बीजिंग, राजीव सचान। सरकारी नियंत्रण वाले चीनी मीडिया की उभरते भारत में दिलचस्पी बढ़ रही है, लेकिन वह भारत को पश्चिमी मीडिया की नजरों से नहीं देखना चाहता और यह भी अपेक्षा रखता है कि भारतीय भी उसे पश्चिम के समाचार माध्यमों की निगाह से न देखे। चीनी मीडिया भले ही सरकारी नियंत्रण में हो, लेकिन वह खेमों में बंटा दिखता है।

इसका आभास बीजिंग आए भारतीय मीडिया दल को तब हुआ जब 'चाइना डेली' के संपादक मंडल ने 'पीपुल्स डेली' के मुकाबले अपनी नीति को बेहतर और विश्वसनीय बताया। साथ ही 'ग्लोबल टाइम्स' को टैबलायड करार देकर यह संदेश देने की कोशिश कि उसके रुख को ज्यादा महत्व नहीं दिया जाना चाहिए।

दिलचस्प यह है कि ये तीनों समाचार पत्र चीनी सरकार अथवा सत्ताधारी दल से ही नियंत्रित हैं। चीन में मीडिया सरकारी हाथों में है और निकट भविष्य में ऐसे कोई आसार नहीं कि इस देश में निजी मीडिया संस्थान अस्तित्व में आ सकेंगे।

चाइना डेली की ओर से ग्लोबल टाइम्स की रीति-नीति को खारिज करने की कोशिश उस वक्त हुई जब भारतीय मीडिया दल के सदस्यों ने डोकलाम विवाद के समय इस चीनी अखबार के भारत के खिलाफ आक्रामक और उकसावे वाले रुख का उल्लेख किया।

ज्ञात हो कि उस दौरान ग्लोबल टाइम्स भारत को 'चुटकियों में खदेड़ देंगें-मिटा देंगे' वाली भाषा का इस्तेमाल करने में लगा हुआ था। तब इस अखबार को देखने-पढ़ने वालों को यही प्रतीत हो रहा था कि भारत के खिलाफ ऐसी उग्र भाषा का इस्तेमाल चीन सरकार की शह पर हो रहा है। चाइना डेली के प्रतिनिधि इस धारणा को ध्वस्त करते दिखे।

चाइना डेली के संपादक मंडल ने भारत को अपने प्रतिनिधियों की नजर से जानने-समझने और दोनों देशों के मीडिया माध्यमों में सहयोग बढ़ाने की जरूरत पर बल दिया। इसके साथ ही भारत के प्रति बढ़ती रुचि को भी रेखांकित किया। इस क्रम में आमिर खान और उनकी फिल्म दंगल का जिक्र किया। अंग्रेजी के इस समाचार पत्र में कई भारतीय भी काम करते हैं।

मंगलवार के इसके अंक में भारतीय और चीनी विदेश मंत्री के बीच हुई वार्ता की खबर पहले पेज पर प्रमुखता से थी, लेकिन शीर्षक 'कश्मीर विवाद को बातचीत से हल करने की जरूरत' पर ही केंद्रित था। खेल पेज पर विराट कोहली के वन डे में शतक की खबर भी थी। इसके अलावा इसी अखबार में काम करने वाले पत्रकार मंजूनाथ शेट्टी का एक स्तंभ भी प्रकाशित किया गया था।

दुनिया के अन्य देशों की तरह चीनी अखबार भी ऑनलाइन समाचारों के जरिये पाठकों को आकर्षित करने पर जोर दे रहे हैं, लेकिन वे पश्चिमी मीडिया माध्यमों को चीन के प्रति दुराग्रही मानते हैं। चीन में पश्चिमी देशों के अखबार, टीवी चैनल, ऑनलाइन नेटवर्क और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म तक पहुंच बनाना दुष्कर है।

पुरानी हिंदी फिल्में भी लुभा रहीं चीनियों को

चीन में दंगल फिल्म की लोकप्रियता पुरानी बात हो चुकी। नई बात यह है कि आमिर, सलमान और ऋतिक रोशन की हालिया फिल्मों को चीन में मिली सफलता ने पुरानी हिंदी फिल्मों के प्रति भी दिलचस्पी बढ़ा दी है। पुरानी हिंदी फिल्मों के गानों की वीडियो क्लिप चीनी नागरिकों के मोबाइल फोन में जगह बना रही है। इनमें आवारा फिल्म का कालजयी गीत मैं आवारा हूं. भी शामिल है।

भारतीय मीडिया दल की टूर गाइड ने यह गाना गुनगुनाने के बाद जितेंद्र और आशा पारेख के गाने का एक वीडियो दिखाकर फिल्म का नाम जानना चाहा, लेकिन दल के सदस्य अनुमान के घोड़े ही दौड़ा सके। 

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Posted By: Bhupendra Singh