मास्को, एजेंसी। अमेरिका समेत पश्चिमी मुल्‍कों की लामबंदी के जवाब में रूस और चीन की जुगलबंदी दिनोंदिन मजबूत होती जा रही है। अब दोनों देशों ने अपने मुल्‍कों की संवैधानिक व्यवस्था को कमजोर करने की कोशिशों की काट के लिए सूचना के आदान प्रदान को और मजबूती देने पर सहमत हुए हैं। समाचार एजेंसी एपी की रिपोर्ट के मुताबिक रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की अध्यक्षता वाली राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव निकोलाई पेत्रुशेव ने सोमवार को चीन का दौरा किया। इस दौरे पर उन्‍होंने कहा कि रूस, चीन के साथ संबंधों को मजबूत करने को अपनी नीति का हिस्‍सा मानता है।

व्यापक साझेदारी और रणनीतिक सहयोग पर मुहर 

पुतिन के सबसे करीबी सहयोगियों में शुमार निकोलाई पेत्रुशेव (Nikolai Patrushev) ने चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के एक शीर्ष अधिकारी गुओ शेंगकुन के साथ एक बैठक की। इसके साथ ही उन्‍होंने (Nikolai Patrushev) ने चीन के साथ व्यापक साझेदारी और रणनीतिक सहयोग को मजबूत करने के लक्ष्‍य को रूस की विदेश नीति की प्राथमिकता करार दिया। उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक माहौल में देशों को आपसी समर्थन और सहयोग के विकास के लिए अधिक तत्परता दिखानी चाहिए।

सूचनाओं को साझा करेंगे दोनों मुल्‍क 

निकोलाई पेत्रुशेव (Nikolai Patrushev) और चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के शीर्ष अधिकारी गुओ शेंगकुन के साथ यह बैठक नानपिंग शहर में हुई। इस बैठक के बाद पेत्रुशेव के कार्यालय की ओर से आधिकारिक बयान जारी किया गया। इस बयान में कहा गया कि दोनों देश एकजुटता के साथ अतिवाद का मुकाबला करने को प्रतिबद्ध हैं। साथ ही अपनी संवैधानिक व्यवस्था को कमजोर करने के बाहरी प्रयासों की काट के लिए सूचना के आदान-प्रदान को और मजबूत करने पर सहमत हुए हैं।  

साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में भी बढ़ाएंगे सहयोग

समाचार एजेंसी एपी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि दोनों मुल्‍कों के अधिकारियों ने इस बैठक में साइबर सुरक्षा पर सहयोग बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया। गौरतलब है कि दोनों मुल्‍कों के बीच ये समझौते ऐसे वक्‍त में हुए हैं जब अमेरिका लगातार ताइवान की मदद कर रहा है जिससे चीन चिढ़ा हुआ है। चीन का कहना है कि वह किसी भी सूरत में ताइवान का विलय करेगा। चीन ने अमेरिका को सीधी चेतावनी देते हुए कहा कि विलय की राह में बाधा पैदा करने की कोशिशों को वह बर्दाश्‍त नहीं करेगा।

यह भी पढ़ें- ताइवान पर बाइडन के बयान से भड़का चीन, कहा- बांटने की किसी भी कोशिश को नहीं करेंगे बर्दाश्त

यह भी पढ़ें- एससीओ डिक्‍लेरेशन को क्‍यों माना जा रहा अफगानिस्तान के लिए बड़ा झटका, विशेषज्ञों से जानें इसका जवाब

Edited By: Krishna Bihari Singh