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रियाद एयरपोर्ट पर हूती के हमलों के बाद मिडिल ईस्ट में तनाव, जंग में सीधे शामिल हो सकता है अमेरिका

Published: Mon, 12 Oct 2026 12:15 PM (IST)

रियाद हवाई अड्डे पर हूती विद्रोहियों के लगातार हमलों ने मध्य पूर्व में तनाव बढ़ा दिया है, जिससे अमेरिका के सीधे संघर्ष में शामिल होने की संभावना बढ़ गई है।

हूती हमलों से रियाद हवाई अड्डे पर तनाव बढ़ा। (फोटो-रॉयटर्स)

हूती हमलों से रियाद हवाई अड्डे पर तनाव बढ़ा। (फोटो-रॉयटर्स)

HighLights

  1. हूती हमलों से रियाद हवाई अड्डे पर तनाव बढ़ा।

  2. अमेरिका के यमन संघर्ष में शामिल होने की संभावना।

  3. सऊदी अरब की आर्थिक योजनाओं पर नकारात्मक असर।

डिजिटल डेस्क, रियाद। सऊदी अरब की राजधानी रियाद के मुख्य अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर इस हफ्ते के अंत में दो घातक हमले हुए जिसने यमन के हूती विद्रोहियों की क्षमता को दिखाया है। जिससे क्षेत्र में एक और बड़े संघर्ष का खतरा मंडराने लगा है और इसमें अमेरिका के भी सीधे शामिल होने की संभावना बढ़ गई है।

दो दिन में दो हमले

सऊदी अरब के मुख्य हवाई अड्डे को निशान बनाकर शनिवार और रविवार को लगातार दो दिन हमले किए गए। शनिवार को हुए इस हमले में 12 लोगों की मौत हुई और 309 घायल हुए, जबकि रविवार के हमले में एक व्यक्ति की मौत हो गई और 11 लोग घायल हो गए।

हूतियों ने तुरंत इन हमलों की जिम्मेदारी ली और कहा कि ये सऊदी आक्रामकता का जवाब था। जिसमें यमन की राजधानी सना के एयरपोर्ट पर हुए हमले भी शामिल हैं।

सऊदी लड़ाकू विमान पहले से ही यमनी सरकारी बलों के जवाबी हमले में मदद कर रहे हैं। यह जवाबी कार्रवाई हूतियों द्वारा बाब अल-मंडेब के पास के इलाके पर कब्जा करने के बाद शुरू हुई है, जो लाल सागर के दक्षिणी प्रवेश द्वार पर ग्लोबल शिपिंग के लिए एक अहम रास्ता है।

स्वतंत्र लडाकू ताकत के रूप में विकसित हुए

फरवरी में ईरान के खिलाफ अमेरिका-इजरायल युद्ध शुरू होने के बाद से हूती अलग-थलग रहे थे। लेकिन हालिया हमले में पता चला कि यह समूह जो ईरान के तथाकथित एक्सिस ऑफ रेजिस्टेंस का सदस्य है कैसे अपनी खुद की स्वतंत्र लड़ाकू ताकत के रूप में विकसित हुआ है। उनके पास हथियारों की अपनी आधुनिक सप्लाई चेन है और वे अपनी मर्जी से कार्रवाई करने और तनाव बढ़ाने में सक्षम हैं।

वे सस्ती बैलिस्टिक मिसाइलों और स्थानीय स्तर पर असेंबल किए गए अटैक ड्रोनों के जरिए रियाद जैसे दूरदराज के क्षेत्रों को भी निशाना बनाने में सक्षम हैं। हाल ही में उन्होंने बाब अल-मंदेब और मोखा बंदरगाह के पास के अहम इलाकों पर कब्जा कर लिया था, जो वैश्विक तेल और समुद्री व्यापार का मुख्य मार्ग है।

हमलों के बावजूद तेल की कीमतों में गिरावट

एयरपोर्ट और जलडमरूमध्य के आस-पास टैंकरों पर हमलों के बाद भी सोमवार को तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। ट्रेडर्स ने रूस और यूक्रेन के बीच एनर्जी सीजफायर के बारे में राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के दावे पर गौर किया, जिससे दो दिन की बढ़त के बाद ब्रेंट क्रूड की कीमत 104 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गई।

हमलों के बाद क्राउन प्रिंस पर दबाव बढ़ा

इन हमलों ने सऊदी अरब के वास्तविक शासक क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान पर दबाव बढ़ा दिया है। इन हमलों के बाद उन्हें एक ऐसे युद्ध को आगे बढ़ाने का दबाव महसूस हो रहा है जिससे देश सालों से बाहर निकलने की कोशिश कर रहा था, और यह युद्ध एक ऐसे दुश्मन के खिलाफ है जो शायद पहले से कहीं ज्यादा सक्षम हो गया है।

इंटरनेशनल क्राइसिस ग्रुप में यमन के लिए सीनियर एनालिस्ट अहमद नागी ने कहा, 'अपने हमलों को तेज करके, वे सऊदी अरब पर पीछे हटने और अपना हवाई अभियान रोकने का दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं।'

उन्होंने आगे कहा, 'रियाद इन हमलों को तनाव में गंभीर बढ़ोतरी के तौर पर देखता है, खासकर इसलिए क्योंकि ये हमले पहले कभी नहीं देखे गए थे। ऐसे में संभावना है कि रियाद और ज्यादा सैन्य दबाव के साथ जवाब देगा।'

