वाशिंगटन, एएनआइ। रूस और चीन ने अमेरिका के लोकतंत्र सम्मेलन के विचार को यह कहते हुए खारिज कर दिया है कि इससे अंतरराष्ट्रीय समुदाय में नई विभाजन रेखा खिंच जाएगी। चीन ने सम्मेलन के लिए ताइवान को आमंत्रण भेजे जाने पर भी आपत्ति जताई है। अमेरिका ने गुरुवार को नौ व 10 दिसंबर को आनलाइन आयोजित होने वाले लोकतंत्र सम्मेलन के लिए आमंत्रित 110 देशों की सूची जारी की थी।

रूस और चीन को इस सम्मेलन के लिए आमंत्रित नहीं किया गया है। वाशिंगटन की नेशनल इंटरेस्ट मैग्जीन में प्रकाशित संयुक्त लेख में रूस के राजदूत एनाटोली एंटोनोव व चीनी क्विन गैंग ने कहा, 'अमेरिका यह जताने के लिए लोकतंत्र सम्मेलन कर रहा है कि कौन इसमें हिस्सा ले सकता है और कौन नहीं। कौन लोकतांत्रिक देश है और कौन इस दर्जे के लिए अयोग्य है। यह शीत युद्ध की मानसिकता की पैदाइश है, जो दुनियाभर में वैचारिक मतभेद व टकराव को बढ़ावा देगा।'

रेडियो फ्री एशिया ने चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजियान के हवाले से कहा, 'चीन दृढ़ता के साथ अमेरिका द्वारा कथित लोकतंत्र सम्मेलन के लिए ताइवान को आमंत्रित किए जाने का विरोध करता है।' चीन ने अमेरिका से कहा है कि वह ताइवान की आजादी चाहने वाली ताकतों को मंच प्रदान करना बंद करे। 

समाचार एजेंसी एएनआइ की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका की बाइडन सरकार की ओर से भारत को भी 'समिट आफ डेमोक्रेसी' कार्यक्रम का निमंत्रण मिला है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वर्चुअल माध्यम से इस कार्यक्रम में भाग ले सकते हैं। अमेरिका की बाइडन सरकार 9 से 10 दिसंबर को नागरिक समाज और निजी क्षेत्र के नेताओं के लिए एक वर्चुअल शिखर सम्मेलन की मेजबानी करने को तैयार है।

वर्चुअल कार्यक्रम के लिए अमेरिकी स्टेट डिपार्टमेंट की आमंत्रण सूची में 110 प्रतिभागी हैं। इस सम्‍मेलन का मकसद दुनिया भर में लोकतांत्रिक बैकस्लाइडिंग और अधिकारों और स्वतंत्रता के क्षरण को रोकने में मदद करना है। इस शिखर सम्मेलन लोकतंत्र के सामने आने वाली चुनौतियों पर मंथन होगा...

Edited By: Krishna Bihari Singh