नई दिल्ली। कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना (सीपीसी) की 19वीं कांग्रेस शुरू हो चुकी है। सप्ताह भर चलने वाली इस बैठक में राष्ट्रपति शी चिनफिंग को पांच साल का दूसरा कार्यकाल मिलना तय माना जा रहा है। यह बैठक दुनिया के सबसे बड़े देश को चलाने वाले नीति-निर्माताओं की नई पौध तैयार करेगी।

 

सेंट्रल कमेटी से लेकर पोलित ब्यूरो तक में अपने लोगों को शामिल करके चिनफिंग चीन के अब तक के तीसरे सबसे कद्दावर शख्स बन सकते हैं। इस बैठक पर भारत सहित दुनिया की टकटकी लगी है। यहां से तय होगी कि ड्रैगन कहां फुंफकार मारेगा और किसे दुलार करेगा।

 

कांग्रेस का मतलब

दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था और सबसे बड़े देश को चलाने वाली पार्टी का चयन इस बैठक द्वारा किया जाता है। हर पांच साल में एक बार मध्य अक्टूबर में देश भर से सीपीसी के डेलीगेट्स बीजिंग में जमा होते हैं। वर्तमान में 2300 डेलीगेट्स हैं लेकिन इस कांग्रेस में 2287 ही चुने गए हैं। शेष 13 को अनुचित व्यवहार के लिए अयोग्य करार दिया गया है।


चयन की चुनौती

सीपीसी के डेलीगेट्स ताकतवर सेंट्रल कमेटी का चुनाव करते हैं। इसमें 205 सदस्य होते हैं। यह कमेटी 25 सदस्यों वाले पोलित ब्यूरो का चयन करती है। इसके बाद सात सदस्यों वाली पोलित ब्यूरो स्टैंडिंग कमेटी का चयन किया जाता है। सेंट्रल कमेटी द्वारा जनरल सेक्रेटरी के रूप में पार्टी का शीर्ष नेता चुना जाता है, जो देश का राष्ट्रपति बनता है।

 

शी के सिपाही: राष्ट्रपति शी चिनफिंग और प्रधानमंत्री ली कछ्यांग को छोड़कर पार्टी की शीर्ष संस्था पोलित ब्यूरो स्टैंडिंग कमेटी के पांच सदस्यों का इस साल तक रिटायर होने का अनुमान है। विशेषज्ञों का मानना है कि इन पदों पर राष्ट्रपति अपने खास को बैठा सकते हैं। आइए जानें कौन हो सकते हैं वो पांच...


चेन मिनर- शी के भरोसेमंद

56 साल के चेन चोंगक्विंग म्युनिसपालिटी के पार्टी प्रमुख हैं। 2002 से 2007 तक झेझियांग प्रांत में शी के मातहत काम किया। शी के विश्वस्त हैं।

 

हू चुनहुआ

दक्षिण चीन में आर्थिक रूप से समृद्ध प्रांत गुआंगडोंग में पार्टी के प्रमुख हैं। 54 साल के हू 2012 में पोलित ब्यूरो में शामिल है। पूर्व चीनी नेता हू जिंताओ का वरदहस्त होने के चलते इन्हें लिटिल हू भी कहा जाता है। चेन मिनर के साथ इन्हें शी का राजनीतिक उत्तराधिकारी माना जाता है।


ली झांशू- शी के ताकतवर सहयोगी

पार्टी के सेंट्रल कमेटी के जनरल ऑफिस के निदेशक हैं। राष्ट्रपति के शीर्ष सहयोगी के रूप में उनकी दैनंदिन की गतिविधियों का प्रबंधन करते हैं। कुशल प्रशासक हैं। 2012 में पोलित ब्यूरो में शामिल हुए। तीन दशक से राष्ट्रपति के नजदीकी मित्र रहे हैं।

 

वैंग हुनिंग- चीन के किसिंजर

सेंट्रल पॉलिसी रिसर्च ऑफिस के निदेशक हैं। सभी विदेश दौरों पर राष्ट्रपति के साथ रहते हैं। पूर्व राष्ट्रपतियों जियांग जेमिन से लेकर हू जिंताओ तक को इन्होंने सलाह दी है।

 

वांग यांग- उप प्रधानमंत्री

वर्तमान में चार उप प्रधानमंत्रियों में से एक हैं। दो बार से पोलित ब्यूरो के सदस्य हैं। शी के महत्वाकांक्षी कदम ओबोर के पीछे इन्हीं का दिमाग माना जाता है। माना जा रहा है कि बतौर प्रधानमंत्री ली कछ्यांग की जगह ले सकते हैं।

 

हान झेंग- शंघाई प्रमुख

सेंट्रल कमेटी के सदस्य हैं। शंघाई के मेयर और पूर्व में डिप्टी पार्टी सेक्रेटरी रह चुके हैं। माना जा रहा है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ काम करने वाली शीर्ष संस्था के प्रमुख बनाए जा सकते हैं।

 

बदल सकता है सेना का मौजूदा तेवर और कलेवर

शी चिंगफिंग सेना से जुड़े कड़े और बड़े फैसले लेने में पीछे नहीं हटते हैं। जनरलों द्वारा भ्रष्टाचार को रोकने से लेकर युवाओं को शीर्ष पद देने तक का सुधार इन्होंने किया। रूसी शैली में किए जाने वाले सैन्य ऑपरेशन की जगह वेस्टर्न स्टाइल ज्वाइंट कमांड का गठन किया। यही कारण है कि पीपुल्स लिबरेशन आर्मी इनके पहले कार्यकाल में कई बदलाव देख चुकी है।

 

इस कांग्रेस में अप्रत्याशित रूप से 300 मिलिट्री डेलीगेट्स में से 90 फीसद पहली बार भाग ले रहे हैं। चीन के इतिहास में पहली बार मिलिट्री से प्रमुख लोग सर्वाधिक संख्या में भाग ले रहे हैं। खुद को सर्वशक्तिमान बनाने के लिए शी सेना के अहम पदों पर अपने लोगों को बैठा सकते हैं।

 

दुनिया के लिए मायने

विश्लेषकों का मानना है कि स्टैंडिंग कमेटी में फेरबदल से कुछ नीतिगत बदलाव आ सकते हैं, लेकिन कमोबेश चीन चिनफिंग के साथ स्थिरता के लिए उसी ट्रैक पर चलता रह सकता है। घरेलू मोर्चे पर पंचवर्षीय आर्थिक सुधार योजना जारी रह सकती है। भ्रष्टाचार के खिलाफ शी का अभियान और मजबूत हो सकता है। वैश्विक मंच पर चिनफिंग के पूर्व के कदमों में तेजी आ सकती है। इसमें दक्षिण चीन सागर विस्तार से लेकर वन बेल्ट वन रोड परियोजना भी शामिल है। अमेरिकी विकल्प के रूप में खुद को खड़ा करना भी एजेंडे में होगा। उत्तर कोरिया पर चीनी रुख सख्त ही रह सकता है।

 

ताइवान के जरिए दुनिया को सबक

चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने बुधवार को एलान किया कि स्वशासित ताइवान के खुद को स्वतंत्र घोषित करने के किसी भी प्रयास को विफल करने के लिए चीन के पास संकल्प, विश्वास और क्षमता है। कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना (सीपीसी) की महासभा में चिनफिंग की इस धमकी पर ताइवान ने कड़ा विरोध जताया। ताइवान ने कहा कि देश का भविष्य सिर्फ उसके यहां की जनता ही तय करेगी।

Posted By: Digpal Singh

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