मनीष तिवारी, हारबिन। चीन की सबसे बड़ी रोबोटिक कंपनी हारबिन इंस्टीट्यूट आफ टेक्नालाजी (रोबोट ग्रुप) अगली पीढ़ी के रोबोट के साथ दक्षिण एशियाई देशों, विशेषकर भारत में अपनी पहुंच बढ़ाने की कोशिश कर रही है। कंपनी के महाप्रबंधक बांगझू सुन ने दस एशियाई देशों से चीन के दौरे पर आए पत्रकारों को एचआइटी परिसर में बताया कि रोबोटिक टेक्नालाजी में हमने हाल के वर्षों में काफी प्रगति की है। खास बात यह है कि अब शोध और विकास पर ज्यादा जोर दिया जा रहा है। हम प्रोडक्ट बनाने से लेकर रोबोटिक तकनीक के विकास में भी अग्रणी बनना चाहते हैं, जो अभी जापान के दबदबे वाला क्षेत्र है।

महज तीन साल पहले स्थापित की गई पीपीपी माडल वाली कंपनी एचआइटी में हाल के समय में एक्स्प्लोसिव डिटेक्टर रोबोट का विकास किया गया है, जो किसी भी क्षेत्र में विस्फोटक का पता लगा सकता है। यह प्रोडक्ट एयरपोर्ट जैसी जगहों पर बहुत कारगर है, जहां यात्रियों की भीड़ बहुत बढ़ती जा रही है। एचआइटी के रोबोट अभी ज्यादातर मेडिकल डिवाइस के रूप में इस्तेमाल किए जा रहे हैं, लेकिन कंपनी अब आम इस्तेमाल के रोबोट भी तैयार कर रही है। इन्हीं में से एक रोबोट है, जो व्हीलचेयर का काम करता है। यह उन बुजुर्गों के लिए बहुत मददगार है, जिन्हें हर समय सहारे की जरूरत होती है।

बिना किसी मानवीय मदद के यह रोबोट किसी को भी सीढि़यों से भी चढ़ाकर ले जा सकता है और इसमें कई ऐसे उपकरण भी लगे हैं जो संबंधित व्यक्ति को चिकित्सकों के भी संपर्क में रख सकते हैं। एक ऐसा ही रोबोट हाथ के आकार का है। कंपनी का दावा है कि यह अस्सी प्रतिशत तक मानवीय हाथ जैसा है, आप इससे कोई भी काम ले सकते हैं। कंपनी इसे भी चीन के समाज के लिए उपयोगी मान रही है।
एक अन्य तकनीक जो भारत के लिए मददगार हो सकती है वह है सीवर के टैंकों के साथ ही शौचालय की सफाई करने वाला रोबोट। इस तरह के टैंक अक्सर जहरीली गैसों के कारण साफ-सफाई के दौरान जानलेवा साबित होते हैं। भारत, यहां तक कि नई दिल्ली में इस तरह की कई घटनाएं हो चुकी हैं। रोबोट इन जहरीली गैसों का सामना करने में समर्थ है। 


एचआइटी कंपनी द्वारा तैयार किया गया एक अन्य आकर्षक रोबोट है वर्चुअल हवाई यात्रा का अहसास कराने वाली सीट। यह सीट 360 डिग्री तक घूम सकती है और इसमें बैठने पर आपको पूरी तरह हवाई यात्रा का अहसास होगा। रेस्तरां में आर्डर लेने और सर्व करने वाले रोबोट भी हैं तो एक ऐसा रोबोट भी है जो आपके लिए बार में ड्रिंक भी तैयार कर सकता है। 

एचआइटी के जीएम सुन के मुताबिक यह सोच है कि रोबोट की वजह से नौकरियां कम हो जाएंगी, लेकिन नए अवसर भी खुल रहे हैं। भारत सरीखे देश जो आधुनिक खेती की ओर बढ़ रहे हैं वे एक बार में बीस लीटर पेस्टीसाइड का छिड़काव करने वाले रोबोट को अपनाकर अपना समय, श्रम और पैसा बचा सकते हैं। भारत मेडिकल टूरिज्म का बड़ा गढ़ बन गया है। तमाम अस्पताल सटीक इलाज के लिए आधुनिक तकनीकें अपना रहे हैं और रोबोट भी इनमें से एक है। हम भारत से इस क्षेत्र में संपर्क बढ़ाना चाहते हैं। आम जीवन में रोबोट के इस्तेमाल के लिए कुछ सामाजिक हिचक है और यह चीन में भी है। लोगों को लगता है कि सारे काम रोबोट के जरिये नहीं किए जाने चाहिए।

Posted By: Arun Kumar Singh