बीजिंग, प्रेट्र। चीन के वैज्ञानिकों ने पहली बार जीन एडिटिंग और एंब्रायोनिक स्टेम कोशिकाओं की मदद से दो चुहिया की स्वस्थ संतान पैदा करने में सफलता पाने का दावा किया है। सेल स्टेम सेल जर्नल में प्रकाशित शोध के मुताबिक, इस तकनीक के जरिये 210 भ्रूण से 29 संतानों को जन्म दिया गया। यह सभी पूरी तरह स्वस्थ थे, अपनी पूरी आयु तक जीवित रहे और इनकी संतानें भी पैदा हुईं। चाइनीज अकेडमी ऑफ साइंसेज के शोधकर्ताओं ने बताया कि दो चूहों से एक संतान पैदा करने का प्रयोग भी पहले किया जा चुका है। हालांकि वह संतान कुछ दिन ही जीवित रह सकी थी।

चुनौतियों का पता लगाने के लिए किया अध्ययन

शोध में इस पर अध्ययन किया गया कि एक ही लिंग के जीवों से संतान की उत्पत्ति में क्या चुनौतियां हैं। साथ ही स्टेम कोशिकाओं और जीन एडिटिंग की मदद से इन चुनौतियों से कैसे पार पाया जा सकता है। चाइनीज अकेडमी ऑफ साइंसेज के क्वी झोऊ ने कहा, ‘हम इस सवाल पर उत्सुक थे कि स्तनपायी जीवों में यौन संबंधों से ही संतान की उत्पत्ति क्यों होती है। विभिन्न अध्ययनों के जरिये हमने यह जानने का प्रयास किया कि जीन एडिटिंग की मदद से दो नर या दो मादा चूहों के संतान की उत्पत्ति संभव है या नहीं।’

पहले थीं कुछ खामियां

जीन डिलीट करने की कुछ तकनीकों की मदद से पहले भी दो चळ्हिया की एक संतान पैदा की जा चुकी है, लेकिन उसमें भी कुछ खामियां थीं। अब वैज्ञानिकों ने हैप्लॉयड एंब्रायोनिक स्टेम कोशिकाओं की मदद से इस काम को अंजाम दिया है। हालांकि सभी जीवों की अलग-अलग खूबियों को देखते हुए अब भी वैज्ञानिक इस बात को लेकर निश्चित नहीं हैं कि यह तकनीक का चूहे के अतिरिक्त अन्य स्तनपायी जीवों पर कितनी कारगर रह सकती है।

पहले किए जा चुके हैं ये प्रयोग

कुछ सरीसृप व उभयचर जीवों और मछलियों में केवल माता या केवल पिता से संतान पैदा करने के प्रयोग किए जा चुके हैं। स्तनपायी जीवों में यह मुश्किल होता है। स्तनपायी जीवों में संतान को माता और पिता दोनों से जीन के जरिये कुछ गुण मिलते हैं। किसी एक की अनुपस्थिति से पैदा होने वाली संतान स्वस्थ नहीं होती है।  

Posted By: Sanjay Pokhriyal

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