नेतन्याहू के लिए नई सियासी चुनौती, कौन हैं इजरायल के गादी आइजेनकोट?
इजरायल के पूर्व सेना प्रमुख गादी आइजेनकोट प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सत्ता को चुनौती दे रहे हैं।

आइजेनकोट दे रहे नेतन्याहू की सत्ता को चुनौती।
HighLights
गादी आइजेनकोट, पूर्व सेना प्रमुख, नेतन्याहू की सत्ता को चुनौती दे रहे।
हमास हमले के बाद इजरायल में यह पहला आम चुनाव है।
आइजेनकोट हमास की सैन्य क्षमता को पूरी तरह निष्क्रिय करना चाहते हैं।
डिजिटल डेस्क, तेल अवीव। इजरायल की राजनीति इन दिनों एक ऐतिहासिक मोड़ पर खड़ी है। दशकों से सत्ता के केंद्र में काबिज प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के सामने एक ऐसा चेहरा खड़ा हो गया है, जिसने उनकी राजनीतिक जमीन हिला दी है। यह चेहरा हैं इजरायल के पूर्व सेना प्रमुख गादी आइजेनकोट।
गादी आइजेनकोट ने इजरायली सेना (IDF) में 41 साल तक अपनी सेवाएं दी हैं। वे 2015 से 2019 तक इजरायल डिफेंस फोर्सेज के चीफ ऑफ स्टाफ (सेना प्रमुख) रहे हैं। आइजेनकोट की खासियत है कि पहचान मु्ख्य रूप से एक सैन्य अधिकारी की रही है, साथ ही उनकी सादगी और साफ बोले की शैली उन्हें दूसरे नेताओं से अलग बनाती है।
नेतन्याहू के चुनौती दे रहे आइजेनकोट
आइजेनकोट, प्रधानमंत्री नेतन्याहू को सीधी चुनौती दे रहे हैं। जिसमें उनकी लोकप्रियता काफी ज्यादा है। यह चुनाव इस लिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि 2023 में हमास के हमले के बाद यह इजरायल में पहला आम चुनाव है। हमास के खिलाफ गाजा में नेतन्याहू ने व्यापक सैन्य अभियान चलाया था, जिसके बाद नेतन्याहू सरकार पर इजरायल की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए।
राष्ट्रीय सुरक्षा और नेतृत्व से जुड़े सवालों को लेकर आइजेनकोट, चुनावों में नेतन्याहू की सत्ता को चुनौती दे रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उनकी पार्टी याशार, नेतन्याहू की पार्टी लिकुड पार्टी को कड़ी टक्कर दे रही है।
नेतन्याहू की सरकार का हिस्सा रहे हैं आइजेनकोट
आपको जानकर हैरानी होगी कि आइजेनकोट ने नेतन्याहू सरकार में काम किया है। दोनों ने 7 अक्तूबर, 2023 को हमास हमले के बाद मिलकर काम किया था। उस समय आइजेनकोट नेतन्याहू की युद्ध कैबिनेट में बतौर पर्यवेक्षक शामिल हुए थे, हालांकि आठ महीने बाद ही उन्होंने इस्तीफा दे दिया था। जिसके पीछे की वजह युद्ध को लेकर पीएम नेतन्याहू और आइजेनकोट के बीच रणनीतिक मतभेद माने जाते रहे हैं।
हमास को लेकर सख्त रुख
आइजेनकोट का हमास को लेकर बहुत सख्त रुख है। उनका साफ कहना है कि या तो हमास की सैन्य क्षमता को खत्म किया जाए या फिर उसे पूरी तरह निष्क्रिय किया जाए। आइजेनकोट का कहना है कि इजरायल की सुरक्षा के लिए युद्धविराम पर्याप्त नहीं है। वह गाजा से इजरायल को होने वाली सुरक्षा संबंधी चिंताओं का स्थाई समाधान चाहते हैं।
