नई दिल्‍ली [जागरण स्‍पेशल]। अमेरिका और चीन के बीच लंबे समय से जारी ट्रेड वॉर से जहां दोनों देशों को कुछ नुकसान उठाना पड़ रहा है। वहीं, कुछ ऐसे भी हैं जिन्‍हें इसकी वजह से फायदा हो रहा है। ऐसा ही एक देश वियतनाम है। इन दोनों देशों के बीच ट्रेड वॉर का फायदा सबसे अधिक इसी देश को हो रहा है। दरअसल, अमेरिका के लिए चीन में बन रहे सामान की बढ़ती लागत और कीमत को देखते हुए अब यह सामान वियतनाम की कंपनियों द्वारा बनाया जा रहा है। यहां पर बनने वाले सामान में इलेक्‍ट्रॉनिक गजेट्स से लेकर दूसरे रोजमर्रा के सामान भी शामिल हैं।

न्‍यूयॉर्क टाइम्‍स की रिपोर्ट के मुताबिक कैनन प्रिंटर के पार्ट्स, म्‍यूजिकल इंस्‍ट्रूमेंट्स, सैमसंग सेलफोन, मोबाइल फोन एक्‍सेसरीज और यहां तक की ईयरबड्स भी यहां पर बन रही हैं। हालांकि, इन चीजों को बनाने वाली कंपनियां इस बात को लेकर भी संशय में हैं कि वह मांग के हिसाब से सप्‍लाई कर पाने में कामयाब हो सकेंगी या नहीं। इन चीजों को बनाने के लिए वियतनाम को चीन से हर माह प्‍लास्टिक मैटेरियल मंगाना पड़ रहा है जो 70 से लेकर 100 टन तक है। इन कंपनियों का ये भी मानना है कि वह इस बारे में चीन से अपनी तुलना नहीं कर सकते हैं। वू हू थांग की कंपनी भी अमेरिका के लिए इसी तरह के सामान बनाने में जुटी हैं।

कंपनी के मुताबिक, ट्रेड वॉर का फायदा भले ही वियतनाम को मिल रहा है, लेकिन एक सच ये भी है कि इसको बनाने के लिए जो कच्‍चा माल चीन से मंगाया जा रहा है वह भी उन्‍हें महंगे दाम पर मिल रहा है। चीन के मुकाबले वियतनाम बेहद छोटा देश है, लिहाजा वह इस ट्रेड वॉर का फायदा उठाने में कितना सफल हो पाएगा, यह वक्‍त बताएगा। गौरतलब है कि चीन और अमेरिका के बीच जारी ट्रेड वॉर को खत्‍म करने के लिए दोनों देशों के बीच कई दौर की वार्ता हो चुकी है, लेकिन ये बेनतीजा रही है। इससे अभी तक कुछ हासिल नहीं हो सका है। पिछले दिनों शंघाई में भी इसको लेकर वार्ता हुई थी।

इतना ही नहीं एप्‍पल आई फोन को असेंबल करने वाली कंपनी ने भी वियतनाम में जगह हासिल कर ली है। लिहाजा, मुमकिन है कि आने वाले समय में यहां के बने आईफोन आपकी जेब में हों। जानकारों की मानें तो वियतनाम के सामने ये बड़ा मौका है, लेकिन इसके बाद भी वह रातोंरात नहीं बदल जाएगा। वियतनाम के सामने इस मौके को अपने हक में लाने की राह में कई चुनौतियां भी हैं। इनमें से एक चुनौती कंपनी खड़ी करने के लिए जरूरी आधारभूत ढांचे का न होना भी है।

जमीन के ऊंचे रेट, जमीन की कमी वियतनाम के सामने सबसे बड़ी समस्‍या है। बेकर मेकांजी के एमडी फ्रेडरिक बुर्के का कहना है कि वियतनाम को इसका फायदा उठाने के लिए खुद को फैलाना होगा। यह फैलाव सिंगापुर की तर्ज पर भी किया जा सकता है। उनका ये भी कहना है कि बीते कुछ वर्षों में वियतनाम में वर्क फोर्स दस लाख तक बढ़ चुका है, इसके बाद भी इसकी कमी महसूस की जा रही है। यहां पर आपको ये भी बता दें कि चीन के अलावा अमेरिका और भारत के बीच भी ट्रेड वॉर चल रहा है। जहां तक अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप की बात है तो वो दोनों पर ही अपना सख्‍त रुख जता चुके हैं।

 

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Posted By: Kamal Verma

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