मक्का में पहली बार हमले के अलर्ट से सऊदी अरब में हड़कंप, मुस्लिम समूहों ने की हूती विद्रोहियों की निंदा
मक्का में इतिहास में पहली बार संभावित हवाई हमले की चेतावनी के बाद आपातकालीन अलर्ट जारी किया गया, जिसमें निवासियों को सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी गई।
HighLights
मक्का में पहली बार आपातकालीन हवाई हमले का अलर्ट जारी हुआ।
ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों से सऊदी अरब को गंभीर खतरा।
ओआईसी ने हूती हमलों को आतंकवाद करार देते हुए निंदा की।
डिजिटल डेस्क, रियाद। इस्लाम के सबसे पवित्र शहर मक्का के इतिहास में पहली बार सऊदी अरब के सिविल डिफेंस ने संभावित हवाई हमले की चेतावनी देते हुए इमरजेंसी अलर्ट जारी किया। अलर्ट में निवासियों को सलाह दी गई कि वे सुरक्षित जगहों पर घर के अंदर चले जाएं और खतरा टलने तक खिड़कियों और दरवाजों से दूर रहें।
जेद्दा और ताइफ इलाकों के लिए भी ऐसी ही चेतावनी जारी की गई। अलर्ट कुछ ही मिनटों में हटा लिया गया लेकिन यह ऐसे समय में आया है जब सऊदी अरब को ईरान समर्थित हूती समूह से सुरक्षा की बढ़ती चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। इस समूह ने यमन के रणनीतिक रूप से अहम लाल सागर तट पर अपनी पकड़ मजबूत करते हुए सऊदी अरब पर हमले तेज कर दिए हैं।
'आहत हुईं मुस्लिमों की भावनाएं'
ऑर्गनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कोऑपरेशन (OIC) ने मक्का और मदीना के इलाकों पर हूती विद्रोहियों के हमलों की निंदा की है। संगठन ने इन हमलों को घिनौना बताया और कहा कि इनसे आम नागरिकों को खतरा है, पवित्र स्थलों और मस्जिदों की पवित्रता का उल्लंघन हुआ है और दुनिया भर के मुसलमानों की भावनाएं आहत हुई हैं।
ओआईसी ने पवित्र स्थलों, मस्जिदों और आम नागरिकों के बुनियादी ढांचे पर हमलों को आतंकवाद करार दिया और कहा कि इस तरह के उल्लंघन अस्वीकार्य और असहनीय हैं। संगठन ने सऊदी अरब के साथ एकजुटता जताई और रियाद द्वारा अपनी सुरक्षा, संप्रभुता, नागरिकों और पवित्र स्थलों की रक्षा के लिए उठाए गए कदमों का समर्थन किया।
मक्का से जाजान तक सऊदी अरब के अंदर दबाव
सऊदी अरब में कई हमलों और चेतावनियों के बाद यह ताजा अलर्ट जारी किया गया है। सऊदी सिविल डिफेंस के अनुसार, 12 सितंबर को यमन के हूथी विद्रोहियों द्वारा दागा गया एक प्रोजेक्टाइल जाजान इलाके में गिरा, जिससे दो लोग घायल हो गए और एक मस्जिद, कई इमारतों और गाड़ियों को नुकसान पहुंचा।
एक दिन बाद यमन में वैधता बहाल करने वाले गठबंधन ने कहा कि हूती सेना ने बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन का इस्तेमाल करके खमीस मुशैत, आभा और ताइफ में आम नागरिकों वाले इलाकों पर हमला किया। गठबंधन के प्रवक्ता मेजर जनरल तुर्की अल-मलिकी ने बताया कि 13 आम नागरिकों को मामूली से लेकर मध्यम स्तर की चोटें आईं, जबकि सात घरों और दो गाड़ियों को नुकसान पहुंचा।
इसके बाद सऊदी अरब ने चेतावनी दी कि वह आगे होने वाले हमलों का जवाब देगा। सऊदी अधिकारियों ने मंगलवार को जेद्दा और ताइफ के लिए भी अलर्ट जारी किया और लोगों को घर के अंदर रहने तथा खतरा बने रहने तक खिड़कियों और दरवाजों से दूर रहने का निर्देश दिया।
तेल पाइपलाइन दबाव का एक बड़ा केंद्र
खतरा सिर्फ़ शहरों को निशाना बनाने वाली मिसाइलों और ड्रोनों तक ही सीमित नहीं है। 11 सितंबर को सऊदी अरब ने अपनी 1,200 किलोमीटर लंबी ईस्ट-वेस्ट तेल पाइपलाइन को बंद कर दिया, क्योंकि इराक से किए गए ड्रोन हमले में इसे निशाना बनाया गया था।
सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार, किसी भी समूह ने हमले की जिम्मेदारी नहीं ली लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने इसके लिए तेहरान को जिम्मेदार ठहराया, क्योंकि ईरान के सहयोगी गुट इराक में सक्रिय हैं। यह पाइपलाइन इसलिए भी बहुत अहम हो गई है क्योंकि ईरान के साथ तनाव के कारण होर्मुज स्ट्रेट असल में बंद हो गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी अरब रोजाना लगभग 50 लाख (5 मिलियन) बैरल तेल की ढुलाई के लिए ईस्ट-वेस्ट रूट पर ज्यादा निर्भर हो गया है। वरना यह तेल फारस की खाड़ी के रास्ते निर्यात किया जाता। इसलिए, इस हमले ने रियाद में सऊदी अरब के अहम बुनियादी ढांचे के खिलाफ बड़े पैमाने पर हमले की आशंका को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
