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'ब्रिक्स का भविष्य उज्ज्वल', 7 साल बाद दिल्ली में शी चिनफिंग; चीन ने दिया निष्पक्षता और न्याय का संदेश

Published: Sat, 12 Sep 2026 03:15 PM (IST)

चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेने नई दिल्ली पहुंचे हैं, जहां वे प्रधानमंत्री मोदी से ...और पढ़ें

चीन ने दिया निष्पक्षता और न्याय का संदेश(फोटो: पीटीआई)

 चीन ने दिया निष्पक्षता और न्याय का संदेश(फोटो: पीटीआई)

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए नई दिल्ली पहुंच गए हैं। अपनी इस यात्रा के दौरान वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय बातचीत करेंगे और ग्लोबल साउथ यानी विकासशील देशों के बीच व्यापक सहयोग बढ़ाने के लिए बीजिंग के प्रस्तावों को प्रस्तुत करेंगे।

चीन के सरकारी समाचार पत्र ग्लोबल टाइम्स के अनुसार, वैश्विक अनिश्चितता के इस दौर में ब्रिक्स को महत्वपूर्ण मंच करार दिया है। अपने संपादकीय में चीनी मुखपत्र ने लिखा कि ब्रिक्स समूह की मुख्य ताकत खुलेपन, परस्पर सहयोग और निष्पक्षता के प्रति उसकी प्रतिबद्धता से आती है।

ग्लोबल टाइम्स के संपादकीय के अनुसार, इस मंच की सफलता की कुंजी खुलेपन और समावेशिता के प्रति प्रतिबद्धता, परस्पर लाभ (विन-विन) वाले सहयोग के लक्ष्य और निष्पक्षता व न्याय की खोज में निहित है।

दुनिया जितनी अधिक अशांत और परिवर्तनकारी होती जाएगी, ब्रिक्स सहयोग का अनूठा मूल्य उतना ही निखरकर सामने आएगा। जैसे-जैसे ब्रिक्स सहयोग गुणवत्ता और दक्षता में सुधार के चरण में प्रवेश कर रहा है, यह विश्वास और दृढ़ हो रहा है कि इसके पास अपार संभावनाएं हैं और ब्रिक्स देशों का भविष्य उज्ज्वल है।

चीन की प्राथमिकताओं की रूपरेखा पेश करेंगे शी

शिखर सम्मेलन के दौरान राष्ट्रपति शी चिनफिंग से अन्य वैश्विक नेताओं के साथ अंतरराष्ट्रीय स्थिति, ब्रिक्स के भविष्य के विकास और व्यावहारिक सहयोग को गहरा करने के उपायों पर विचारों का आदान-प्रदान करने की उम्मीद है।

समाचार पत्र के अनुसार शी समूह के भीतर सहयोग के विस्तार और सुधार के लिए चीन की नई पहलों को भी सामने रखेंगे। संपादकीय में लिखा गया कि 2013 से राष्ट्रपति शी ने ब्रिक्स प्लस सहयोग मॉडल सहित कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव और पहल पेश किए हैं। इन्होंने ब्रिक्स के त्वरित विकास को गति दी है और इस तंत्र के विकास के हर महत्वपूर्ण मोड़ पर अहम भूमिका निभाई है।

संपादकीय में न्यू डेवलपमेंट बैंक के लिए चीन के समर्थन, ब्रिक्स के ऐतिहासिक विस्तार और शांति, नवाचार, हरित विकास तथा पीपल-टू-पीपल एक्सचेंज जैसे क्षेत्रों में सहयोग पर विशेष बल दिया गया है।

2027 में ब्रिक्स की कमान संभालेगा चीन

चीन वर्ष 2027 में ब्रिक्स की रोटेटिंग अध्यक्षता संभालेगा। ग्लोबल टाइम्स के अनुसार, बीजिंग अपने कार्यकाल का उपयोग बहुपक्षवाद के माध्यम से एकजुटता को मजबूत करने और सदस्य देशों के बीच विकास रणनीतियों का तालमेल बिठाने के लिए करेगा।

चीन इस दौरान अपनी वैश्विक विकास पहल, वैश्विक सुरक्षा पहल, वैश्विक सभ्यता पहल और वैश्विक शासन पहल को बढ़ावा देगा। डिजिटल अर्थव्यवस्था, हरित विकास, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, गरीबी उन्मूलन और कृषि को ऐसे प्रमुख क्षेत्रों के रूप में चिह्नित किया गया है जहां चीन ठोस परिणाम हासिल करना चाहता है।

संपादकीय का निष्कर्ष निकालते हुए कहा गया कि एक ग्रेटर ब्रिक्स जो अधिक एकजुट, कुशल, व्यावहारिक और अपनी जिम्मेदारियों को उठाने के लिए प्रतिबद्ध है, वह निश्चित रूप से ग्लोबल साउथ के साझा विकास के लिए नए रास्ते खोलेगा और उथल-पुथल से भरी दुनिया में अधिक स्थिरता प्रदान करेगा।

भारत की मेजबानी में ग्लोबल साउथ पर केंद्रित एजेंडा

भारत 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी रेजिलियंस, इनोवेशन, कोऑपरेशन और सस्टेनेबिलिटी थीम के तहत कर रहा है। सम्मेलन का मुख्य एजेंडा विकास, स्थिरता, नवाचार और ग्लोबल साउथ के लिए इस मंच को एक मजबूत व रचनात्मक माध्यम के रूप में स्थापित करने पर केंद्रित है।

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