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फ्रीडम, मॉडर्न और इक्वलिटी... 1979 की इस्लामी क्रांति से पहले कैसा था ईरान?

Published: Tue, 03 Mar 2026 05:20 PM (IST)Updated: Tue, 03 Mar 2026 06:20 PM (IST)

1979 की इस्लामी क्रांति से पहले ईरान एक आधुनिक और स्वतंत्र देश था। महिलाएं शिक्षा, नौकरी और प्रशासन में सक्रिय ...और पढ़ें

1979 की इस्लामी क्रांति से पहले कैसा था ईरान?

1979 की इस्लामी क्रांति से पहले कैसा था ईरान?

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गरिमा सिंह, नई दिल्ली। ईरान, मिडिल ईस्ट का एक शिया बहुल देश, आज जिस हालात से गुजर रहा है, वो शायद उसके इतिहास में किसी ने कभी सोचा ही नहीं होगा। इजरायल और अमेरिका के संयुक्त हमलों ने हालात को भयावह बना दिया है। देशभर में असुरक्षा और बेचैनी का माहौल है।

हालांकि, सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत के बाद यहां इस्लामी कट्टरपंथी के खात्मे के आसार नजर आ रहे हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि ईरान हमेशा ऐसा नहीं था? आइए उस दौर की कहानी सुनाते हैं जब ईरान मिडिल ईस्ट का सबसे मॉडर्न चेहरा हुआ करता था

Tehran, ca. 1960s-1970s (1)

Iranian Fashion of the 1970s (15)

(तेहरान की सड़कों पर घूमते लोग, फोटो - rarehistoricalphotos)

इस्लामी क्रांति से पहले का ईरान

1979 से पहले, ईरान एक मॉडर्न देश था, जहां महिलाएं ज्यादातर आजाद थीं। वे शिक्षा से लेकर नौकरी तक हर जगह आगे थीं।

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(महिलाहों की आजादी की एक झलक - rarehistoricalphotos)

ईरान में लड़कियां और महिलाएं मिनी स्कर्ट पहन सकती थीं, हिजाब का तो नामोनिशान नहीं था। वे पुरुषों के साथ कदम ताल मिलकर चलती थीं, गाडी चलाती थीं, ऊंचे पदों पर नियुक्त होती थीं, और  प्रशासन में भी भागीदारी निभाती थीं।

Iranian Fashion of the 1970s (17)

(ईरान का मॉडर्न चेहरा विश्वविद्यालयों फोटो क्रेडिट - rarehistoricalphotos)

पहलवी का शासनकाल

ईरान के शाह मोहम्मद रजा पहलवी ने 1963 में 'सफेद क्रांति' के माध्यम से देश का तेजी से औद्योगीकरण और आधुनिकरण किया था। इस दौरान जमीन सुधार, महिलाओं को वोट का अधिकार, और शिक्षा पर जोर दिया गया था।

Tehran, ca. 1960s-1970s (9)

(ईरानी विश्वविद्यालयों में महिलाएं, फोटो क्रेडिट - rarehistoricalphotos)

ईरान में तब साक्षरता दर बढ़ी थी और 1970 के दशक तक विश्वविद्यालयों में लगभग एक-तिहाई छात्र महिलाएं थीं। उस दौरान तेहरान में नाईट क्लब और सिनेमा हॉल आम बात थी। इसके साथ ही पश्चिमी देशों की तरह कैफे और पब हुआ करते थे। शराब और सिगरेट पर कोई पाबंदी नहीं थी। ईरान, ब्रिटेन और अमेरिका का सबसे बड़ा सहयोगी हुआ करता था।

Tehran, ca. 1960s-1970s (10)

(ईरान का मॉडर्न चेहरा विश्वविद्यालयों फोटो क्रेडिट - rarehistoricalphotos)

रजा पहलवी का दौर 1941 से 1979 तक चला था। इस दौरान ईरान अपने तेल के कमाई के दम पर सबसे शक्तिशली देशों में से एक हुआ करता था। तेहरान को मिडिल ईस्ट का मॉडर्न चेहरा तक कहा जाता था। ऊंची बिल्डिंग्स, सिनेमा हॉल, पश्चिमी ड्रेस और इससे भी ज्यादा उस समय ईरान की पहचान हुआ करता था।

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(1971 में क्वीन एलिजाबेथ बुलेवार्ड। फोटो क्रेडिट - rarehistoricalphotos)

क्रांति के बाद का ईरान

ईरान की खुफिया एजेंसी 'सावाक' उस दौरान विरोधियों का दमन करती थी। अमीर और गरीब के बीच बढती खाई और तेजी से बढती हुई पश्चिमी सभ्यता ने कहीं न कहीं ग्रामीणों को नाराज किया। जिससे एक 'इस्लामी क्रांति' का जन्म हुआ।

1978-79 में देशभर में बड़े प्रदर्शन हुए। इस दौरान धार्मिक नेता अयातुल्लाह रूहोल्लाह खुमैनी आंदोलन का चेहरा बनकर उभरे। जनवरी 1979 में पहलवी को देश छोड़कर भागना पड़ा। फरवरी 1979 में राजशाही के अंत हुआ। जनमत संग्रह के बाद ईरान को ‘इस्लामिक रिपब्लिक’ घोषित किया गया। नई व्यवस्था में सुप्रीम लीडर का पद बनाया गया, जो राष्ट्रपति से भी ऊपर है। खुमैनी पहले सुप्रीम लीडर बने।

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