हूती का सऊदी अरब के एयरबेस पर बड़ा हमला, कच्चे तेल में 3% से ज्यादा का उछाल; आपूर्ति पर भी पड़ा असर
हूती लड़ाकों ने सऊदी अरब के खमीस मुशैत एयरबेस पर मिसाइल और ड्रोन से हमला किया, जिससे कच्चे तेल की ...और पढ़ें

सऊदी एयरबेस पर हूती हमले से वैश्विक तेल बाजार में भारी उथल-पुथल
HighLights
हूती ने सऊदी अरब के खमीस मुशैत एयरबेस पर हमला किया।
हमले से कच्चे तेल की वैश्विक आपूर्ति और कीमतें प्रभावित हुईं।
अरब देशों की ईरान के साथ बैठक स्थगित, क्षेत्र में तनाव बढ़ा।
रॉयटर्स, दुबई। अरब देशों की ईरान के साथ सोमवार को ओमान में होने वाली बैठक स्थगित हो गई है। इस बैठक में अमेरिका-ईरान युद्ध और हूती लड़ाकों की आक्रामकता पर बात होनी थी। इस बीच यमन के हूती लड़ाकों ने सऊदी अरब के सीमा के नजदीक स्थित हामिस मुशैत वायुसेना अड्डे पर बैलेस्टिक मिसाइलों और ड्रोन से हमला किया है।
इस हमले में लड़ाकू विमानों के हैंगर, रडार सिस्टम, रनवे और गोला-बारूद के गोदामों को निशाना बनाया गया है। हूती के हमले में क्षतिग्रस्त हुई ईस्ट-वेस्ट तेल पाइपलाइन से जल्द आपूर्ति शुरू होने की संभावना नहीं है।
सऊदी अरब पर हुए हमलों का असर यह हुआ है कि सोमवार को वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की आमद चार प्रतिशत तक कम हो गई। इसके चलते अमेरिका और विश्व बाजार के तेल मूल्य में तेज उछाल देखा गया।
हूती ने कहा है कि सऊदी एयरबेस पर हुआ हमला उसके क्षेत्र पर सऊदी अरब के सैकड़ों हवाई हमलों का जवाब है। एयरबेस पर हमले के बाद सऊदी अरब के प्रशासन ने यमन की सीमा के नजदीक के अपने तीन शहरों के लिए अलर्ट जारी कर सामान्य गतिविधियों को सीमित कर दिया है।
इस बीच हूती लड़ाकों ने लाल सागर के किनारे के कई ठिकानों और कुछ अन्य द्वीपों पर भी कब्जा कर लिया है। इसके चलते बाब-अल-मंदेब स्ट्रेट से जहाजों के गुजरने पर आशंकाएं गहरा गई हैं। हूती लड़ाकों ने जिबूती में स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डे से महज 32 किलोमीटर दूर समुद्री ठिकाने पर भी कब्जा कर लिया है।
हूती की आक्रामकता के चलते क्षेत्र से आमजन घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जा रहे हैं। वैसे विश्व के सबसे महत्वपूर्ण जलमार्गों में शामिल बाब-अल-मंदेब के जरिये केवल सऊदी अरब के जहाजों के आवागमन पर हूती ने रोक लगाई है, बाकी देशों के व्यापारिक जहाजों का वहां से आवागमन सामान्य है।
विश्व के सबसे बड़े तेल निर्यातक सऊदी अरब पर हो रहे हमलों और उसकी आपूर्ति में बाधा आने के कारण सोमवार को विश्व बाजार में कच्चे तेल का मूल्य तीन प्रतिशत तक उछल गया। जबकि अमेरिका में सबसे महंगी दर 6.23 डालर प्रति गैलन पर तेल बिका।
इन स्थितियों में अमेरिका मुश्किल में फंसा हुआ है। वह अपने खास सहयोगी सऊदी अरब की हूती से हमले के मुकाबले में खास मदद नहीं कर पा रहा है। अमेरिका ने फिलहाल खुफिया सूचनाएं देने पर ही सहमति जताई है।
इसी प्रकार से अगस्त में हुए मक्का समझौते के अनुरूप सऊदी अरब की सैन्य मदद करने में पाकिस्तान और तुर्किये भी हिचक रहे हैं। दोनों ही देश बहानेबाजी कर समय निकाल रहे हैं जिससे सऊदी-हूती संघर्ष खुद-ब-खुद खत्म हो जाए।
