5 साल का इंतजार, कई मिलियन डॉलर का खर्च... मंगल के चांद से मिट्टी क्यों लाना चाहता है जापान?
जापान की अंतरिक्ष एजेंसी JAXA ने मंगल के चंद्रमाओं से मिट्टी और पत्थरों के नमूने लाने के लिए अपना MMX ...और पढ़ें

HighLights
JAXA ने मंगल के चंद्रमाओं के लिए MMX मिशन लॉन्च किया।
मिशन 2031 तक मंगल के चांद से नमूने लाएगा पृथ्वी पर।
नमूनों से मंगल पर पानी और जीवन के संकेत मिलेंगे।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। जापान की अंतरिक्ष एजेंसी जेएएक्सए (JAXA)ने अपने खास कार्यक्रम अंतरिक्ष मिशन को लॉन्च कर दिया है। इस मिशन के तहत वो मंगल के चांद की सतह की मिट्टी और पत्थरों के सैंपल का परीक्षण करेगा और लेकर भी आएगा।
जापान ने जिस अंतरिक्ष मिशन को लॉन्च किया है उसका नाम मार्टियन मून्स एक्सप्लोरेशन (MMX) है, जो मंगल के चांद के नमूने धरती पर लाकर कई अहम राज खोलेगा। अभी तक कोई अंतरिक्ष यान मंगल से नमूने लेकर धरती पर वापस नहीं लौटा है।
कब जाएगा और कब आएगा
अंतरिक्ष यान एच-3 (H3) रॉकेट इस मिशन के लिए रवाना किया गया है। इस मिशन की शुरुआत बुधवार को हुई है। हालांकि ये 2027 में मंगल पर पहुंचेगा। यहां पर वो चांद की नजदीकी से जांच करेगा और नमूनों का संग्रह करेगा। इस यान को धरती पर वापस आने का लक्ष्य 2031 रखा गया है।
मंगल के दो चांद
मंगल के दो चांद है जिनका नाम फोबोस और डाइमोस है। वैज्ञानिक ये समझने की कोशिश करेंगे कि ये चांद आखिर बने कैसे? कुछ लोगों का मानना है कि ये छोटे ग्रह होंगे जो गुरुत्वाकर्षण बल के कारण मंगल के करीब आ गए और आसपास घूमने लगे। वहीं कुछ लोगों का मानना है कि किसी खगोलीय पिंड से टक्कर के बाद इन चांदों की उत्पत्ति हुई हो।
ये चांद मंगल की सतह से करीब छह हजार किलोमीटर है। यहां पर पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण 1/1700 के बराबर है।
10 ग्राम मिट्टी लाने में पांच साल क्यों लगेंगे
आप सोच रहे होंगे कि मंगल तक जाने में इसे एक साल लगेगा तो फिर नमूने लाने में इसे पांच साल का इंतजार क्यों करना? आपको बता दें कि इसे मंगल तक पहुंचने में एक साल लगेंगे लेकिन फिर यान अगले साल यानी 2027 से 2030 तक फोबोस का नक्शा बनाएगा।
नक्शा बनाने की मुख्य वजह ये होगी कि ये अपने उतरने के लिए कोई मुफीद जगह की तलाश करेगा ताकि उतरते वक्त कोई किसी चट्टान या किसी अन्य वस्तु से टक्कर ना हो जाए। इसके बाद 2031 में ये वापस धरती पर वापस लौटेगा।
मंगल पर पानी का पता चलेगा
करीब चार अरब साल पहले मंगल पर पानी के संकेत मिलते हैं। यहां पर झीलों की मौजूदगी का पता चलता है। फोबोस के नमूनों में मंगल से आए कण मिले तो पानी से जुड़े खनिज, कार्बनिक पदार्थ व जैविक संकेत खोजे जा सकते हैं।
इस मिशन की एक खासियत ये भी होगी कि आने वाले समय में मंगल पर आने जाने वाले अंतरिक्ष यात्रियों के लिए किसी प्रकार का खतरा है या पूरी तरह से सेफ है ये समझने में मदद मिलेगी। विकिरण जैसे खतरों से भी अलर्ट किया जा सकता है।
