दैर अल जोर [सीरिया]। इस्‍लामिक स्‍टेट का आखिरी गढ़ बागौज पर जल्‍द ही सीरियन डेमोक्रेटिक फोर्सेस का कब्‍जा होने की उम्‍मीद जताई जा रही है। यहां पर पिछले तीन दिनों से आईएस के आतंकियों और एसडीएफ के बीच भीषण जंग चल रही है। एसडीएफ का कहना है कि क्‍योंकि इस शहर में काफी स्‍थानीय नागरिक भी हैं इसलिए उन्‍हें थोड़ी दिक्‍कत हो रही है। इस बीच बड़ी खबर ये भी है कि आईएस के सैकड़ों लड़ाकों ने अपनी हार को देखते हुए एसडीएफ के सामने आत्‍म समर्पण कर दिया है। एसडीएफ का कहना है कि यहां पर मौजूद ज्‍यादा आईएस के लड़ाके विदेशी हैं। इनमें से अधिकतर उजबेकिस्‍तान और तुर्कमेनिस्‍तान से हैं।

हालांकि इस जंग में आम नागरिकों को कम से कम जोखिम हो इसके लिए एसडीएफ ने बीते दो दिनों से इन लोगों के सकुशल युद्ध क्षेत्र से बाहर जाने का रास्‍ता खोल दिया है। एसडीएफ की मानें तो बीते 24 घंटों में ही करीब 6500 लोग यहां से बाहर चले गए हैं। इस इलाके पर यूं तो एसडीएफ ने काफी हद तक नियंत्रण पा लिया है, लेकिन अब भी कुछ ऐसे इलाके बचे हैं जहां पर आईएस का कब्‍जा काफी मजबूत बताया जा रहा है। इस मजबूती का फायदा उठाते हुए आईएस एसडीएफ पर अब घात लगाकर हमला कर रहा है। वहीं जानकारों का मानना है कि यह उनकी आखिरी जंग है, इसलिए अपने अस्तित्‍व को बचाने के लिए वह इस तरह के गुरिल्‍ला युद्ध का सहारा ले रहे हैं।

एसडीएफ के मीडिया प्रमुख मुस्‍तफा बाली का कहना है कि जो यहां से छोड़कर जा चुके हैं उन लोगों का सही आंकड़ा देना फिलहाल संभव नहीं है। उनके मुतबिक दूसरे दिन भी करीब 3500 लोगों ने इस जगह को छोड़ दिया है। इसमें महिलाएं, पुरुष और बच्‍चे शामिल हैं। इसके अलावा इसमें 500 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। हालांकि एसडीएफ एहतियातन इन सभी लोगों की जांच कर इनको आगे भेज रही है। एसडीएफ को शक है कि इनकी आड़ में आईएस आतंकी भी उनकी गिरफ्त से बाहर जा सकते हैं। आपको बता दें कि इराक से लगती सीरिया की सीमा पर संयुक्‍त राष्‍ट्र ने कैंप लगाया है। यूएन के आंकड़ों के मुताबिक दिसंबर से अब तक करीब 84 लोगों की मौत हुई है जिसमें ज्‍यादातर बच्‍चे शामिल हैं।

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Posted By: Kamal Verma

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