बीजिंग, एजेंसी। कोरोना महामारी का असर चीन की अर्थव्‍यवस्‍था के साथ रोजगार पर भी पड़ा है। सुस्‍त घरेलू खपत और कम निर्यात के कारण चीन की अर्थव्‍यवस्‍था सबसे खराब दौर से गुजर रही है। अर्थव्‍यवस्‍था में गिरावट का असर देश के रोजगार पर भी पड़ा है। देश में बेराजगारी की दर बढ़ी है। कोरोना महामारी के बाद लगे प्रतिबंधों के चलते चीन में करीब 8 करोड़ लोग अपनी नौकरी से हाथ धो चुके हैं या काम की तलाश में दर-दर भटक रहे हैं। आधिकारिक तौर पर शहरी बेरोजगारी दर बढ़ी है। पिछले वर्ष की तुलना में यह वृद्धि कहीं ज्‍यादा रही है। अप्रैल में यह छह फीसद रही। चीनी अर्थव्‍यवस्‍था में गिरावट और बेराजगारी यहां की कम्‍युनिस्‍ट पार्टी के लिए सबसे बड़ी चुनौती के रूप में उभरी है।  

आखिर चीनी नेता शी चिनफिंग की चिंता क्‍यों बढ़ी  

दरअसल, चीन की सामाजिक सुरक्षा का तानाबाना बड़े पैमाने पर बेरोजगारी की भरपाई नहीं कर सकता। ऐसे में कम्‍युनिस्‍ट पार्टी की चिंता और बढ़ गई है। कोरोना महामारी के बाद चीनी सरकार केवल शहरी बेरोजगारी दर को स्थिर करने में जुटी रही। चीन सरकार यह समझ रही है कि बड़े पैमाने पर बेरोजगारी देश में राजनीतिक अशांति को जन्म दे सकती है। यह सामाजिक संकट कम्‍युनिस्‍ट पार्टी के सर्वोच्‍च नेता शी चिनफिंग के कार्यकाल के लिए सबसे बुरा वक्‍त है। खासकर तब, जब अगले साल चीन शताब्‍दी वर्ष मनाने के लिए तैयारी में जुटा है। चीन ने 2020 में सकल घरेलू उत्‍पाद को दोगुना करने और गरीबी को पूरी तरह से समाप्‍त करने का लक्ष्‍य निर्धारित किया है। 

CCP ने तीन दशकों में पहली बार आर्थिक गिरावट को स्वीकार किया

चीन की अर्थव्‍यवस्‍था मंदी के दौर से गुजर रही है। यह इससे साबित होता है कि चीन की नेशनल पीपुल्‍स कांग्रेस ने मई में जीडीपी वृद्धि लक्ष्‍य की घोषणा नहीं की। 17 अप्रैल को चीन के राष्‍ट्रीय सांख्यिकी ब्‍यूरो ने भी इसका ऐलान किया। ब्‍यूरो ने पहली बार माना क‍ि अर्थव्‍यवस्‍था में 2020 की पहली तिमाही में लगभग 7 फीसद तक गिर गई है। 1976 में सांस्‍कृतिक क्रांति के बाद यह रिकॉर्ड गिरावट है। चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (CCP) ने तीन दशकों में पहली बार आर्थिक गिरावट को स्वीकार किया। हालांकि, इस रिपोर्ट को इंटरनेट से जल्दी हटा दिया गया और अनुसंधान निदेशक को दंडित किया गया। 

रोजगार की गारंटी से सुरक्षित रहती है राजनीतिक सत्‍ता 

शंघाई में पूर्व प्रोफेसर एवं एक स्‍वतंत्र राजनीतिक विश्‍लेषक प्रोफेसर चेन डॉयिन का कहना है कि देश में रोजगार की गारंटी देने से लोगों के हितों की रक्षा के साथ राजनीतिक सत्‍ता भी सुरक्षित रहती है। एक मायने में यह दोनों की रक्षा करती है। चेन ने कहा कि नागरिकों की बुनियादी जरूरतों को पूरा करने एवं खाद्य आपूर्ति को ठीक रखने से शासन की स्थिरता को खतरा उत्‍पन्‍न नहीं होता है। हाल में चीन के श्रमिकों ने अपने असंतोष को सोशल मीडिया पर व्‍यक्‍त किया है।  

  

Posted By: Ramesh Mishra

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