जयप्रकाश रंजन, शेनजेन। दूरसंचार कंपनियों के लिए बेहद संवेदनशील अत्याधुनिक उपकरण बनाने वाली चीन की कंपनी हुआवे को इस क्षेत्र में आज अमेरिकी कंपनियों के सबसे बड़े प्रतिद्वंदी के तौर पर देखा जा रहा है। अमेरिका समेत कई पश्चिमी देशों की तरफ से प्रतिबंध झेल रही इस कंपनी के लिए भारत का बाजार बहुत अहम हो गया है। लेकिन कंपनी की दिक्कत यह है कि भारत भी इस बारे में फैसला लेने में देरी कर रहा है। ऐसे में कंपनी की सारी भावी योजनाएं अब इस बात पर टिकी हैं कि अक्टूबर, 2019 में पीएम नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शी शिनफिंग के बीच होने वाली मुलाकात में हुआवे को लेकर क्या फैसला होता है। कंपनी के अधिकारी मानते हैं कि दोनो देशों के प्रमुखों की होने वाली बैठक एक तरह से उनके भारत में कारोबार के भविष्य को तय करने वाली होगी।

दरअसल, हुआवे के लिए भारत का टेलीकॉम बाजार अभी भी दुनिया के शीर्ष तीन बाजारों में से है। कंपनी की सोच है कि अगर भारत की तरफ से 5जी सेवाओं के परीक्षण में उसे भाग लेने की अनुमित मिल जाए तो वह अमेरिकी व कुछ यूरोपीय बाजारों के खोने की भरपाई भारत से कर सकती है। इसके लिए कंपनी भारत में सबसे अत्याधुनिक मैन्यूफैक्चरिंग प्लांट लगाने के लिए भी तैयार है। लेकिन हाल के दिनों में मामला कुछ ज्यादा ही राजनीतिक हो चुका है। अमेरिका ने हुआवे को प्रतिबंधित करने के बाद अपने सहयोगी देशों को भी बोला है कि वे हुआवे की सेवाओं का बहिष्कार करें। दूसरी तरफ, चीन के वाणिज्य मंत्री यह बयान दे चुके हैं कि हुआवे को प्रतिबंधित करने वाले देशों के खिलाफ वे भी कारोबारी कदम उठाएंगे।

चीन के इलेक्ट्रॉनिक शहर के तौर पर मशहूर शेनजेन स्थित हुआवे के मुख्यालय के आला अधिकारियों के मुताबिक भारत सरकार को यह समझना होगा कि आज अमेरिका अपनी कंपनी को बचाने के लिए चीन की कंपनियों को निशाना बना रहा है, लेकिन उनका अगला निशाना भारतीय कंपनियां होंगी क्योंकि वे भी टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में काफी तेजी से प्रगति कर रही हैं। भारत में हमारा रिकार्ड देखा जाए तो साफ है कि हम वहां पर स्थानीय ढांचा तैयार करने पर कितना ध्यान देते हैं।

बंगलुरू में हुआवे का दूसरा सबसे बड़ा आरएंडडी केंद्र
बंगलुरू में हुआवे का चीन के बाद दूसरा सबसे बड़ा शोध व अनुसंधान (आरएंडडी) केंद्र है जहां 2000 कर्मचारी हैं। चेन्नई में कंपनी की मोबाइल हैंडसेट फैक्ट्री काफी पहले डाल रखी है। अगर 5जी में उतरने की अनुमित मिल जाती है तो हम दूरसंचार उपकरणों के निर्माण के लिए चीन के बाहर दूसरा सबसे बड़ा प्लांट भारत में लगा सकते हैं। भारत की अर्थव्यवस्था जिस गति से बढ़ रही है उसकी दूरसंचार उपयोगिता को पूरा करने के लिए हुआवे की खास योजना है। लेकिन फिलहाल कंपनी को सरकार के फैसले का इंतजार है। संभवत: मोदी और शिनफिंग की मुलाकात से आगे की राह निकलेगी।

हुआवे 1999 से भारत में कर रही है काम
यह पूछे जाने पर कि अगर भारत हुआवे को अनुमित नहीं देता तो कंपनी का भावी प्लान क्या होगा? उक्त अधिकारी का जवाब था कि हम शायद फिर 4जी बाजार में ही फोकस करेंगे। लेकिन रिलायंस जियो की वजह से देश की दूसरी दूरसंचार कंपनियों की हालत काफी खराब हो चुकी है। 4जी बाजार में उनकी हिस्सेदारी घटती जा रही है। इसका असर हुआवे के कारोबार पर भी पड़ा है। क्योंकि रिलायंस जियो अपने उपकरण सैमसंग से लेती है। साथ ही हैंडसेट बाजार को लेकर भी हम काफी आशान्वित हैं। अक्टूबर, 2019 में कंपनी अगले साल के अपने वैश्रि्वक प्लान की घोषणा करेगी जिसमें भारत के लिए भी घोषणाएं होंगी। हुआवे वर्ष 1999 से भारत में काम कर रही है। वहां अभी तक कुल 3.6 अरब डॉलर का निवेश कर चुकी है और वहां उसके कुल 6000 कर्मचारी हैं। वर्ष 2018 में कंपनी ने भारत में तकरीबन 1 अरब डॉलर का कारोबार किया था।

Posted By: Manish Pandey

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