नई दुनिया। पूरी दुनिया में शरणार्थियों के हालात बद से बदत्‍तर होते जा रहे हैं। एक अनुमान के मुताबिक दुनिया में 7 करोड़ लोग ऐसे हैं जो देश छोड़कर दूसरे देशों में रहने पर मजबूर हैं। इनमें से ज्‍यादातर शरणार्थी उन देशों से हैं जहां पर आतंकवाद या फिर गृहयुद्ध की वजह से हालात खराब हो चुके हैं। आपको जानकर हैरत हो सकती है कि दुनियाभर में फैले शरणार्थियों में आधे से ज्‍यादा सीरिया, अफगानिस्‍तान, दक्षिण सूडान, म्यांमार और सोमालिया से आते हैं। संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के मुताबिक 2018 में पलायन करने वालों की संख्या 1।3 करोड़ थी। 2017 की तुलना में यह आंकड़ा करीब 27 लाख ज्यादा था। 

आपको यहां पर ये भी बता दें कि तुर्की दुनिया में सबसे ज्यादा शरणार्थियों को स्वीकारने वाला देश है। सीरियाई सीमा से लगा तुर्की यहां से भागने वालों का पहला पड़ाव होता है। इसके अलावा भूमध्‍य सागर से भी जो लोग गैरकानूनीतौर पर दूसरे देश की सीमा में घुसते है उनका भी सबसे नजदीकी पड़ाव तुर्की ही होता है। एक अनुमान के मुताबिक तुर्की में इस वक्त 37 लाख शरणार्थी मौजूद हैं। बीते दिनों सीरिया और तुर्की के बीच हुए हमलों के दौरान तुर्की ने यूरोप की तरफ शरणार्थियों के दरवाजे खोल दिए थे। तुर्की ने अपील भी की थी कि यूरोप इन शरणार्थियों को अपने यहां पर जगह दे। ऐसी ही अपील अब जर्मनी ने भी की है।

यहां पर ध्‍यान देने वाली बात एक ये भी है कि एक बार अपना देश छोड़ने वालों में ज्‍यादातर लोग वापस आने की हिम्‍मत नहीं जुटा पाते हैं। यूएन के आंकड़े इस बारे में बेहद स्‍पष्‍ट संकेत देते हैं। इसके मुताबिक वर्ष 2017 में 6,67,400 लोग अपने देश लौटे थे वहीं वर्ष 2018 में इनका आंकड़ा 5,93,800 था। गृहयुद्ध की मार झेल रहे सीरिया की बात करें तो वहां पर 2,10,000 लोगों ने वापस जाने की हिम्मत दिखाई है। 

शरणार्थियों को लेकर सामने आई रिपोर्ट के मुताबिक इनमें 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चे अधिक हैं। यूएन की रिपोर्ट के मुताबिक शरणार्थियों में 27,600 वो बच्‍चे हैं जो अपने परिवार से बिछड़कर दूसरे देशों में शरण लिए हुए हैं। इसी वजह से इन बच्‍चों पर मानव तस्‍करी में उतरे गिरोह की निगाह भी लगी होती है। जर्मनी खुद इस तरह के मामलों में बदनाम है। यहां पर यौन शोषण के लिए इस तरह के कई मामले होते हैं। इतना ही हीं इस तरह का ऑर्गेनाइज क्राइम करने के मामले में जर्मनी पूर्वी यूरोप के देशों में सबसे आगे है। रूस के विघटन के दौरान 1997 में यहां करीब 175,000 महिलाओं को देह व्‍यापार के धंधे में धकेलने के लिए बेचा गया था। यूएन की रिपोर्ट के मुताबिक हर वर्ष करीब 40 लाख लोगों को उनकी इच्‍छा के विरुद्ध दूसरे धंधों के लिए बेचा जाता है। इनमें अधिकतर कम उम्र की महिलाएं होती हैं। 

इसी खौफनाक सच्‍चाई के मद्देनजर जर्मनी ने अब अपनी नीतियों में बदलाव करते हुए ऐसे 1,500 बच्‍चों को शरण देने की घोषणा की है जो अपने परिवार से बिछड़कर आए हैं। इनको लेकर यूरोपीय संघ में वार्ता का दौर भी चल रहा है। जर्मनी ने अन्‍य यूरोपीय देशों से ऐसे बच्‍चों को शरण देने की अपील भी की है। जर्मनी के मुताबिक इन बच्‍चों में से कुछ को तुरंत मेडिकल सुविधा देने की जरूरत है। 

आपको बता दें कि ग्रीस के द्वीपों पर हजारों की संख्‍या में वो शरणार्थी  मौजूद हैं जो सीरिया समेत दूसरे देशों से नौकाओं में भरकर आए हैं। पिछले दिनों ग्रीस की सीमा पर इनकी सुरक्षाकर्मियो से झड़प भी हुई थी। यूरोप में दाखिल होने वाले शरणार्थियों पर ग्रीस के जवानों ने आंसू गैस से लेकर पानी की तेज धार तक छोड़ी गई। गौरतलब है कि वर्ष 2016 में दोनों पक्षों के बीच आप्रवासियों को लेकर एक समझौता हुआ था। इसके मुताबिक ईयू ने तुर्की को इन शरणार्थियों की मदद के एवज में 6 अरब यूरो की राशि देने का वादा किया था। लेकिन वादा पूरा न करने की वजह से तुर्की ने इस समझौते को तोड़ते हुए अपने दरवाजे यूरोपीय संघ की तरफ खोल दिए हैं।  

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Posted By: Kamal Verma

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