135 की जगह केवल 10 जहाजों की एंट्री: कब खुलगा होर्मुज का द्वार, मुश्किल में व्यापार; Inside Story
पश्चिम एशिया में तनाव के कारण होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही में भारी गिरावट आई है, जिससे तेल और ...और पढ़ें
HighLights
जहाजों की आवाजाही 135 से घटकर प्रतिदिन 10 से भी कम हुई
12.5 करोड़ बैरल कच्चा तेल खाड़ी में फंसा है
रिफाइनिंग लाभ नकारात्मक, माल ढुलाई लागत 842% तक बढ़ी
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। एसएंडपी ग्लोबल एनर्जी के मुताबिक, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के चलते होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही में तेजी से गिरावट आई है। दो मार्च से प्रतिदिन 10 से भी कम जहाज इस रास्ते से गुजर रहे हैं जबकि फरवरी में औसतन प्रतिदिन 135 जहाज इस रास्ते से गुजरते थे।
इस रास्ते से आमतौर पर प्रतिदिन 1.41 करोड़ बैरल क्रूड और 54 लाख बैरल रिफाइंड उत्पाद विभिन्न देशों को जाता है और यह वैश्विल ऊर्जा आपूर्ति के लिए इस रास्ते की अहमियत को दिखाता है। इस रास्ते से तेल टैंकरों के नहीं निकलने से जाम की स्थिति हो गई है और इस इलाके में करीब 850 तेल टैंकर जमा हो गए हैं। इसका असर तेल और गैस लोडिंग में भी दिख रहा है।

तेल-गैस व्यापार में कितना घाटा?
मार्च में अब तक मिडिल ईस्ट गल्फ क्रूड शिपमेंट औसतन 74 लाख बैरल प्रतिदिन रहा है और यह फरवरी के आखिरी दिनों के आधे से भी कम है। एसएंडपी ग्लोबल एनर्जी के अनुसार, अनुमान है कि अभी खाड़ी में 12.5 करोड़ बैरल कच्चा तेल फंसा है और इसे होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की मंजूरी का इंतजार है।
भारत के लिए होर्मुज स्ट्रेट बहुत जरूरी है, क्योंकि 90 प्रतिशत एलपीजी आयात इसी रास्ते से होता है। भारत का लगभग 42 प्रतिशत कच्चा तेल इसी रास्ते से गुजरता है, लेकिन पश्चिम एशिया संघर्ष के चलते इसमें रुकावट बनी हुई है।

एसएंडपी ग्लोबल एनर्जी ने कहा कि होर्मुज में रुकावट समुद्री ट्रांसपोर्ट और अपस्ट्रीम सेक्टर के लिए एक भूंकप के झटके जैसा है। ऐसा माना जा रहा है कि सीजफायर होने के बाद भी पूरी तरह से स्थिति सामान्य होने में महीनों लगेंगे।

रिफाइनिंग कंपनियों को तगड़ा नुकसान
कच्चे तेल की आपूर्ति बाधित होने से एशिया की रिफाइनिंगकंपनियों का लाभ नकारात्मक दायरे में चला गया है। स्थिति यह आ गई है कि लाभ को बनाए रखने के लिए कंपनियां अपनी परिचालन लागत कम करने को मजबूत हो गई हैं।
बेंचमार्क सिंगापुर ग्रास रिफाइनिंग मार्जिन (क्षेत्रीय रिफाइनिंग मुनाफे का एक मुख्य संकेतक) मार्च की शुरुआत में लगभग 40-45 डालर प्रति बैरल के कई सालों के उच्चस्तर से तेजी से गिरकर हाल के सत्रों में पांच से दस डालर प्रति बैरल के नकारात्मक दायरे के बीच आ गया है।
भारतीय रिफाइनिंग कंपनियां भी इससे अछूती नहीं हैं। उद्योग सूत्रों ने बताया कि सिंगापुर के ग्रास रिफाइनिंग मार्जिन में माल ढुलाई की लागत शामिल नहीं होती है और इसका मतलब यह है कि रिफाइनिंग में होने वाला वास्तविक नुकसान कहीं ज्यादा हो सकता है।
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मिडिल ईस्ट में तनाव का असर
पश्चिम एशिया में तनाव के बाद से माल ढुलाई शुल्क में 842 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हुई है, क्योंकि जहाज का मालिकाना हक रखने वाली कंपनियों युद्ध को देखते हुए अतिरिक्त शुल्क वसूल रही है। सूत्रों ने बताया कि अफ्रामैक्स (यह मध्यम आकार का एक कच्चा तेल टैंकर है) के लिए दरें युद्ध पूर्व 2.46 डालर प्रति बैरल से बढ़कर 9.46 डालर प्रति बैरल हो गई हैं।

इससे बड़े सुएजमैक्स जहाजों की माल ढुलाई की दरें 1.87 डालर प्रति बैरल से बढ़कर 9.90 डालर प्रति बैरल हो गई हैं। वहीं बहुत बड़े तेल के जहाज (वीएलसीसी) के लिए दरें पहले के 0.97 डालर प्रति बैरल से बढ़कर 9.18 डालर प्रति बैरल हो गई हैं।
