जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। भारत और चीन के बीच सीमा विवाद को सुलझाने के लिए गठित विशेष प्रतिनिधि स्तर बातचीत शनिवार को होगी। बातचीत में भारतीय पक्ष की अगुवाई राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल करेंगे जबकि चीन पक्ष की अगुवाई विदेश मंत्री वांग यी करेंगे। अक्टूबर, 2019 में पीएम नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शी शिनफिंग के बीच हुई उच्चस्तरीय वार्ता के बाद पहली बार दोनो देशों के बीच एक और अहम बातचीत होने जा रही है। विदेश मंत्रालय की तरफ से जानकारी दी गई है कि सीमा विवाद सुलझाने के लिए दोनो देशों के बीच होने वाली यह 22वीं बैठक है।

वैसे इस बैठक से भी दशकों से लंबित पड़े सीमा विवाद का निपटारा निकलने की कोई उम्मीद नहीं है लेकिन माना जा रहा है कि अब बातचीत काफी अहम दौर में पहुंच गई है।यह भी ध्यान रखने की बात है कि मोदी और शिनफिंग के बीच हुई बैठक के बाद बावजूद दोनो देशों के रिश्ते बहुत अच्छे नहीं है। कश्मीर को लेकर लगातार रिश्तों में तनाव आ रहा है। वांग यी को सितंबर, 2019 में ही इस बैठक के लिए आना था लेकिन भारत ने इसे टालने का आग्रह किया था। माना जाता है कि संयुक्त राष्ट्र में जिस तरह से चीन ने कश्मीर का मुद्दा उठाया था उसे देख कर ही भारत ने ही वार्ता को तब टाल दिया था।

भारत और चीन के बीच 3,488 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा है। इसके एक बडे़े हिस्से को लेकर दोनो देशों में असहमति है जिसे दूर करने के लिए विशेष प्रतिनिधियों के बीच बातचीत शुरु करवाया गया था। चीन के विदेश मंत्रालय की तरफ से बताया गया है कि शनिवार से शुरु होने वाले दो दिवसीय वार्ता में अंतरराष्ट्रीय सीमा का निर्धारण, सीमा प्रबंधन के साथ ही दूसरे साझा हितों से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा की जाएगी।

पिछले वर्ष दोनो देशों के बीच यह बैठक चीन में ही हुई थी जिसमें दोनो पक्षों ने सीमा विवाद को सुलझाने की कोशिशों को तेज करने की बात कही थी। यह भी बता दें कि मोदी और शिनफिंग के बीच हुई वार्ता के दौरान भी दोनो नेताओं ने सीमा विवाद का ऐसा हल निकालने की बात कही थी जो दोनो पक्षों को स्वीकार्य हो।

 

इंडियन टी20 लीग

डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस