खतरे में दुनिया का सबसे निचला बिंदु, हर साल 4 फीट घट रहा मृत सागर का जलस्तर
मृत सागर, पृथ्वी का सबसे निचला बिंदु, प्रतिवर्ष 4 फीट घटते जलस्तर और एक-तिहाई कम हुए सतही दायरे के साथ गंभीर संकट का सामना कर रहा है।

पृथ्वी के सबसे निचले बिंदु पर गहराता संकट (फाइल फोटो- रॉयटर्स)

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डिजिटल डेस्क,यरुशलम। इजरायल, जॉर्डन और फलिस्तीनी क्षेत्र की सीमाओं पर स्थित मृत सागर (डेड सी) तकनीकी रूप से चारों ओर से जमीन से घिरी एक झील है। इस झील का मुख्य जल स्रोत जॉर्डन नदी और उसकी सहायक नदी यारमौक है।
समुद्र तल से लगभग 1,400 फीट नीचे स्थित यह पृथ्वी का सबसे निचला बिंदु है। लेकिन अब मृत सागर अपने अस्तित्व की सबसे गंभीर चुनौती से जूझ रहा है। इसका जलस्तर प्रतिवर्ष 4 फीट घट रहा है, इसकी वजह से इसका सतही दायरा एक-तिहाई तक घट चुका है।
महासागर के पानी से 10 गुना अधिक खारा
जलस्तर घटने के साथ ही पानी अपने पीछे नमक से ढकी तटरेखाओं और गड्ढों का एक नया परिदृश्य छोड़ जाता है। इसका पानी महासागर से लगभग 10 गुना अधिक खारा है, इतना घना कि कोई व्यक्ति बिना किसी प्रयास के आराम से लेटकर तैर सकता है। कई पर्यटकों के लिए, यही इसका मुख्य आकर्षण है, किन उस पर खड़े होना दिन-प्रतिदिन खतरनाक होता जा रहा है।
प्राकृतिक जल स्रोतों के मार्ग में मानवीय रुकावट, औद्योगिक खनिज दोहन और जलवायु परिवर्तन के मिले-जुले असर से अब यह ऐतिहासिक धरोहर खतरनाक गड्ढों (सिंकहोल्स) और सूखे मैदानों में तब्दील हो रही है। इसके प्राकृतिक प्रवाह में 90 प्रतिशत से अधिक की भारी गिरावट आ चुकी है।
औद्योगिक दोहन और दो हिस्सों में बंटता सागर
पानी की कमी के साथ-साथ खनिज निष्कर्षण ने इस संकट को और गहरा किया है। 1970 के दशक में मृत सागर दो घाटियों में बंट गया। उत्तरी घाटी प्राकृतिक अवशेष के रूप में बची है, जबकि दक्षिणी घाटी औद्योगिक वाष्पीकरण कुंडों का रूप ले चुकी है।
वहीं, इजरायल और जॉर्डन की रासायनिक कंपनियां उत्तरी बेसिन से पानी पंप कर दक्षिणी कुंडों में भरती हैं, जहां धूप से पानी वाष्पित कर पोटाश व मैग्नीशियम जैसे उर्वरक खनिज निकाले जाते हैं। नतीजतन, सागर में आने वाला पानी नगण्य है और जाने वाला पानी लगातार बढ़ रहा है।
धंसती जमीन और 6000 से अधिक सिंकहोल
जैसे-जैसे पानी घट रहा है, पानी में नमक की सघनता इतनी बढ़ गई है कि नमक नीचे बैठकर ठोस क्रिस्टल और प्राकृतिक आकृतियां बना रहा है। सबसे बड़ा खतरा जमीन धंसने से पैदा हुआ है। पानी सूखने से तटवर्ती इलाकों में 6,000 से अधिक सिंकहोल (भू-धंसाव के गड्ढे) बन चुके हैं।
ऐन गेदी जैसे लोकप्रिय बीच रिसॉर्ट अब स्थायी रूप से बंद हो चुके हैं। हालात यह हैं कि प्राकृतिक तटों पर खतरा बढ़ने के कारण इज़राइल की ओर आने वाले पर्यटक अब औद्योगिक कंपनियों द्वारा बनाए गए कृत्रिम वाष्पीकरण तालाबों में स्नान करने को मजबूर हैं।
