरब की संपत्ति अनफ्रीज करे अमेरिका... अपनी शर्तों पर अड़ा ईरान; आखिर क्या है 'फ्रोजन एसेट्स'?
अमेरिका और ईरान के बीच इस्लामाबाद में शांति वार्ता के दूसरे दौर से पहले ईरान ने 100 अरब डॉलर से ...और पढ़ें

अलग-अलग देशों में फ्रीज हैं ईरान की 100 अरब डॉलर की संपत्ति

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच इस्लामाबाद में शांति वार्ता के दूसरे दौर की बातचीत से पहले ईरान ने एक बार फिर अपनी पुरानी मांग दोहराई है। तेहरान अमेरिका से अपने 100 अरब डॉलर से अधिक के फ्रोजन एसेट्स को अनफ्रीज करने की मांग कर रहा है। ये एसेट्स दशकों से अमेरिकी प्रतिबंधों के चलते अलग-अलग देशों की बैंकों में जमा पड़े हैं।
फ्रोजन एसेट क्या है?
जब किसी देश की सरकार, अदालत, बैंक या अंतरराष्ट्रीय संगठन किसी व्यक्ति, कंपनी या दूसरे देश की संपत्ति जैसे बैंक अकाउंट, पैसे, शेयर या बॉन्ड को अस्थायी रूप से जब्त कर लेता है या इस्तेमाल करने से रोक देता है, तो उसे फ्रोजन एसेट कहते हैं। इसका मतलब है कि मालिक उस संपत्ति को इस्तेमाल, बेच या ट्रांसफर नहीं कर सकता, जब तक फ्रीज नहीं हटाया जाता है।
गालिबाफ ने रख दी शर्त
ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बघेर गालिबाफ ने बातचीत शुरू होने से ठीक पहले एक्स पर लिखा कि किसी भी बातचीत से पहले फ्रोजन एसेट्स को रिहा किया जाना चाहिए। ईरान के मुताबिक, ये फंड्स मुख्य रूप से तेल निर्यात से प्राप्त हुए राजस्व हैं, जिन पर 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद अमेरिका ने बैन लगाए थे।
बाद में ईरान के परमाणु कार्यक्रम और बैलिस्टिक मिसाइलों को लेकर ये प्रतिबंध और सख्त हो गए। फ्रोजन एसेट्स की कुल राशि ईरान की जीडीपी का लगभग एक चौथाई है। मिडिल ईस्ट काउंसिल ऑन ग्लोबल अफेयर्स के फ्रेडरिक श्नाइडर ने अल जजीरा को बताया कि यह फ्रोजन एसेट ईरान की सालाना हाइड्रोकार्बन बिक्री से तीन गुना ज्यादा है।
100 अरब डॉलर के फ्रोजन एसेट्स
ये फ्रोजन एसेट्स दुनिया के कई देशों में फैले हुए हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, चीन में करीब 20 अरब डॉलर, जापान में 1.5 अरब डॉलर, भारत में 7 अरब डॉलर, इराक में 6 अरब डॉलर, अमेरिका में लगभग 2 अरब डॉलर और यूरोप (जैसे लक्जमबर्ग) में 1.6 अरब डॉलर के एसेट्स फ्रोजन हैं। इसके अलावा कतर में दक्षिण कोरिया से ट्रांसफर किए गए 6 अरब डॉलर भी हैं, जो 2023 के कैदी विनिमय समझौते के तहत कतर पहुंचे थे लेकिन बाद में फिर ब्लॉक कर दिए गए।
ईरान की अर्थव्यवस्था इन प्रतिबंधों से बुरी तरह प्रभावित हुई है। इससे देश में महंगाई बढ़ी, रियाल की कीमत गिरी और बुनियादी ढांचा युद्ध के कारण क्षतिग्रस्त हुआ। वार्ता के पहले दौर में कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि अमेरिका ने कुछ एसेट्स अनफ्रीज करने पर सहमति जताई है, लेकिन वाशिंगटन ने इसे तुरंत खारिज कर दिया। ईरानी सूत्रों ने कहा कि कम से कम 6 अरब डॉलर की रिहाई विश्वास बनाने का कदम साबित हो सकती है।
