दुबई, प्रेट्र। संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में बीमार एक भारतीय ने कोरोना महामारी के दौरान स्वदेश वापसी के लिए मदद मांगी है। आंशिक रूप से लकवाग्रस्त 79 वर्षीय भारतीय के राघवन ने कहा, 'मैं अपना शेष जीवन केरल में बिताना चाहता हूं। मुझे मेरी मातृभूमि में ही आखिरी सांस लेने दिया जाए।' 52 साल पहले यूएई पहुंचे राघवन दुबई में सिलाई की दो दुकानें चलाया करते थे।

अजमान में उन्होंने एक कारोबारी कंपनी भी शुरू की। कारोबार तबाह होने के बाद जुर्माना नहीं भरने के कारण वह स्वदेश लौटने में असमर्थ हो गए। एक फोड़े ने इस बुजुर्ग की सारी कमाई छीन ली। इसके बाद वह आंशिक रूप से लकवाग्रस्त हो गए।

अस्पताल का करीब 28.9 लाख रुपये का बिल बकाया

वर्तमान में दुबई के जफ्फिलिया इलाके के एक तंग कमरे में वह पत्नी के साथ रहते हैं। तीन साल पहले उनका वीजा समाप्त हो गया और वह उसका नवीकरण नहीं करा सके। उनके सिर पर जुर्माने के रूप में 60 हजार दिरहम (करीब 12.4 लाख रुपये) की देनदारी है। यह जुर्माना किराये का भुगतान नहीं करने और लाइसेंस नवीकरण नहीं कराने के कारण किया गया है। इसके अलावा उन पर दुबई के अस्पताल का 1,40,000 दिरहम (करीब 28.9 लाख रुपये) भी बकाया है। दुबई में भारतीय वाणिज्य दूतावास के आग्रह पर उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई थी। बीमार राघवन अब पूरी तरह से अपनी 65 वर्षीय पत्नी सरोजनी पर निर्भर हैं।

सोशल मीडिया में टिप्पणी करना पड़ा महंगा

वहीं, दूसरी ओर संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) की एक खनन कंपनी में काम करने वाले भारतीय कर्मी ब्रजकिशोर गुप्ता को सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक टिप्पणी करना महंगा पड़ा। एक खास धर्म के लोगों के प्रति आपत्तिजनक टिप्पणी करने पर गुप्ता को नौकरी से निकाल दिया गया। 

रस एल खैमा शहर स्थित खनन फर्म स्टेविन रॉक कंपनी के मैनेजर जीन-फ्रैंकोइस मिलिन ने इसकी पुष्टि की है। बिहार के रहने वाले ब्रजकिशोर ने फेसबुक पर भारतीय मुसलमानों पर आपत्तिजनक टिप्पणी करते हुए उन्हें कोरोना संक्रमण फैलाने वाला कहा था। एक अन्य पोस्ट में उसने इस साल दिल्ली में हुए सांप्रदायिक दंगे को ईश्वरीय न्याय कहा था।

Posted By: Dhyanendra Singh

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