दुबई, एपी। अमेरिका के बाद अब फ्रांस ने भी अफगानिस्‍तान में तालिबान की सरकार को आईना दिखा दिया है। फ्रांस के विदेश मंत्री ने अफगानिस्तान की नवगठित तालिबान सरकार पर निराशा साधते हुए कहा कि यह समूह नेतृत्व की अधिक उदारवादी और समावेशी सरकार की पेशकश करने के अपने वादों पर खरा नहीं उतरा है। सोमवार को दोहा दौरे पर अपने कतरी समकक्ष के साथ बोलते हुए फ्रांस के विदेश मंत्री जीन-यवेस ले ड्रियन ने कहा कि काबुल में अब तक हमने तालिबान की जो प्रतिक्रिया देखी है वह उम्मीदों के अनुरूप नहीं है। 

फ्रांस के विदेश मंत्री ने यह भी कहा कि उनका मुल्‍क और बाकी अंतरराष्ट्रीय समुदाय तालिबान पर आतंकवादियों को शरण नहीं देने के लिए दबाव डालना जारी रखेंगे। हमारी कोशिश अफगानिस्‍तान में मानवीय सहायता की सुरक्षित डिलीवरी और महिलाओं के अधिकारों की रक्षा करने के लिए तालिबान पर दबाव बनाए रखने की होगी। हमने मानवीय सहूलियतें देने के बारे में तालिबान के दिए गए बयानों को सुना है। मौजूदा वक्‍त में केवल बयानबाजियों से काम नहीं चलने वाला है। हम तालिबान सरकार के कदमों का इंतजार कर रहे हैं।

वहीं कतर के विदेश मंत्री शेख मुहम्मद बिन अब्दुर रहमान अल-थानी का कहना है कि उसके अधिकारी तालिबान को अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ जुड़ने के लिए प्रोत्साहित करने में लगे हुए हैं। समाचार एजेंसी एपी की रिपोर्ट के मुताबिक फ्रांस और कतर के विदेश मंत्रियों का यह बयान ऐसे वक्‍त में सामने आया है जब अफगानिस्‍तान बड़े आर्थिक संकट से गुजर रहा है। यही नहीं तालिबान की नई सरकार भी अंतरराष्‍ट्रीय स्‍तर पर समर्थन जुटाने की जद्दोजहद कर रही है। कतर ने अफगानिस्तान में अपना उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी भेजा है।

उल्‍लेखनीय है कि हाल ही में अमेरिका ने कहा था कि वह अफगानिस्‍तान में तालिबान सरकार को मान्‍यता देने में किसी तरह की जल्‍दबाजी नहीं करेगा। यही नहीं रूस ने तो तालिबान सरकार के शपथ ग्रहण में भी जाने से इनकार कर दिया था। बाद में तालिबान को यह समारोह टालना पड़ा। सनद रहे कि रूस में तालिबान एक प्रतिबंधित आतंकी संगठन है। यही नहीं नाटो ने उन वजहों की पड़ताल करने का फैसला किया है ताकि पता लगाया जा सके कि इतनी जल्‍दी तालिबान ने अफगानिस्तान की सत्‍ता पर कब्‍जा कैसे कर लिया।