लंदन, रायटर। हांगकांग में लोकतंत्र की मांग को दबाने की चीन की साजिश के विरोध में अमेरिका के बाद अब दुनिया के प्रमुख देश खड़े हो गए हैं। ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा ने संयुक्त बयान जारी कर चीन की हरकत पर चिंता जताई है और कानून संशोधन की प्रक्रिया तत्काल रोकने को कहा है। संयुक्त बयान में प्रस्तावित कानून को एक राष्ट्र दो व्यवस्था के सिद्धांत का उल्लंघन बताया है। इसी सिद्धांत पर समझौते के बाद 1997 में ब्रिटेन ने 150 साल के शासन उपरांत हांगकांग को चीन को सौंपा था।

चीन के कदम को धोखा बताया

हांगकांग के आखिरी गवर्नर रहे क्रिस पैटन ने चीन के ताजा कदम को हांगकांग के साथ धोखा बताया है। उन्होंने पश्चिमी देशों से मांग की है कि वे चीन की साजिश के खिलाफ खड़े हों और उसे रोकें। चीन में सरकार ने संसद में हांगकांग को राष्ट्रीय सुरक्षा नीति के दायरे में लाने के लिए कानून में संशोधन का प्रस्ताव पेश किया है।

चीन की साजिश

हांगकांग में यह कानून लागू होने के बाद वहां पर चीन के खिलाफ कुछ भी बोलना अपराध की श्रेणी में आ जाएगा और उसके लिए कड़े दंड का प्रावधान होगा। इसी प्रकार से हांगकांग में विदेशी गतिविधियां भी सीमित हो जाएंगी। जानकारों का मानना है कि इससे वहां की आर्थिक स्थिति भी प्रभावित होगी। हांगकांग को सशर्त हस्तांतरण के समय से ही कई तरह की स्वतंत्र गतिविधियों के अधिकार प्राप्त हैं, जो चीन की मुख्य भूमि के लोगों को नहीं हैं।

चीन को रोके ब्रिटेन

हांगकांग में लागू होने वाला कानून वहां की ऐसी सभी गतिविधियों को रोक देगा। ब्रिटेन में रह रहे पैटन (76) ने कहा कि ब्रिटेन की नैतिक, आर्थिक और न्यायिक जिम्मेदारी है कि वह हांगकांग के पक्ष में खड़ा हो और चीन को रोके। क्योंकि सन 1984 में हुए समझौते में तत्कालीन चीनी प्रधानमंत्री झाओ जियांग ने हांगकांग की स्वायत्तता बरकरार रखने की गारंटी दी थी।

अमेरिका पहले से है नाराज

पैटन ने 5जी मसले पर चीनी कंपनी हुवावे के साथ हुआ समझौता तोड़ने की ब्रिटेन को सलाह दी है। चीन के कदम पर अमेरिका सबसे पहले विरोध जता चुका है। विदेश मंत्री माइक पोंपियो ने इसे हांगकांग की स्वायत्तता की हत्या के लिए गाड़ी जाने वाली कील कहा है। जबकि राष्ट्रपति ट्रंप चीन के खिलाफ बहुत कड़े कदम की चेतावनी दे चुके हैं।

चीन की सफाई, नहीं होगा निवेशकों पर असर

चीन ने सफाई दी है कि राष्ट्रीय सुरक्षा कानून लागू होने से हांगकांग में विदेशी निवेशकों की स्थिति पर कोई असर नहीं पड़ेगा। विदेश मंत्रालय के हांगकांग कार्यालय की ओर से जारी बयान में चीन के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करने वाले देशों की निंदा भी की गई है।

Posted By: Krishna Bihari Singh

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