चीन में माओ के विचारों का पुनर्जन्म: 50 साल बाद Gen Z युवाओं और प्रोफेशनल्स के बीच बढ़ा किताबों का क्रेज
चीन में माओत्से तुंग की किताबें और भाषण 50 साल बाद जेन ज़ी और युवा पेशेवरों के बीच फिर से लोकप्रिय हो रहे हैं।

Gen Z युवाओं में बढ़ा माओ की किताबों का क्रेज। (यह तस्वीर एआई द्वारा बनाई गई है)
HighLights
माओत्से तुंग की किताबें चीन के युवाओं में फिर से लोकप्रिय।
आर्थिक मंदी, बेरोजगारी से जूझ रहे युवा माओ से प्रेरणा ले रहे।
सिंघुआ विश्वविद्यालय में 'माओ के चयनित कार्य' सबसे ज्यादा जारी हुई।
डिजिटल डेस्क, बीजिंग। माओत्से तुंग की किताबों और भाषण उनकी मृत्यू के 50 साल बाद एक बार फिर से चर्चाओं में हैं। यह क्रेज जेन जी और युवा प्रोफेशनल के बीच खासा प्रचलित हो रहा है। इसके पीछे कई वजहें हैं, जिनमें- अर्थव्यवस्था की धीमी रफ्तार, बेरोजगारी, नौकरियों के लेकर अनिश्चितता, शिक्षा और रोजगार में प्रतिस्पर्धा और आय की समानता की चिंता।
ऐसे में कुछ युवा माओ की रचनाओं के सिर्फ राजनीतिक दस्तावेज नहीं मान रहे, बल्कि ने इसे संघर्षों से निपटने का तरीका मान रही हैं। चीनी मीडिया की रिपोर्टों के मुताबिक, माओ के विचार कई युवाओं को संकट से निपटने की ताकत का स्रोत बन रहे हैं। यह इसलिए भी खास है क्योंकि जेन जी माओ की निजी स्मृतियों के बारे में नहीं जानते हैं।
माओ को इतिहास के एक बड़े किरदार की तरह देखती है जेन जी
जेन जी माओ को इतिहास के एक बड़े किरदार की तरह देखती है। उनके शब्दों को आज के दबाव के हिसाब से नए अर्थ में पढ़ती है। भविष्य को लेकर अनिश्चितता से जूझ रहे युवाओं का बड़ा वर्ग माओ के पुराने विचारों को आज की मुश्किलों को समझने, उनसे जूझने और समाधान खोजने के तौर पर देख रहा है ।
माओ की किताब में बढ़ रही चीन के युवाओं की दिलचस्पी
माओ की किताबों में युवाओं की बढ़ती दिलचस्पी के संकेत यूनिवर्सिटी,ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर दिख रहे हैं। प्रतिष्ठित शिंगहुआ यूनिवर्सिटी की लाइब्रेरी में पिछले साल सबसे ज्यादा जारी की गई किताब 'सिलेक्टेड वर्क्स ऑफ माओत्से तुंग' रही ।
