हांगकांग, एएफपी/रायटर। हांगकांग में प्रस्तावित नए प्रत्यर्पण कानून के खिलाफ बुधवार को फिर लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। सड़कों पर उतरे हजारों प्रदर्शनकारियों ने पूरे शहर का चक्का जाम कर दिया। विधायिका के घेराव का भी प्रयास किया गया। प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज किया, आंसू गैस के गोले दागे और रबर की गोलियां बरसाई।

प्रस्तावित प्रत्यर्पण कानून को रद करने की मांग को लेकर बीते शनिवार को भी लाखों लोगों ने प्रदर्शन किया था। इस मांग को ठुकराते हुए चीन समर्थक हांगकांग की नेता कैरी लैम ने साफ कर दिया था कि प्रत्यर्पण कानून पर पीछे नहीं हटा जाएगा। लैम ने कहा था कि पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत विधायी परिषद में बुधवार को इस बिल पर चर्चा होगी।

प्रदर्शनकारियों ने इस बिल को रद करने के लिए सरकार को बुधवार दोपहर तीन बजे तक का अल्टीमेटम दिया था। यह समय बीतने के बाद प्रदर्शनकारी विधायी परिषद की ओर बढ़ने लगे जिससे पुलिस के साथ उनकी झड़पें शुरू हो गईं। उन्हें रोकने के लिए तैनात दंगा रोधी पुलिस के जवानों ने पहले लाठीचार्ज किया और मिर्च पाउडर का स्प्रे किया।

इसके बाद आंसू गैस के गोले दागे और रबर की गोलियां चलाईं। प्रदर्शनकारियों ने भी पुलिस के जवानों पर पत्थर बरसाए। हांगकांग के पुलिस प्रमुख स्टीफेन लो ने प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई का बचाव करते हुए कहा कि वे विधायी परिषद पर धावा बोलना चाहते थे।

क्या है प्रत्यर्पण कानून
इस प्रस्तावित कानून में आरोपितों और संदिग्धों को मुकदमा चलाने के लिए चीन में प्रत्यर्पित करने का प्रावधान है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस कानून से हांगकांग की स्वायत्तता और यहां के नागरिकों के मानवाधिकार खतरे में आ जाएंगे।

पूरी तैयारी से आए थे प्रदर्शनकारी
प्रत्यर्पण कानून को रद करने की मांग को लेकर सड़कों पर उतरे हजारों प्रदर्शनकारियों में बड़ी संख्या युवकों और छात्रों की थी। ज्यादातर ने अपना चेहरा ढकने के लिए मास्क, हेलमेट और चश्मे लगा रखे थे। ज्यादातर प्रदर्शनकारी काले रंग के कपड़ों में आए थे।

बिल पर नहीं हो पाई बहस
विधायी परिषद के आसपास की सड़कों पर बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों के जमा होने से बिल पर तय समय पर चर्चा शुरू नहीं हो पाई। इस पर चर्चा के लिए फिर से समय तय करने की बात कही गई है।

चीन के नियंत्रण में है हांगकांग
चीन के नियंत्रण वाले हांगकांग में 1997 के बाद यह सबसे बड़ा विरोध प्रदर्शन बताया जा रहा है। ब्रिटेन ने 1997 में इस शर्त के साथ चीन को हांगकांग सौंपा था कि वह इसकी स्वायत्तता बरकरार रखेगा।

2014 में दो माह ठहरा रहा हांगकांग
हांगकांग में साल 2014 में भी बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए थे। तब प्रदर्शनकारियों ने व्यापक लोकतांत्रिक अधिकारों की मांग को लेकर शहर में दो माह तक विरोध प्रदर्शन किया था। इससे पूरा हांगकांग ठहर सा गया था।

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Posted By: Dhyanendra Singh

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