होर्मुज अलर्ट: 5 समुद्री गलियारों पर टिकी है दुनिया की ऊर्जा सुरक्षा
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी ने वैश्विक तेल सप्लाई पर निर्भरता का बड़ा खतरा उजागर किया है। दुनिया का अधिकांश कच्चा तेल
-1775214696072_m.webp)
होर्मुज संकट ने दिखाया बड़ा जोखिम 5 समुद्री रास्तों पर टिकी है दुनिया की ऊर्जा सप्लाई (फाइल फोटो)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की नाकेबंदी ने दुनिया के सामने एक बड़ा खतरा उजागर कर दिया है। यह खतरा है वैश्विक तेल सप्लाई का कुछ गिने-चुने समुद्री रास्तों पर निर्भर होना। इन पांच अहम जलडमरूमध्यों से हर दिन करीब 6 करोड़ बैरल कच्चा तेल गुजरता है, जो यूरोप और एशिया की अर्थव्यवस्था के लिए बेहद जरूरी है।
28 फरवरी के बाद यह खतरा तब साफ दिखने लगा, जब अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच टकराव बढ़ा और ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को ब्लॉक कर दिया। यह रास्ता सिर्फ 33 किलोमीटर चौड़ा है और दुनिया के 20-25 प्रतिशत समुद्री तेल की सप्लाई इसी से होती है।
ईरान इस जलडमरूमध्य पर भौगोलिक रूप से लगभग पूरा नियंत्रण रखता है। यहां तैनात एंटी-शिप मिसाइलें और ड्रोन किसी भी जहाज के लिए बड़ा खतरा बन सकते हैं। जहाजों के आने-जाने के रास्ते सिर्फ 3.2 किलोमीटर चौड़े हैं, जिससे ट्रैफिक भी धीमा हो गया है।
'फाइव स्ट्रेट्स' का पूरा सिस्टम
होर्मुज के अलावा चार और अहम समुद्री रास्ते हैं, जिन पर दुनिया की तेल सप्लाई निर्भर है। इनमें बाब-अल-मंदब, मलक्का जलडमरूमध्य, स्वेज नहर और तुर्की जलडमरूमध्य शामिल हैं। इन सभी रास्तों से मिलाकर हर दिन करीब 4 करोड़ बैरल तेल गुजरता है। ये सभी इलाके राजनीतिक और सैन्य रूप से संवेदनशील हैं, जिससे खतरा और बढ़ जाता है।
बाब-अल-मंदब जलडमरूमध्य लाल सागर को अरब सागर से जोड़ता है। युद्ध से पहले दुनिया के 10-12 प्रतिशत तेल की सप्लाई यहीं से होती थी। लेकिन यमन के हूती विद्रोही यहां से गुजरने वाले जहाजों के लिए खतरा बने हुए हैं।
मलक्का जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे व्यस्त तेल मार्ग है, जहां से 22-29 प्रतिशत तेल गुजरता है। यहां सबसे बड़ा खतरा समुद्री लूट (पायरेसी) का है। 2025 में 100 से ज्यादा ऐसी घटनाएं सामने आईं, जो 19 साल में सबसे ज्यादा हैं।
स्वेज नहर और तुर्की जलडमरूमध्य
स्वेज नहर लाल सागर को भूमध्य सागर से जोड़ती है और यहां से हर दिन करीब 7.5 मिलियन बैरल तेल गुजरता है। लेकिन यहां भी खतरा बना रहता है, खासकर लाल सागर में अस्थिरता के कारण। 2021 में 'एवर गिवेन' नाम का जहाज फंसने से यह नहर छह दिन तक बंद रही थी, जिससे 400 से ज्यादा जहाज रुक गए और करीब 54 अरब डॉलर का नुकसान हुआ।
तुर्की जलडमरूमध्य से रोज 2-3 मिलियन बैरल तेल गुजरता है, जो वैश्विक मांग का करीब 2 प्रतिशत है। यहां ज्यादातर रूस और कैस्पियन क्षेत्र का तेल आता है।
होर्मुज की सबसे बड़ी भूमिका
युद्ध से पहले होर्मुज से हर दिन करीब 2 करोड़ बैरल तेल गुजरता था। इसमें सबसे ज्यादा हिस्सा चीन लेता था, जो करीब 38 प्रतिशत था। भारत 12-15 प्रतिशत तेल खरीदता था, जो उसकी कुल जरूरत का 40-50 प्रतिशत हिस्सा था। जापान और दक्षिण कोरिया भी इस पर काफी निर्भर हैं। इन देशों की अर्थव्यवस्था मिलकर दुनिया की जीडीपी का करीब 30 प्रतिशत हिस्सा बनाती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि तेल और गैस आयात करने वाले देश लगातार सप्लाई पर निर्भर हैं। अगर यह सप्लाई रुकती है, तो सप्लाई चेन टूट सकती है, कीमतें बढ़ सकती हैं और आर्थिक संकट गहरा सकता है।
'ट्रंप से नहीं हो पा रहा, खुद ही समाप्त करो युद्ध'; ईरान के पूर्व विदेश मंत्री ने दी सलाह
