चीनी सैटेलाइट डेटा ने ईरान के ड्रोनों को बनाया और भी खतरनाक, अमेरिकी रिपोर्ट में सनसनीखेज दावा
अमेरिकी खुफिया आकलनों के अनुसार, चीनी समूहों से मिले सैटेलाइट डेटा और खुफिया सहायता ने मध्य पूर्व में ईरान की ...और पढ़ें

चीन के सैटेलाइट डेटा से ईरान के ड्रोन ज्यादा खतरनाक हो गए: अमेरिकी रिपोर्ट
HighLights
चीन ने इनकार किया है कि उसकी कंपनियां ईरान को डेटा सप्लाई कर रही हैं
चीनी दूतावास ने कहा कि बीजिंग की मदद अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप है
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में इन दिनों ईरान ने अपने ड्रोन अटैक को बढ़ा दिया है। वहीं, अमेरिकी खुफिया आकलनों के अनुसार, चीनी समूहों से मिले सैटेलाइट डेटा और खुफिया सहायता ने मध्य पूर्व में ईरान की सटीक हमला करने और जहाजों को ट्रैक करने की क्षमता को काफी बढ़ा दिया है।
सीएनएन की रिपोर्ट में चार सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि इस बाहरी मदद से होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों पर हमलों की सटीकता बढ़ी है और जॉर्डन में एक अमेरिकी सैन्य अड्डे पर घातक हमला भी हुआ, जिसमें तीन अमेरिकी सैनिक मारे गए।
सूत्रों के अनुसार, जॉर्डन में हुए हमले की सटीकता ईरान की घरेलू क्षमताओं से परे थी। चीनी भू-स्थानिक (जियोस्पेशियल) डेटा ने होर्मुज में जहाजों पर मिसाइल और ड्रोन हमलों में मदद की।
दो सूत्रों ने बताया कि ईरान इस डेटा का इस्तेमाल ड्रोन लॉन्च का सही समय तय करने के लिए करता है, जिससे उसके साधारण, गैर-मैन्युवरेबल हीट-सीकिंग ड्रोन भी जहाजों के लिए खतरा बन जाते हैं।
कैसे मदद मिलती है
ईरान के हीट-सीकिंग ड्रोन बहुत उन्नत नहीं हैं, लेकिन चीनी सैटेलाइट इमेजरी की मदद से वह अनुकूल समय पर बड़ी संख्या में ड्रोन लॉन्च करके अमेरिकी सैन्य एस्कॉर्ट और व्यापारिक जहाजों पर हमला करता है।
एक सूत्र ने कहा कि उनके टारगेटिंग में सुधार की वजह कुछ सहायता है। युद्ध के मैदान का अनुभव मददगार है, लेकिन बाहरी मदद और भी ज्यादा। रूस भी ईरान को समर्थन दे रहा है।
अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, चीन की मदद का सही पैमाना मापना मुश्किल है। यह स्पष्ट नहीं है कि बीजिंग सक्रिय रूप से निर्देश दे रहा है या सिर्फ अनुमति दे रहा है।
चीन ने इनकार किया है कि उसकी कंपनियां ईरान को डेटा सप्लाई कर रही हैं। चीनी दूतावास ने कहा कि बीजिंग की मदद अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप है। इससे पहले वॉल स्ट्रीट जर्नल ने रिपोर्ट किया था कि ट्रंप प्रशासन ने कई महीनों तक बीजिंग को चेतावनी दी थी।
