नई दिल्‍ली [जागरण स्‍पेशल]। किसी भी मरीज के कोमा में जाने का अर्थ बेहद खतरनाक होता है। उसके जीवन को लेकर अनिश्चितता का दौर बना ही रहता है। कई बार तो कोमा में गए मरीज के होश में आने को लेकर डॉक्‍टर भी कुछ सटीक नहीं बता पाते हैं। कई बार ऐसी खबरें भी सामने आई हैं जिसमें मरीज कुछ माह या एक या दो साल बाद कोमा से बाहर आ गया। लेकिन कोमा में गया कोई मरीब 27 साल बाद इससे बाहर आया हो, यह सुनते ही चौकना लाजमी हो जाता है। लेकिन ऐसा हुआ है।

जर्मनी में इस तरह का मामला सामने आया है जहां संयुक्त अरब अमीरात की एक महिला जिसका नाम मुनीरा अब्दुल्ला बताया गया है, 27 साल बाद कोमा से बाहर आई और ठीक होकर अपने घर भी जा चुकी है। आपको बता दें कि मुनीरा फिलहाल डिस्‍चार्ज होकर अपने घर जा चुकी हैं। डॉक्‍टर के मुताबिक वह मई 2018 में वेजिटेटिव स्टेट से बाहर आई थीं। यह दुनिया का ऐसा पहला मामला है। यह महिला 27 वर्षों तक 'वेजिटेटिव स्टेट' में थी। इस स्‍टेज में मरीज को न के ही बराबर चेतना रहती है। इस मामले के सामने आने के बाद इस तरह के मरीजों को लेकर एक नई उम्‍मीद जगी है। क्लीनिक की प्रवक्ता एस्ट्रिड राइनिंग ने कहा यह सुनने में किसी चमत्कार जैसा लगता है। लेकिन असल में बेहतरीन मेडिकल केयर का नतीजा है।

मुनीरा 1991 में हुए एक कार हादसे के बाद दक्षिण जर्मनी के दक्षिणी जर्मनी के बाड एबलिंग के श्योन क्लीनिक में लाई गईं थीं। वह एक व्हीलचेयर पर टूटीफूटी हालत में लाई गईं थीं। मुनीरा को फिजिकल थेरेपी, दवाएं, ऑपरेशन और सेंसरी स्टिमुलेशन दिया गया। डॉक्‍टर के मुताबिक इसके अलावा मरीज को बाहर घुमाया जाता था ताकि वह चिड़ियों की आवाज सुन सकें। हादसे के समय वह 32 साल की थीं, लेकिन अब वह 60 की हो चुकी हैं। यह हादसा तब हुआ जब वह अपने चार साल के बेटे ओमर को स्कूल से लाने गई थीं।

ओमर भी अब बड़े हो चुके हैं। उनके मुताबिक पूरा परिवार मुनीरा की हालत स्थिर होने की बरसों से इंतजार कर रहा था। अब जबकि मुनीरा घर पर हैं और लंबे समय तक कोमा में रहने के बाद बाहर आई हैं, तो परिवार के पास इस खुशी को पूरी दुनिया से बांटने का भी मौका मिल गया है। मुनीरा की सुधरी हालत ने पूरे परिवार को फिर एक नई ताकत दे दी है। उनकी इस हालत पर परिवार के अलावा डॉक्‍टर भी काफी खुश हैं। ओमर की बात करें तो मां के मुंह से इतने लंबे समय बाद उनका नाम सुनना उनके लिए बेहद भावुक पल था।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मुनीरा के डॉक्टर फ्रीडेमन मुलर जो एक तंत्रिका विशेषज्ञ हैं, ने बताया है कि कोमा के मरीज चेतनाविहीन हो जाते हैं। वह ऐसे होते हैं मानों कोई गहरी नींद में सो रहा है और आप उसको उठाने का प्रयास करें तो वह कोई रेस्‍पांस न करे। उसको आवाज लगाने या हिलाने का भी मरीज पर कोई असर नहीं होता है। डॉक्‍टर मुलर खुद मानते हैं कि 27 वर्षों के बाद में कोमा में गया मरीज उठ नहीं सकता। लेकिन यहां पर मामला काफी कुछ उलट था। मुनीरा की शारीरिक और मानसिक दशा पिछले कुछ हफ्तों में काफी बेहतर हो गई थी और वह प्रतिक्रिया दे पा रही थी।

 

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