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युद्ध छिड़ा तो कहां हैं ईरान के मित्र देश, संकट की घड़ी में उत्तर कोरिया-रूस जारी कर रहे सिर्फ बयान

Published: Fri, 06 Mar 2026 05:31 AM (IST)Updated: Fri, 06 Mar 2026 07:14 AM (IST)

ईरान जब अमेरिका-इजरायल के हमले का सामना कर रहा है तो इन मित्रों, पड़ोसियों और साझेदारों की ओर से उसे ...और पढ़ें

युद्ध छिड़ा तो कहां हैं ईरान के मित्र देश (फोटो- रॉयटर)

युद्ध छिड़ा तो कहां हैं ईरान के मित्र देश (फोटो- रॉयटर)

HighLights

  1. अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद कई देशों के साथ बनाए रखे संबंध

  2. युद्ध छिड़ने उसे देने के लिए इनके पास शब्दों के अलावा कुछ नहीं

न्यूयॉर्क टाइम्स, इस्तांबुल। पश्चिम की तरफ से लंबे समय से अलग-थलग किए जाने और अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद ईरान ने कई देशों के साथ कूटनीतिक, कारोबारी और सैन्य संबंध बनाए रखे हैं। लेकिन गत शनिवार को अमेरिका-इजरायल ने हमला किया तो ऐसे में यह सवाल उठता है कि उसके मित्र देश अब कहां हैं।

चीन सस्ते तेल के लिए उसकी ओर देखता है। जबकि उत्तर कोरिया, वेनेजुएला और रूस इस देश को पश्चिम के खिलाफ अपनी लड़ाई में अपना सहयोगी मानते हैं।

ईरान जब अमेरिका-इजरायल के हमले का सामना कर रहा है तो इन मित्रों, पड़ोसियों और साझेदारों की ओर से उसे देने के लिए शब्दों के अलावा कुछ नहीं है। इसकी वजह यह भी है कि कई पड़ोसी देशों को उसके ही हमले का सामना करना पड़ रहा है।

ईरान की ओर से दागी गई एक बैलिस्टिक मिसाइल को नाटो ने मार गिराया

तुर्किये ने बुधवार को कहा कि ईरान की ओर से दागी गई एक बैलिस्टिक मिसाइल को नाटो ने मार गिराया। हालांकि ईरान ने गुरुवार को तुर्किये को निशाना बनाने से इन्कार किया। वह इस समय सच्चे सहयोगियों के बिना युद्ध में अकेला है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह ईरान की विदेश नीति का परिणाम है, जिसने अन्य देशों के प्रति प्रतिबद्धताओं की जगह मलेशिया में निवेश किया, जो अमेरिका और इजरालय के खिलाफ लड़ते हैं। इन सशस्त्र समूहों से ईरान को मदद नहीं मिल सकती।

इन समूहों में सबसे शक्तिशाली लेबनान में हिजबुल्ला और गाजा पट्टी में हमास इजरायल के साथ संघर्षों में पहले ही कमजोर हो चुके हैं।

जबकि ईरान समर्थित यमन के हाउती विद्रोही और इराकी सशस्त्र समूह लाल सागर में जहाजों या इराक में अमेरिकी बलों को निशाना बना सकते हैं। हालांकि ऐसे हमलों से ईरान में चल रहे युद्ध की दिशा बदलने की संभावना नहीं है।

इस्तांबुल आधारित थिंक टैंक ईडीएएम के निदेशक और तुर्किये के पूर्व राजनयिक सिनान उलगेन ने कहा, 'आप यह देख सकते हैं कि इन चार देशों में से एक के लिए इसका कोई मतलब नहीं है, जब वे पश्चिम की घेराबंदी में हैं।' उन्होंने यह बात चीन, रूस, ईरान और उत्तर कोरिया के संदर्भ में कही।

अमेरिकी पनडुब्बी ने युद्धपोत पर बिना चेतावनी के हमला बोला : ईरानी राजनयिक

मुंबई में ईरान के महावाणिज्यदूत सईद रजा मोसयेब मोतलाघ ने गुरुवार को कहा कि हिंद महासागर में ईरानी नौसैनिक जहाज को डुबोने वाली अमेरिकी पनडुब्बी ने कोई पूर्व चेतावनी जारी नहीं की और अचानक हमला बोल दिया, जिससे जहाज में विस्फोट हो गया।

मोतलाघ ने बताया कि 'आईरिस देना' नामक जहाज नौसैनिक अभ्यास के लिए भारत आया था और अभ्यास के बाद घर लौट रहा था, तभी उस पर हमला हुआ।

उन्होंने कहा कि जब कोई जहाज ऐसे अभ्यासों के लिए आता है, तो वह पर्याप्त युद्ध सामग्री नहीं ले जाता। उसके पास जो भी सीमित मात्रा में गोला-बारूद होता है, वह आमतौर पर अभ्यास के दौरान ही इस्तेमाल हो जाता है। इसलिए, यह कहा जा सकता है कि इस जहाज के पास व्यावहारिक रूप से कोई सैन्य गोला-बारूद नहीं था।