अमेरिका पर कार्रवाई का दबाव बढ़ा

शनिवार को मारे गए लोगों में एक अमेरिकी नागरिक भी शामिल था, इसलिए ट्रंप पर भी कार्रवाई करने का दबाव बढ़ रहा है। शनिवार को जब उनसे पूछा गया कि क्या अमेरिका हूतियों के खिलाफ हमलों में शामिल होगा, तो उन्होंने कहा, 'हम ऐसा कर सकते हैं, हम इस पर विचार करेंगे।'

इन हमलों ने सऊदी अरब के सहयोगियों, खासकर अमेरिका के सामने भी मुश्किल विकल्प खड़े कर दिए हैं। अमेरिका ने पिछले साल हूतियों के खिलाफ बड़े हमले किए थे और बाद में युद्धविराम के लिए सहमत हो गया था।

ट्रंप नवंबर में होने वाले मध्यावधि चुनावों से पहले ईरान के साथ सैन्य तनाव और नहीं बढ़ाना चाहते हैं, और वॉशिंगटन ने अब तक सऊदी हमले के लिए अपना समर्थन केवल खुफिया जानकारी साझा करने तक ही सीमित रखा है।

पेटीजॉन ने कहा, 'इस बात की बहुत कम संभावना है कि सऊदी इन हमलों को रोक पाएंगे, जब अमेरिका भी ऐसा नहीं कर सका - सिवाय इसके कि वे जमीनी सेना भेजें या उन यमनी लड़ाकों की क्षमता में भारी सुधार करें जिनका वे समर्थन कर रहे हैं।'

उन्होंने आगे कहा, 'हमलों को दबाने के लिए लॉन्चरों की तलाश में लगातार हवाई गश्त की जरूरत होती है, जो मुश्किल है। और ऐसा लगता है कि यमनियों ने अमेरिका के साथ युद्धविराम के बाद के समय का इस्तेमाल फिर से हथियार जुटाने के लिए किया है।'

इस बीच ब्रिटेन, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों ने अपने नागरिकों के लिए सऊदी अरब की यात्रा को लेकर सख्त एडवाइजरी जारी की है।

तुर्की और पाकिस्तान के लिए परीक्षा

यह तनाव तुर्की और पाकिस्तान के लिए भी एक परीक्षा है, जिन्होंने अगस्त में सऊदी अरब के साथ एक रक्षा समझौता किया था, जिसे मक्का रक्षा गठबंधन के नाम से जाना जाता है। दोनों ने किंगडम की रक्षा में मदद के लिए सैनिक या हथियार भेजने की इच्छा जताई है, लेकिन तुर्की ने हूतियों के खिलाफ आक्रामक अभियानों में शामिल होने से इनकार कर दिया है।

देश के आर्थिक एजेंडे पर विपरीत असर

सऊदी अरब के लिए हूतियों की यह सफलता एक चुनौतीपूर्ण समय में मिली है। किंगडम कई ऐसे कार्यक्रमों की मेजबानी करने वाला है जिनका मकसद खुद को दुनिया के सबसे आकर्षक निवेश स्थलों में से एक तौर पर पेश करना है।

इनमें उसका प्रमुख कार्यक्रम फ्यूचर इन्वेस्टमेंट इनिशिएटिव भी शामिल है, जिसे अक्सर डेवोस इन द डेज़र्ट कहा जाता है और जिसमें गोल्डमैन सैक्स के डेविड सोलोमन से लेकर ब्लैकरॉक के लैरी फिंक जैसे वॉल स्ट्रीट के दिग्गज शामिल होते हैं।

हमलों के कारण रियाद में आयोजित होने वाले वैश्विक सम्मेलनों और 'फ्यूचर इन्वेस्टमेंट इनिशिएटिव' जैसे कार्यक्रमों से बीपी (BP) और शेल (Shell) जैसी कई बड़ी तेल कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों ने पीछे हटना शुरू कर दिया है, जिससे देश के आर्थिक एजेंडे पर भी विपरीत असर पड़ रहा है।

विदेशी निवेश में रुकावट संभव

ये हमले ऐसे समय में हुए हैं जब मध्य पूर्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था, क्राउन प्रिंस के 'विज़न 2030' ट्रांसफॉर्मेशन एजेंडा पर सालों से भारी खर्च के बाद बढ़ते वित्तीय दबाव का सामना कर रही है।

सरकार ने इस महीने अपने बजट घाटे के अनुमान को बढ़ा दिया और कहा कि अर्थव्यवस्था में इस साल शायद 3.6% की गिरावट आएगी, जिससे विदेशी निवेश और फाइनेंसिंग और भी जरूरी हो गए हैं।

सऊदी-स्थित इंटरनेशनल बिजनेस एडवाइजरी फर्म 'एक्सेस KSA' के चीफ एग्जीक्यूटिव सईद अल-सादी ने कहा, 'हाल की घटनाओं से विदेशी निवेश में रुकावट आ सकती है, लेकिन निवेशक और पार्टनर बाहर नहीं निकलेंगे। वे स्थिति पर नजर रखेंगे और निवेश करने के लिए सही मौके का इंतजार करेंगे।'

फिर भी, सऊदी नेता अगर हमलों को खत्म करना चाहते हैं और शांति बहाल करना चाहते हैं, तो उनके पास तनाव बढ़ाने के अलावा कोई और रास्ता नहीं है।

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