होर्मुज स्ट्रेट पर किसका हक? युद्ध के बीच क्या कहता है अंतरराष्ट्रीय कानून
पश्चिम एशिया में सैन्य टकराव के बीच होर्मुज स्ट्रेट वैश्विक राजनीति और ऊर्जा सुरक्षा का केंद्र बन गया है। यह ...और पढ़ें

होर्मुज स्ट्रेट पर किसका हक? (रॉयटर्स)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य टकराव के बीच होर्मुज स्ट्रेट एक बार फिर वैश्विक राजनीति, व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा का केंद्र बन गया है। ईरान द्वारा इस अहम समुद्री मार्ग में जहाजों की आवाजाही सीमित किए जाने के बाद बड़ा सवाल उठ खड़ा हुआ है क्या उसे अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत ऐसा करने का अधिकार है? और क्या अमेरिका जैसे देश सैन्य काफिलों के जरिए इस रास्ते को सुरक्षित बना सकते हैं?
युद्ध के बीच यह जलडमरूमध्य अब सिर्फ एक समुद्री मार्ग नहीं, बल्कि कानून, शक्ति और रणनीति के टकराव का प्रतीक बन चुका है।
क्यों इतना अहम है होर्मुज?
होर्मुज स्ट्रेट फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी से जोड़ता है और दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में गिना जाता है। दुनिया के तेल और गैस का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है, इसलिए इसे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की जीवन रेखा कहा जाता है। सबसे संकरे हिस्से में इसकी चौड़ाई करीब 39 किलोमीटर है। यानी, यहां किसी भी तरह की रुकावट सिर्फ क्षेत्रीय नहीं, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था पर सीधा असर डाल सकती है।

शांतिपूर्ण समय में क्या नियम हैं?
अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत होर्मुज को एक अंतरराष्ट्रीय जलडमरूमध्य माना जाता है। इसका सीधा मतलब है कि भले ही यह ईरान और ओमान के अधिकार क्षेत्र में आता हो, लेकिन दुनिया के सभी देशों के जहाजों को यहां से गुजरने का अधिकार है। शर्त केवल इतनी है कि जहाज बिना रुके और लगातार इस मार्ग को पार करें। ऐसे में तटीय देश, जैसे ईरान, सामान्य परिस्थितियों में उनकी आवाजाही नहीं रोक सकते।
युद्ध के समय क्या बदल जाता है?
जैसे ही सशस्त्र संघर्ष शुरू होता है, नियम भी बदल जाते हैं और समुद्री युद्ध कानून लागू हो जाता है। इस कानून के तहत देशों को दो श्रेणियों में बांटा जाता है युद्धरत जैसे ईरान, इजरायल व अमेरिका आरै तटस्थ जो इस संघर्ष का हिस्सा नहीं हैं।
1994 के सैन रेमो मैनुअल के अनुसार, तटस्थ देशों के जहाजों को अब भी इस जलडमरूमध्य से गुजरने का अधिकार होता है और युद्धरत देश उन्हें निशाना नहीं बना सकते। हालांकि, व्यवहार में यह सुरक्षा हमेशा पूरी तरह प्रभावी नहीं होती, यही वजह है कि कई देश अपने जहाजों को इस मार्ग से हटाने लगे हैं।
क्या ईरान होर्मुज को बंद कर सकता है?
युद्ध के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है। कानूनी रूप से स्थिति सीधी नहीं है। अगर कोई जलडमरूमध्य तटस्थ देश के नियंत्रण में हो, तो उसे खुला रखना अनिवार्य होता है। लेकिन जब वह किसी युद्धरत देश के प्रभाव में हो जैसे होर्मुज के मामले में ईरान तो स्थिति जटिल हो जाती है। ऐसे में ईरान पूरी तरह से रास्ता बंद करने का दावा तो कर सकता है, लेकिन ऐसा कदम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गंभीर टकराव और प्रतिक्रिया को जन्म दे सकता है।

क्या सैन्य काफिले सुरक्षित हैं?
अमेरिका जैसे देश अक्सर अपने युद्धपोतों के साथ व्यापारिक जहाजों को एस्कार्ट करने की रणनीति अपनाते हैं, ताकि उन्हें हमलों से बचाया जा सके। लेकिन यह रणनीति खुद जोखिम से भरी है। अगर कोई व्यापारी जहाज अमेरिकी युद्धपोत के साथ चलता है, तो वह ईरान के लिए वैध सैन्य लक्ष्य बन सकता है। यानी सुरक्षा देने की कोशिश कई बार खतरे को और बढ़ा सकती है।
तटस्थ देशों के लिए क्या खतरा है?
जो देश खुद को तटस्थ बताते हैं, उनके लिए भी जोखिम कम नहीं है। अगर कोई देश अप्रत्यक्ष रूप से किसी एक पक्ष की मदद करता है, तो उसे भी युद्ध का हिस्सा माना जा सकता है। ऐसी स्थिति में उसके जहाज और युद्धपोत भी हमले के दायरे में आ सकते हैं। यानी तटस्थ बने रहना भी इस संघर्ष में आसान नहीं है।
कानून बनाम जमीनी हकीकत
होर्मुज स्ट्रेट पर अंतरराष्ट्रीय कानून स्पष्ट दिशा जरूर देता है, लेकिन जमीनी हकीकत कहीं ज्यादा जटिल है। युद्ध के माहौल में कानूनी अधिकार और सैन्य रणनीतियां अक्सर आमने-सामने आ जाती हैं। तटस्थ जहाज भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं रह पाते। ऐसे में होर्मुज अब सिर्फ एक समुद्री रास्ता नहीं, बल्कि वैश्विक शक्ति संतुलन, ऊर्जा सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय कानून की सबसे बड़ी परीक्षा बन चुका है।