सीएनएन ने बताया कि सऊदी अरब को पिछले महीने ही ईरान समर्थित हूतियों के साथ मिलकर काम करने वाले इराकी मिलिशिया समूहों द्वारा कई समन्वित हमलों की संभावना के बारे में चेतावनी दी गई थी। पाइपलाइन पर हुए हमले के लिए हूतियों को जिम्मेदार नहीं ठहराया गया लेकिन इससे सऊदी अरब पर ईरान के सहयोगी समूहों का दबाव और बढ़ गया, जो कई मोर्चों पर सक्रिय हैं।
लाल सागर... रणनीतिक चोकपॉइंट की ओर बढ़ रहे हूती
साथ ही, हूती पश्चिमी यमन में अपने इलाके का दायरा बढ़ा रहे हैं। इस ग्रुप ने रेड सी के मुहाने पर मौजूद अहम पेरिम आइलैंड और मोचा बंदरगाह शहर पर कब्जा कर लिया। ऐसा बाब अल-मंदेब स्ट्रेट पर ज्यादा कंट्रोल पाने के लिए किया गया। ये दुनिया भर में शिपिंग और एनर्जी के लिए एक अहम रास्ता है।
हूती मीडिया ने यह भी बताया कि ग्रुप ने सऊदी-समर्थित फोर्स के उन लड़ाकों को पकड़ लिया है जो रेड सी के हनिश आइलैंड पर तैनात थे। हनिश आइलैंड बाब अल-मंदेब से लगभग 160 किलोमीटर उत्तर में हैं और उस रास्ते के पास हैं जो इस स्ट्रेट को रेड सी और स्वेज नहर से जोड़ता है। इन कदमों से हूती विद्रोहियों को एक बड़े समुद्री रास्ते पर ज्यादा रणनीतिक बढ़त मिली है और साथ ही सऊदी अरब के रेड सी से जुड़े हितों पर और दबाव बढ़ा है।
रियाद के पास क्या है विकल्प?
हालांकि सऊदी अरब के पास किसी प्रॉक्सी ग्रुप की तुलना में आधुनिक सेना और ज्यादा संसाधन हैं लेकिन हूती एक ऐसे खतरे के तौर पर उभरे हैं जिन्हें गंभीरता से लेने की जरूरत है। सीएनएन के हवाले से जानकारों का कहना है कि रियाद कोई पूर्ण युद्ध नहीं चाहता लेकिन हालात उसे ऐसे युद्ध की ओर धकेल सकते हैं।
यमन मामलों के जानकार और वॉशिंगटन में रिस्क एडवाइजर मोहम्मद अल-बाशा ने सीएनएन को बताया कि संकेत बड़े पैमाने पर सऊदी जवाबी कार्रवाई की ओर इशारा कर रहे हैं और उनके पास कोई और विकल्प नहीं है।
यूरोपियन काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशंस की विजिटिंग फेलो सिन्जिया बियान्को ने सीएनएन को बताया कि सऊदी अरब की ओर से कोई बड़ी कार्रवाई यमन के पिछले युद्ध की तरह ही एक लंबे और अनिश्चित संघर्ष में बदल सकती है। इससे सऊदी अरब अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे व्यापक संघर्ष में और भी गहराई से उलझ सकता है।
ऐसे में सऊदी अरब बाहरी समर्थन की तलाश में है, जबकि वॉशिंगटन किसी और लड़ाई में सीधे तौर पर शामिल होने से हिचकिचा रहा है। सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक, हूती के खिलाफ सैन्य रूप से सीधे शामिल होने के सऊदी दबाव को अमेरिका ने ठुकरा दिया है।
हालांकि, कई सूत्रों के अनुसार, वॉशिंगटन ने सऊदी अरब के सैन्य अभियान के लिए खुफिया जानकारी देने के मकसद से करीब 100 सैन्य सलाहकार वहां भेजे हैं। अमेरिका के शामिल होने के मामले में कई तरह के दबाव भी हैं, जिनमें होर्मुज स्ट्रेट को लेकर चल रहा संकट और वॉशिंगटन में घरेलू राजनीतिक हालात शामिल हैं।
राजनीतिक समाधान की गुंजाइश कम होती जा रही है। विश्लेषकों के मुताबिक, सऊदी अरब ने अब तक रणनीतिक संयम दिखाया है। उसने हूती विद्रोहियों और ईरान को बार-बार चेतावनी दी है और उनकी निंदा की है, लेकिन कोई बड़ा जवाबी हमला नहीं किया है।
ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन पर हमले के बाद सऊदी विदेश मंत्रालय ने कहा कि किंगडम ने उस समय कोई प्रतिक्रिया न देने का फैसला किया था और वह इराकी सरकार की कोशिशों का समर्थन करेगा, साथ ही अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए जरूरी कदम उठाने का अधिकार भी अपने पास सुरक्षित रखेगा।
सऊदी अरब ने राजनीतिक समाधानों के सभी रास्ते आजमा लिए हैं। इसका एक विकल्प हूती विद्रोहियों के साथ बातचीत करना हो सकता है लेकिन इसकी भारी राजनीतिक और रणनीतिक कीमत चुकानी पड़ सकती है।
सऊदी भू-राजनीतिक विश्लेषक सलमान अल-अंसारी ने सीएनएन को बताया कि हूती विद्रोहियों के खिलाफ सऊदी-समर्थित यमनी सरकार का सैन्य अभियान पहले से ही चल रहा है और आने वाले दिनों या कुछ घंटों में यह काफी तेज हो सकता है। उन्होंने कहा कि कई मोर्चों पर बड़े आश्चर्यजनक घटनाक्रम हो सकते हैं।
