ताइपे, एजेंसियां। जापान के प्रधानमंत्री योशिहिदे सुगा और अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन के बीच 16 अप्रैल को होने वाली वार्ता में ताइवान और चीन में मानवाधिकार हनन मुख्य मुद्दा होंगे। दोनों ही देशों का मानना है कि ताइवान में स्थिरता लाया जाना बहुत जरूरी है। ताइवान को लेकर चीन की बढ़ती गतिविधियों ने दोनों ही देशों को स्थाई समाधान ढ़ूढ़ने के लिए मजबूर कर दिया है।

बीजिंग ताइवान पर पूरी तरह से अपना अधिकार जताना चाहता है। उसका दावा है कि यह उसका अपना क्षेत्र है। यहां किसी दूसरे देश का हस्तक्षेप उसकी संप्रभुता को चुनौती देना है। इधर लगातार चीन की ताइवान के प्रति सैन्य आक्रामकता ने ताइवान की सुरक्षा को लेकर वैश्विक चिंता को उजागर कर दिया है।

पर्यवेक्षकों का मानना है कि अमेरिका और जापान के साथ ही यूरोप के देश भी इस बात को लेकर चिंतित हैं कि चीन द्वारा सैन्य शक्ति के निरंतर बढ़ाने से वह क्षेत्रीय स्तर पर खतरा बनता जा रहा है। यही कारण है कि ताइवान पर जापान और अमेरिकी प्रमुखों की मुलाकात में यह सबसे बड़ा मुद्दा होगा।

चीन के युद्धक विमान फिर ताइवान की सीमा में घुसेचीन के युद्धक विमान एक बार फिर ताइवान की सीमा के अंदर घुस गए। ये विमान दक्षिण चीन सागर में ताइवान की सीमा में घुसने के साथ ही डांगशा द्वीप में भी घुस आए। ताइवान के रक्षा मंत्रालय के अनुसार सीमा उल्लंघन के बाद सेना ने अलर्ट जारी कर दिया और रेडियो पर चेतावनी भी जारी की गई।

ताइवान में ट्रेन दुर्घटना, 51 मरे

ताइवान में एक ट्रेन दुर्घटना में 51 लोगों की मौत हो गई और 188 घायल हो गए। एक टनल में ट्रक टकराने के बाद ट्रेन के पलटने से यह हादसा हुआ। ट्रेन में पांच सौ लोग सवार थे और अधिकांश यात्री लंबी छुट्टियों में घूमने के लिए जा रहे थे। दुर्घटना हुलिएन काउंटी में के दकिंगसुई टनल में हुई। ताइवान में पिछले चार दशक में यह सबसे भयंकर ट्रेन हादसा है। यह ताइवान की बीते 70 वर्षो की सबसे बड़ी ट्रेन दुर्घटना थी।

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