टोक्यो, एपी। जापान में सुनामी से तबाह फुकुशिमा परमाणु संयंत्र से खतरनाक रेडियोएक्टिव कचरे को हटाने का कार्य 2021 में शुरू किया जाएगा। संयंत्र की संचालक टोक्यो इलेक्टि्रक पावर कंपनी (टेप्को) और जापान की सरकार द्वारा लाखों टन के इस कचरे को हटाने के काम में 30 से 40 वर्ष लग सकते हैं। जापान के उद्योग मंत्रालय द्वारा तैयार नए मसौदे से यह जानकारी सामने आई है। सरकार द्वारा संशोधित मसौदे को इस माह के अंत तक अपनाए जाने की संभावना है।

जापान में वर्ष 2011 में भूंकप के बाद आई सुनामी से फुकुशिमा स्थित तीन बड़े परमाणु रिएक्टरों वाला ऊर्जा संयंत्र तबाह हो गया था। तेज भूकंप और सुनामी के कारण इसमें इस्तेमाल होने वाला रेडियोएक्टिव ईंधन पिघल चुका है। इससे लगातार निकल रहे घातक विकिरणों के कारण कचरे का निस्तारण बहुत ही जोखिम भरा काम है। बड़ी मात्रा में ठोस कचरे के अलावा संयंत्र में 10 लाख टन से ज्यादा रेडियोएक्टिव वाटर भी जमा है। सुनामी में करीब 18 हजार लोगों की जान गई थी। फुकुशिमा संयंत्र में हुई दुर्घटना के कारण आसपास के करीब 1.6 लाख लोगों को अपना घर छोड़ना पड़ा था। 1986 में यूक्रेन के चेरनोबिल परमाणु संयंत्र में हुई दुर्घटना के बाद यह दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा परमाणु हादसा था।

फुकुशिमा हादसे के बाद इस संयंत्र का संचालन करने वाली टोक्यो इलेक्ट्रिक पावर ने संयंत्र के कूलिंग पाइपों में मौजूद दस लाख टन दूषित पानी टैंकों में इकट्ठा किया था। कंपनी का कहना है कि उसके पास इस पानी को रखने की जगह नहीं है।

एक कर्मचारी की विकिरण से हुई थी मौत 

करीब एक साल पहले जापान ने पहली बार माना है कि फुकुशिमा परमाणु ऊर्जा संयंत्र में काम करने वाले एक कर्मचारी की मौत रेडिएशन (विकिरण) से हुई थी।फुकुशिमा संयंत्र के चार कर्मी विकिरण से बीमार हुए थे। उनमें से एक की फेफड़े के कैंसर से मौत हो गई थी। 

 

Posted By: Arun Kumar Singh

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