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नई दिल्ली [जागरण स्पेशल]। दक्षिणपूर्व एशियाई देश चीन की बढ़ती सैन्य शक्ति और इलाके में बढ़ती आर्थिक प्रगति को देखकर खासे चिंतित है। चीन से डरे यही देश अब अमे‍रिकी नौसेना के साथ सैन्‍य अभ्‍यास की शुरुआत कर रहे हैं। लेकिन, इसने चीन को नाराज कर दिया है। इसकी एक वजह ये भी है कि यह सैन्‍य अभ्‍यास दक्षिण चीन सागर के विवादित इलाके में हो रहा है। सैन्‍य अभ्‍यास ने यहां पर तनाव को बढ़ा दिया है। आपको बता दें कि इस इलाके में चीन के कई सैन्‍य बेस हैं जहां से चीन की सेना ऑपरेट करती है। यहां पर ये बताना भी जरूरी होगा कि इसी तरह का अभ्‍यास पिछले साल चीन ने दक्षिण-पूर्वी एशियाई देशों के साथ किया था। ये युद्धाभ्यास चीन और 10-सदस्यीय एसोसिएशन ऑफ साउथईस्ट एशियन नेशंस द्वारा आयोजित किया गया था। हालांकि ये अभ्यास समुद्र के निर्विवाद क्षेत्र में किए गए थे।

ट्रंप का कड़ा रुख दिखाता है यह अभ्‍यास 
कुछ रणनीतिक विश्‍लेषक मानते हैं कि वर्तमान में हो रहा सैन्‍य अभ्‍यास दक्षिण चीन सागर पर राष्‍ट्रपति ट्रंंप की नीतियों को इंगित करता है जो लगातार इस पर कड़ा रुख दिखा रहे हैं। जानकारों की राय में चीन से बढ़ते व्‍यापार युद्ध और मौजूदा अभ्‍यास ने भी तनाव को बढ़ाने का काम किया है। वहीं यूएस नेवी ने इस ड्रिल के बारे में किसी भी तरह का बयान देने से मना कर दिया है। अमेरिकी नौसेना ने ऑपरेशनल सेंसिटिविटी का हवाला देते हुए ड्रिल से पहले इस बारे में कोई टिप्पणी करने से भी इनकार कर दिया। रविवार देर रात एक बयान में अमेरिकी नौसेना ने केवल यही कहा कि अभ्यास में आंशिक रूप से खोज और जब्ती पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। इसके अलावा इसमें समुद्री संपत्ति पर नजर रखना और समुद्री खतरों का मुकाबला करने का अभ्‍यास भी शामिल होगा।  

ये होंगे शामिल
इस अभ्‍यास में 8 युद्धपोत, 4 विमान और 1,000 से अधिक कर्मी, 1 लिट्टोरल लड़ाकू जहाज, एक गाइडेड मिसाइल-विध्वंसक पोत, 3 एमएच-60 हेलीकॉप्टर और 1 टोही विमान पी-8 पोसिडॉन विमान भी शामिल होंगे। पी-8 पोसिडॉन विमान इस लिहाज से भी खास है क्‍योंकि इसका उपयोग अमेरिका दक्षिण चीन सागर पर निगरानी उड़ानों का संचालन करने के लिए करता रहा है। 

क्‍यों खास है दक्षिण चीन सागर
आपको यहां पर ये भी बता दें कि दक्षिण चीन सागर से विश्‍व का सबसे अधिक समुद्री व्‍यापार होता है। इसके अलावा यह इलाका कई तरह के प्राकृतिक संसाधनों से भी भरा हुआ  है। चीन के इस इलाके पर कब्‍जे के बाद से ही यह विवादित इलाके की श्रेणी में आता है। यह ऐसा इलाका है जिस पर कई देश अपना-अपना दावा पेश करते हैं।  

इसलिए आक्रामक है चीन
इस इलाके में चीन के आक्रामक रुख का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि यहां से गुजरने वाले आस्‍ट्रेलियाई लड़ाकू विमानों पर कई बार लेजर हथियारों से हमला किए जाने की बात सामने आ चुकी है। इस तरह के हमलों से कई बार विमान के पायलट को विप‍रीत स्थितियों का सामना करना पड़ा है। चीन और अमेरिका कई बार इस इलाके में आमने सामने आ चुके हैं। 

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Posted By: Vinay Tiwari

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