सऊदी अरब पर चौतरफा संकट: रियाद एयरपोर्ट पर हूती हमलों ने सुरक्षा के साथ अर्थव्यवस्था को भी हिलाया
सऊदी अरब पर यमन के हूती विद्रोहियों के बार-बार मिसाइल और ड्रोन हमले सिर्फ सुरक्षा खतरा नहीं, बल्कि क्राउन प्रिंस ...और पढ़ें

रियाद एयरपोर्ट पर हूती हमलों ने सुरक्षा के साथ अर्थव्यवस्था को भी हिलाया
HighLights
हूती विद्रोहियों के बार-बार होते हमले क्राउन प्रिंस सलमान के लिए बनी बड़ी मुसीबत
सऊदी अरब के पर्यटन क्षेत्र को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सऊदी अरब पर यमन के हूती विद्रोहियों के बार-बार मिसाइल और ड्रोन हमले सिर्फ सुरक्षा खतरा नहीं, बल्कि क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (एमबीएस) के महत्वाकांक्षी विजन 2030 के लिए भी बड़ा संकट बन गए हैं।
रियाद एयरपोर्ट पर हालिया हमलों में कम से कम 13 लोग मारे गए और 300 से अधिक घायल हुए। उड़ानें प्रभावित हुईं और अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम भी बाधित हुए। अरामको मुख्यालय पर भी हमला हुआ।
विजन 2030 का लक्ष्य तेल निर्भरता कम करना, विदेशी निवेश आकर्षित करना, पर्यटन बढ़ाना और रियाद को वैश्विक व्यापारिक केंद्र बनाना है। इसकी सफलता स्थिरता और सुरक्षा के भरोसे पर टिकी है।
भूख से जूझता यमन, लेकिन हथियारों से लैस हूती
संयुक्त राष्ट्र के अनुसार 2026 में यमन में 2.2 करोड़ से अधिक लोगों को मानवीय सहायता की जरूरत होगी। 1.83 करोड़ लोग गंभीर खाद्य असुरक्षा का सामना कर रहे हैं और 22 लाख से अधिक बच्चे कुपोषित हैं।
फिर भी हूती समूह सना सहित बड़े इलाकों पर नियंत्रण रखते हुए बैलिस्टिक मिसाइल, क्रूज मिसाइल और ड्रोन का बड़ा भंडार बनाए हुए है। वे लाल सागर में व्यापारिक शिपिंग को भी खतरा पहुंचाते हैं।
सितंबर में हूतियों ने बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य के पास रणनीतिक क्षेत्रों पर कब्जा किया। इसके बाद सऊदी अरब ने सैन्य अभियान फिर शुरू किया और हूतियों ने सऊदी बुनियादी ढांचे पर जवाबी हमले किए।
हथियारों की सप्लाई और फंडिंग
हूती अब सिर्फ ईरान से पूरे हथियार नहीं मंगाते। वे विदेशी पार्ट्स लाकर स्थानीय स्तर पर हथियार असेंबल करते हैं। जब्त शिपमेंट में चीनी मूल के सामान करीब 35 प्रतिशत हैं, जबकि ईरान से 21 प्रतिशत। ड्यूल-यूज आइटम (नागरिक और सैन्य दोनों उपयोग वाले) 80 प्रतिशत से अधिक हैं।
विजन 2030 पर असर
रियाद एयरपोर्ट हमलों के बाद कई कार्यक्रम प्रभावित हुए। डब्ल्यूपीसी एनर्जी कांग्रेस से कुछ सीनियर तेल अधिकारियों को हटाया गया। 24 अक्टूबर को रियाद में प्रस्तावित ईयू-जीसीसी शिखर सम्मेलन स्थगित कर दिया गया।
विशेषज्ञों का कहना है कि बार-बार के हमले निवेशकों और पर्यटकों के भरोसे को नुकसान पहुंचा सकते हैं, जिससे आर्थिक विविधीकरण धीमा पड़ सकता है।
