हांगकांग, एजेंसी। अमेरिकी प्रतिनिधिसभा की स्पीकर नैंसी पेलोसी के ताइवान दौरे (Taiwan Visit) से चीन बुरी तरह फंस गया है। चीन ने अमेरिका के सामने कड़ा राजनयिक एतराज जताया है। साथ ही चीन ने अपनी साख बनाए रखने के लिए ताइवान के आसपास छह दिनों का अभूतपूर्व सैन्य अभ्यास शुरू किया है। चीन के आक्रामक रुख को भांपकर ताइवान भी सतर्क है। ताइवान की सेनाएं चीन की हर गतिविधि पर करीबी नजर रख रही हैं। वहीं अमेरिका ने भी इंडोनेशिया के साथ सुमात्रा द्वीप में सैन्य अभ्यास शुरू किया है।

बड़ी बात यह कि सुमात्रा द्वीप में हो रहे सैन्‍य अ‍भ्‍यास में अमेरिका और इंडोनेशिया के साथ अन्‍य देश भी हिस्‍सा ले रहे हैं। वहीं सुरक्षा विश्लेषकों ने नैन्सी पेलोसी की यात्रा को लेकर क्षेत्र में गहराए तनाव के जोखिमों के बढ़ने की चेतावनी दी है। ताइवान के अधिकारियों ने चीन के सैन्‍य अभ्‍यास पर कहा है कि इस ड्रिल के बहाने लाइव फायर करना संयुक्त राष्ट्र के नियमों का उल्लंघन है। चीन की यह कार्रवाई मुक्त हवाई और समुद्री नेविगेशन के लिए एक सीधी चुनौती है।

समाचार एजेंसी रायटर्स से विश्लेषकों ने कहा कि यह स्पष्ट नहीं है कि चीन सीधे द्वीप पर क्रूज या बैलिस्टिक मिसाइलें दागेगा या ताइवान की घेराबंदी का प्रयास करेगा। हांगकांग के एक सैन्य विश्‍लेषक सोंग झोंगपिंग ने कहा कि ऐसा लगता है कि पीपुल्स लिबरेशन आर्मी ताइवान की घेराबंदी करने से पहले इस बात को लेकर आश्‍वस्‍त हो जाना चाहती है कि यदि युद्ध की नौबत आई तो किस तरीके से ताइवान की घेराबंदी की जाएगी।

सरल शब्दों में कहें, तो इन अभ्यासों का लक्ष्य ताइवान के साथ सैन्य लड़ाई के लिए खुद को तैयार करना है। वहीं ताइवान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि हम चीन की महत्वाकांक्षा देख सकते हैं। यदि चीन अपने मकसद में कामयाब हो गया तो यह क्षेत्रीय देशों की सुरक्षा और स्थिरता के साथ-साथ क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था के लिए भी घातक होगा। वहीं सिंगापुर के सुरक्षा जानकार कोलिन कोह ने कहा कि पेलोसी यात्रा से चीन फंस गया है। चीन युद्ध से बचने के लिए व्यापक प्रतिक्रिया दिखाने को बाध्‍य है।

एस राजारत्नम स्कूल ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज के कोह ने कहा कि यदि चीन पूर्ण टकराव से बचना चाहे तो भी आकस्मिक गतिरोध के बढ़ने की महत्वपूर्ण संभावनाएं हैं। चीन के सैन्‍य अभ्यासों के मानचित्र दिखाते हैं कि पीएलए मिसाइल फायरिंग से बहुत आगे जा चुकी है। कुछ ताइवानी अधिकारियों का कहना है कि यह अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को चुनौती देने जैसा कदम है। अमेरिका ने भी ताइवानी क्षेत्र में अपने जंगी बेड़े उतारे हैं। कोह ने कहा कि यदि चीनी विमानों ने कोई जवाब दिया तो क्षेत्र में टकराव का जोखिम बढ़ जाएगा।

Edited By: Krishna Bihari Singh