बेरुत (रायटर्स)। भारी विस्‍फोटों के साथ सीरियाई आर्मी पूर्वी घोउटा में अंदर तक प्रवेश कर गयी है। विद्रोहियों से आजाद कराने में जुटी सेना के विस्‍फोटों का शिकार आम जनता भी हो रही है जिसके कारण पश्‍चिमी देशों की ओर से सीरिया सरकार की काफी निंदा की जा रही है। इस हमले से बचने के लिए लोग शरणार्थी शिविरों में रहने को मजबूर हैं जहां 300 लोगों के लिए केवल एक टॉयलेट है।

संयुक्‍त राष्‍ट्र ने कहा, बमबारी से बचने के लिए एंक्‍लेव में रहने वाले 400,000 नागरिक अंधेरे बेसमेंट में रहने को मजबूर हैं। पहले के हमले से टूटी हुई छत के नीचे पूरे परिवार के लिए वे शीट्स से घेर कर कमरे बना रह रहे हैं।डोउमा के शरणार्थी शिविर में एक व्‍यक्‍ति ने नाम न बताने की शर्त पर कहा, ’यह बिल्‍कुल रहने योग्‍य नहीं है। इसमें मुर्गियों को भी नहीं रखा जा सकता। यहां कोई बाथरूम नहीं बस एक टॉयलेट है और यहां 300 लोग हैं।‘

सीरियाई सुरक्षा बलों ने पूर्वी घोउटा में अपना अभियान तेज करते हुए विद्रोहियों के गढ़ वाले सबसे बड़े शहर का संपर्क काट दिया है। सरकारी सैनिकों और सहयोगी मिलिशिया ने 18 फरवरी को पूर्वी घोउटा के लिए अपना सैन्य अभियान शुरू किया और आधे से ज्यादा हिस्से में बढ़त बना ली। हिंसा रोकने का वैश्विक आह्वान भी बेअसर रहा।

सीरियाई राष्‍ट्रपति बशर अल-असद और इसके मजबूत सहयोगी रूस ने कहा है कि इस्‍लामिक विद्रोहियों को वहां से खत्‍म करने के लिए पूर्वी घोउटा पर हमला आवश्‍यक है। लेकिन सीरियाई ऑबजर्वेटरी मानवाधिकार के उस बयान जिसके तहत तीन हफ्तों में 1,160 लोग मारे गए, की वजह से पश्‍चिमी देशों से काफी निंदा झेलनी पड़ी।

Posted By: Monika Minal