मिडिल ईस्ट में चीन की दोहरी नीति संकट में, ट्रंप के कड़े रुख ने बढ़ाईं शी जिनपिंग की मुश्किलें
चीन की मध्य पूर्व में संतुलन साधने की वर्षों पुरानी रणनीति अमेरिकी दबाव के कारण विफल हो रही है। बीजिंग ...और पढ़ें

HighLights
चीन की मध्य पूर्व रणनीति अमेरिकी दबाव से विफल।
बीजिंग सस्ता ईरानी तेल और खाड़ी निवेश चाहता था।
अमेरिकी कार्रवाई ने चीन की कमजोरियां उजागर कीं।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। वर्षों से मध्य पूर्व में संतुलन साधने की कोशिश कर रहे चीन के लिए अब राह मुश्किल होती दिख रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि बीजिंग की वह रणनीति, जिसमें वह बिना किसी सैन्य जिम्मेदारी के आर्थिक और रणनीतिक लाभ उठाना चाहता था, अब अमेरिकी दबाव के चलते दम तोड़ रही है।
चीन अयातुल्ला शासन के साथ उलझने का बोझ उठाए बिना सस्ता ईरानी तेल चाहता था। वह तेहरान के साथ संबंध बनाए रखते हुए खाड़ी देशों का निवेश, वहां के बाजार और उनकी सद्भावना भी चाहता था। वह चाहता था कि अमेरिका क्षेत्रीय संकटों में फंसा रहे, लेकिन ऐसी अराजकता न हो जिससे ऊर्जा की कीमतें आसमान छूने लगें।
शी जिनपिंग चीन की छवि एक उभरती हुई और महाशक्ति के रूप में बनाना चाहते थे, जो नियमों का पालन करती है जबकि अमेरिका अपनी मनमानी करता रहता है। अब अमेरिका द्वारा ईरान के खिलाफ छेड़ा गया युद्ध उस रणनीति की कमजोरी को उजागर कर रहा है।
शी जिनपिंग के लिए यह संघर्ष निकट भविष्य में बुरा है, चीन की सीमाओं के बारे में जो कुछ उजागर करता है वह बदसूरत है और केवल तभी संभावित रूप से अच्छा है जब अमेरिका एक और लंबे क्षेत्रीय युद्ध में फंस जाए।
