हांगकांग। हांगकांग को लेकर चीन की परेशानी लगातार बढ़ती जा रही है। रविवार को फिर चीन के एक कानून के खिलाफ हजारों लोगों ने सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन किया। यह लोग हाथों में चीन के खिलाफ बैनर और तख्‍ती लिए हुए थे। इनमें से कुछ पर लिखा था कि चीन हमारे बच्‍चों को मार रहा है। यह प्रदर्शन रविवार को स्‍थानीय समयानुसार करीब साढ़े तीन बजे शुरू हुआ। इसके लिए इन लोगों ने वो जगह चुनी थी जहां पर काफी संख्‍या में चीनी पर्यटक घूमने आते हैं। इन लोगों का प्रदर्शन वेस्‍ट कोलून स्‍टेशन पर जाकर खत्‍म हुआ। यह स्‍टेशन हांगकांग को चीन मेनलैंड से जोड़ता है। इस मुद्दे पर चीन की सख्‍ती और उसकी परेशानी का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि इसे कवर करने के लिए इंटरनेशनल मीडिया के इक्‍का दुक्‍का लोग ही यहां पर मौजूद थे। वहीं प्रदर्शन को देखते हुए पुलिस का व्‍यापक प्रबंध भी किया गया था। यह प्रदर्शन पूरी तरह से शांतिपूर्ण था, फिर भी चीन की धड़कनें इसको लेकर बढ़ी हुई है।

जो विशाल प्रदर्शन हांगकांग की सड़कों पर देखने को मिला वह एक नए कानून को लेकर था। दरअसल, हांगकांग के लोग प्रत्यर्पण कानून में संशोधन के प्रस्ताव का जमकर विरोध कर रहे हैं। इनका कहना है कि इसके बाद हांगकांग के लोगों पर चीन का कानून लागू हो जाएगा और लोगों को मनमाने ढंग से हिरासत में ले लिया जाएगा और उन्हें यातनाएं दी जाएंगी। प्रदर्शनों के बाद इस कानून को फिलहाल निलंबित कर दिया गया है, लेकिन प्रदर्शनकारियों की मांग है कि इस कानून को रद किया जाए।

पूरी दुनिया में हांगकांग को सुर्खियों में लाने वाले इस प्रदर्शन की वजह थी कि एक शख्‍स ताईवान में एक महिला की हत्‍या कर हांगकांग वापस आ गया था। मुकदमा चलाने के लिए जरूरी था कि उसको ताइवान भेजा जाए, लेकिन ताइवान के साथ हांगकांग की प्रत्‍यर्पण संधि नहीं है। इस वजह से शख्‍स को ताइवान भेजना मुश्किल है। वर्तमान में हांगकांग का जो कानून है वह अंग्रेज़ों के समय का बनाया हुआ है। इसकी करीब एक दर्जन से अधिक देशों के साथ प्रत्यर्पण संधि है। इसमें अमेरिका, ब्रिटेन और सिंगापुर शामिल हैं। चीन ने मौजूदा कानून में जो बदलाव किया है उसके तहत चीन को किसी भी व्‍यक्ति को हिरासत में लेकर पूछताछ करने उसको वापस भेजने संबंधी अधिकार प्राप्‍त हो जाएंगे। इसका ही हांगकांग के लोग विरोध कर रहे हैं।

हांगकांग पर मचे बवाल को लेकर इससे जुड़ी कुछ दूसरी बातों को भी जान लेना बेहद जरूरी है। आपको बता दें कि साल 1997 में जब हांगकांग को चीन के हवाले किया गया था तब बीजिंग ने 'एक देश-दो व्यवस्था' की अवधारणा के तहत कम से कम 2047 तक लोगों की स्वतंत्रता और अपनी क़ानूनी व्यवस्था को बनाए रखने की गारंटी दी थी। लेकिन हांगकांग के लोगों को आजतक भी ऐसा नहीं लगा है कि चीन इस दिशा में काम कर रहा है। वर्ष 2014 में इसको लेकर हांगकांग में 79 दिनों तक चले 'अम्ब्रेला मूवमेंट' भी चला था, जिसके बाद लोकतंत्र का समर्थन करने वालों पर चीनी सरकार कार्रवाई की थी।

 

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