क्या अमेरिका फिर हमला करेगा? ईरान ने अंडरग्राउंड न्यूक्लियर साइट पर निर्माण किया तेज, सैटेलाइट तस्वीरों से बढ़ी चिंता
अमेरिका और ईरान के बीच लगातार तनाव बढ़ रहा है। अमेरिका-ईरान युद्ध के बीच ईरान के संदिग्ध भूमिगत न्यूक्लियर साइट ...और पढ़ें

ईरान ने अंडरग्राउंड न्यूक्लियर साइट पर निर्माण किया तेज
HighLights
नतांज न्यूक्लियर कॉम्प्लेक्स के पास स्थित यह साइट ग्रेनाइट पहाड़ के नीचे बनी है
ट्रंप ने दावा किया कि साइट की हर मूवमेंट पर अमेरिका की तीखी नजर है
डिजिटल डेस्क, तेहरान। अमेरिका और ईरान के बीच लगातार तनाव बढ़ रहा है। अमेरिका-ईरान युद्ध के बीच ईरान के संदिग्ध भूमिगत न्यूक्लियर साइट ‘पिकैक्स माउंटेन’ पर निर्माण गतिविधियों में भारी उछाल देखा गया है।
सैटेलाइट तस्वीरों के विश्लेषण से यह खुलासा हुआ है, जिससे सवाल उठ रहा है कि क्या अमेरिका इस अंडरग्राउंड साइट पर फिर से हमला कर सकता है?
सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज (सीएसआईएस) के विश्लेषण के अनुसार, 2026 में इस साइट पर निर्माण गतिविधियों में साफ बढ़ोतरी हुई है। नतांज न्यूक्लियर कॉम्प्लेक्स के पास स्थित यह साइट ग्रेनाइट पहाड़ के नीचे बनी है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह ईरान के परमाणु कार्यक्रम के लिए सुरक्षित ठिकाना (सेफ हेवन) हो सकता है, जहां सेंट्रीफ्यूज असेंबली, यूरेनियम एनरिचमेंट या अन्य परमाणु गतिविधियां चलाई जा सकती हैं।
विश्लेषण में बताया गया है कि खुदाई से आगे बढ़कर अब अंदरूनी निर्माण, सुरंगों के प्रवेश द्वारों को मजबूत करने, सड़कों को पक्का करने और मलबा हटाने का काम जोरों पर है। हालांकि, साइट अभी एनरिचमेंट के लिए पूरी तरह तैयार नहीं है।
ट्रंप का धमकी भरा बयान
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने पिछले हफ्ते कहा था कि हम बहुत जल्द पिकैक्स पर हमला कर सकते हैं। उन्होंने दावा किया कि साइट पर हर मूवमेंट पर नजर है। अमेरिकी सैन्य सूत्रों के अनुसार, इस साइट को टारगेट करने की योजना पहले भी तैयार की गई थी, जिसमें भारी बम शामिल थे। लेकिन ग्रेनाइट पहाड़ इतना मजबूत है कि मौजूदा बम भी पूरी तरह नष्ट नहीं कर पाएंगे।
अमेरिका अब और गहरे भूमिगत ठिकानों को भेदने वाले ‘नेक्स्ट जेनरेशन पेनेट्रेटर’ बम विकसित कर रहा है। व्हाइट सैंड्स मिसाइल रेंज में भी संबंधित टेस्टिंग की गतिविधियां देखी गईं।
युद्ध के बीच बढ़ता खतरा
यह खुलासा उस समय हुआ है जब अमेरिका-ईरान संघर्ष फिर से तेज हो गया है। हाल ही में दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के जहाजों और ठिकानों पर हमले किए हैं, जिससे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गईं।
