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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 05, 2021 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

चीन में वायु प्रदूषण के कारण येलो अलर्ट जारी, राजमार्ग और खेल के मैदान किए गए बंद

By TaniskEdited By:
Published: Fri, 05 Nov 2021 06:59 PM (IST)

चीन ने अत्यधिक वायु प्रदूषण के कारण शुक्रवार को सभी राजमार्ग और स्कूलों के खेल के मैदानों को बंद करवा ...और पढ़ें

चीन ने अत्यधिक वायु प्रदूषण के कारण राजमार्ग और स्कूली खेल के मैदान बंद । (फोटो- एएनआइ)
चीन ने अत्यधिक वायु प्रदूषण के कारण राजमार्ग और स्कूली खेल के मैदान बंद । (फोटो- एएनआइ)

बीजिंग, एएनआइ। चीन ने अत्यधिक वायु प्रदूषण के कारण शुक्रवार को सभी राजमार्ग और स्कूलों के खेल के मैदानों को बंद करवा दिया है। चीन ने यह कदम कोयला उत्पादन सीमित करने और अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण सम्मेलन में अपने पर्यावरण संबंधी रिकार्ड की आलोचना होने के बाद उठाया है। चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार बीजिंग की नगरपालिका स्तरीय सरकार ने अत्यधिक वायु प्रदूषण के कारण येलो अलर्ट जारी किया है।

यह अलर्ट गुरुवार को शाम चार बजे से लागू किया गया। सबसे भीषण वायु प्रदूषण के लिए चीन में सबसे कड़ी चेतावनी के लिए रेड अलर्ट जारी किया जाता है। इसमें सबसे पहले क्रमश: ब्लू, येलो और आरेंज आता है। चीन के मौसम विभाग के अनुसार बीजिंग और आसपास के इलाकों में बुधवार से शनिवार तक वायु प्रदूषण अत्यधिक रहने वाला है। शुक्रवार को चीन के उत्तरी भाग के आसमान को धुएं युक्त कोहरे की चादर ने अपनी गिरफ्त में ले लिया। इससे दृश्यता (विजिबिल्टी) 200 मीटर से भी कम हो गई।

कोयला उत्पादन को दस लाख टन से भी अधिक बढ़ाया

इससे पहले, इसी हफ्ते चीन ने कहा था कि उसने नियमित कोयला उत्पादन को दस लाख टन से भी अधिक बढ़ा दिया है। ताकि बिजली की कमी न हो। दरअसल हाल के कुछ महीनों में बिजली संकट से जूझ रहे चीन को अपनी की फैक्टि्रयों को बिजली आपूर्ति नहीं होने की वजह से बंद करना पड़ा था।

दुनिया का सबसे बड़ा ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जक

अंग्रेजी भाषा के बैंकाक पोस्ट के अनुसार चीन के शहर प्राधिकरणों के मौसम विभागों ने हवा में स्माग (प्रदूषण युक्त हवा) की मोटी चादर के लिए मौसम की असामान्य परिस्थितियों को जिम्मेदार ठहराया है। जबकि चीन को दुनिया का सबसे बड़ा ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जक देश माना जाता है। चूंकि यहां पर कोयले पर ही ज्यादातर उद्योग निर्भर करते हैं और कार्बन उत्सर्जन अपने चरम पर है।