हांगकांग, [जागरण स्पेशल] हांगकांग का एक 22 वर्षीय युवक इन दिनों सोशल मीडिया पर हीरो बना हुआ है। इस छोटे से युवक ने इन दिनों 138 करोड़ की आबादी वाले देश चीन की नाक में दम कर रखा है। चीन की ताकत को चुनौती देने वाले इस लड़के का नाम है जोशुआ वांग। दरअसल, हांगकांग प्रशासन एक बिल लेकर आया था, जिसके मुताबिक वहां के प्रदर्शनकारियों को चीन लाकर मुकदमा चलाने की बात थी।

बस फिर क्या था, वांग अपने समर्थकों के साथ सड़कों पर उतर गए। पिछले कई दिनों से हांगकांग की सड़कों पर लाखों लोग प्रदर्शन कर रहे हैं। हांगकांग एयरपोर्ट पर उड़ानें कैंसल हो गई हैं। प्रदर्शनाकरियों ने हांगकांग के प्रमुख एयरपोर्ट पर भी कब्जा कर लिया। खास बात यह है कि हांगकांग में चीन के खिलाफ जारी जोरदार प्रदर्शन की अगुवाई वहां की युवा आबादी कर रही है।

पुलिस ने वांग को किया गिरफ्तार, कोर्ट से मिली जमानत

हांगकांग में लोकतंत्र की तेज होती मांग के खिलाफ पुलिस ने सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है। शनिवार को आयोजित रैली से पहले एक्शन में आई पुलिस ने शुक्रवार को तड़के लोकतंत्र समर्थकों के युवा नेता जोशुआ वांग और एग्नेस चॉ समेत कई नेताओं व कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार कर लिया। बाद में वांग और चॉ को अदालत से जमानत मिल गई। गिरफ्तारी को चीन की दमनकारी नीति बताते हुए दक्षिणपंथी समूहों ने फिलहाल रैली को रद करने की घोषणा की है। हालांकि, लोकतंत्र समर्थकों का कहना है कि नेताओं की गिरफ्तारी से रैली के आयोजन पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। स्थानीय सरकार द्वारा पारित एक प्रत्यर्पण बिल के विरोध में जून में प्रदर्शन शुरू हुआ था, जो अब जनआंदोलन का रूप ले चुका है।

अब सिर्फ बिल वापसी नहीं, बल्कि लोकतंत्र बहाली की भी मांग

अब विरोध प्रदर्शन सिर्फ बिल को वापस लेने की मांग तक ही सीमित नहीं रह गया है, बल्कि अब लोकतंत्र बहाली की मांग तेज हो गई है। अर्ध-स्वायत्त शहर में सार्वभौमिक मताधिकार की मांग को चीन द्वारा खारिज किए जाने के पांचवें साल पर रैली का आयोजन किया गया था। मताधिकार की मांग को लेकर 2014 में 79 दिनों तक आंदोलन चला था, लेकिन चीन ने सख्ती के साथ उसे दबा दिया था। प्रत्यर्पण बिल में अपराधियों को सुनवाई के लिए चीन भेजे जाने का प्रावधान है। स्थानीय सरकार ने फिलहाल इस बिल को ठंडे बस्ते में डाल दिया है।

पुलिस का कहना है कि रैली के हिंसक होने की आशंका थी, जिसके चलते उसकी अनुमति नहीं दी गई। लोकतंत्र समर्थक एंडी चान को भी हांगकांग एयरपोर्ट पर गिरफ्तार कर लिया गया था। एमनेस्टी इंटरनेशनल ने वांग और चॉ की गिरफ्तारी की निंदा की है। जून से अब तक लगभग साढ़े आठ सौ लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। बता दें कि हांगकांग को ब्रिटेन ने 1997 में एक समझौते के तहत चीन को सौंपा था।

चुप नहीं बैठेंगे चीनी सैनिक

समाचारपत्र चाइना डेली ने शुक्रवार को कहा कि अगर हांगकांग में हालात बेकाबू होते हैं तो चीनी सैनिक हाथ पर हाथ धरे नहीं बैठेंगे। अखबार का कहना है कि पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के जवान वहां दिखावे के लिए नहीं भेजे गए हैं। जरूरत पड़ने पर वो कार्रवाई भी करेंगे। हांगकांग में लगभग दस हजार चीनी सैनिक तैनात हैं। वहीं, चीनी संसद के बेसिक लॉ कमेटी की उप निदेशक मारिया टाम का कहना है कि हांगकांग में अभी आपात कानूनों को लागू करने का समय नहीं है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि इसके लिए स्थानीय सरकार को चीन से इजाजत लेने की जरूरत नहीं है।

प्रत्यर्पण बिल वापस लेने से इन्कार

विरोध प्रदर्शन को खत्म करने के लिए हांगकांग की मुख्य कार्यकारी कैरी लाम के विवादास्पद प्रत्यर्पण बिल को वापस लेने के प्रस्ताव को चीन सरकार ने खारिज कर दिया है। चीन सरकार ने कैरी लाम से साफ कहा है कि वह प्रदर्शनकारियों के किसी भी मांग के आगे नहीं झुकें। चीन सरकार ने विरोध प्रदर्शनों की पीछे विदेशी ताकतों का हाथ बताया है।

कैथे पैसिफिक ने कर्मचारियों को चेताया

हांगकांग की सरकारी एयरलाइंस कैथे पैसिफिक ने अपने कर्मचारियों को सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि विरोध प्रदर्शन में शामिल होने वाले कर्मचारियों को नौकरी से निकाला जा सकता है। एयरलाइंस के 27000 कर्मचारी हैं। कैथे के निदेशक टॉम ओवेन ने कर्मचारियों को भेजे मेमो में कहा है कि सोमवार और मंगलवार की रैली में शामिल होने का मतलब अनुबंधों का उल्लंघन माना जाएगा।

कौन हैं जोशुआ वांग

जोशुआ वांग डेमिस्टोस पार्टी के महासचिव हैं। इससे पूर्व वे हांगकांग स्टूडेंट एक्टिविस्ट ग्रुप स्कॉलरिज्म की भी स्थापना कर चुके हैं। 2014 में जोशुआ प्रदर्शनों के दौरान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आए थे। अंब्रेला मूवमेंट में भी जोशुआ की सक्रियता सुर्खियों में रही। टाइम मैगजीन ने 2014 में उन्होंने दुनिया के प्रभावशाली किशोरों में स्थान दिया था। जनवरी 2018 में जोशुआ को मोंग कोंट प्रदर्शन स्थल को खाली करने संबंधी कोर्ट के आदेश का पालन नहीं करने पर दोषी ठहराया गया और जेल भेज गया था।

Posted By: Sanjeev Tiwari

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