बीजिंग, रायटर। कोरोना महामारी के बीच चीन ने ताइवान पर हमले की धमकी दी है। चीन के एक वरिष्ठ जनरल ने कहा कि अगर ताइवान को स्वतंत्र बनने से रोकने का कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा तो उस पर हमला कर दिया जाएगा। इस पर ताइवान ने कहा कि युद्ध की धमकी देना अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन है। चीनी सेना के चीफ ऑफ ज्वाइंट स्टाफ डिपार्टमेंट और केंद्रीय सैन्य आयोग के सदस्य ली जुओचेंग ने शुक्रवार को कहा, 'अगर शांतिपूर्वक एकीकरण की संभावना खत्म हो जाती है तो किसी भी अलगाव की साजिश को विफल करने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जाएंगे।'

ली जुओचेंग ने राजधानी बीजिंग के ग्रेट हाल में एक कार्यक्रम में यह भी कहा, 'हम बल प्रयोग छोड़ने का वादा नहीं करते और ताइवान स्ट्रेट में स्थिरता के लिए सभी जरूरी उपायों के लिए विकल्प खुले रखेंगे।' इस बयान पर ताइवान के चीन मामलों की परिषद ने कहा, 'ताइवानी नागरिक तानाशाही और हिंसा को कभी नहीं चुनेंगे। समस्याओं के समाधान का तरीका बल प्रयोग और एकतरफा फैसले नहीं हैं।' बता दें कि चीन के लिए ताइवान का मसला बेहद संवेदनशील है। वह इस द्वीपीय क्षेत्र को अपना हिस्सा मानता है। चीन पहले भी कई बार कह चुका है कि अगर जरूरत पड़ी तो ताइवान को बलपूर्वक अपने नियंत्रण लाया जाएगा।

गौरतलब है कि चीन का यह कदम डोनाल्‍ड ट्रंप के उस फैसले के बाद सामने आया है जिसमें अमेरिकी सरकार ने कांग्रेस (संसद) को सूचित किया है कि वह ताइवान को 18 करोड़ डालर के उन्नत किस्म के टॉरपीडो की संभावित बिक्री कर सकती है। अमेरिकी रक्षा सुरक्षा सहयोग एजेंसी ने बीते दिनों बताया था कि अमेरिकी विदेश विभाग ने ताइवान को 18 एमके-48 मॉड 6 टॉरपीडो और संबंधित उपकरणों की बिक्री को मंजूरी दी है। इस सौदे की लागत करीब 18 करोड़ डालर बताई जा रही है। एजेंसी ने इस संभावित बिक्री को लेकर जरूरी प्रमाण पत्र हासिल करने के लिए कांग्रेस को यह जानकारी दी थी। 

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