न्यूयॉर्क, प्रेट्र। भारत के पूर्व विदेश सचिव एस. जयशंकर ने पाकिस्तान की धरती पर मौजूद आतंकी संगठन जैश-ए-मुहम्मद के सरगना मसूद अजहर मामले में चीन को विचार करने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि चीन को यह सोचना होगा कि वह मसूद को वैश्विक आतंकी घोषित करने के रास्ते में तकनीकी बाधा पैदा कर दुनिया को क्या संदेश दे रहा है।

बता दें कि पिछले सप्ताह संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में मसूद को वैश्विक आतंकी घोषित करने के लिए लाए गए प्रस्ताव को चीन ने लगातार चौथी बार रोक दिया था। यह नया प्रस्ताव गत 14 फरवरी को हुए पुलवामा हमले के बाद फ्रांस, ब्रिटेन और अमेरिका की ओर से पेश किया गया था। इस हमले की जिम्मेदारी जैश-ए-मुहम्मद ने ली थी। इसमें सीआरपीएफ के 44 जवान शहीद हुए थे। टाटा समूह के ग्लोबल कॉरपोरेट मामलों के अध्यक्ष व चीन और अमेरिका में दूत रह चुके जयशंकर ने कहा, ‘यह ऐसा मामला है जिस पर चीनी लोगों को खुद सोचना चाहिए कि वे क्या संदेश दे रहे हैं।’ उन्होंने यहां एशिया सोसाइटी के एक सत्र में मसूद पर चीन द्वारा फिर रोड़ा अटकाए जाने के बारे में पूछे गए सवाल पर यह टिप्पण की।

बेल्ट एंड रोड पर भारत का रुख स्पष्ट
चीन की महत्वाकांक्षी बेल्ट एंड रोड पहल के बारे में पूछे जाने पर जयशंकर ने कहा कि भारत ने इस पर अपना रुख पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है। इस पर भारत की कुछ खास चिंताएं हैं। इस तरह की पहल संप्रभुता के लिहाज से सम्मानजनक होनी चाहिए। कथित चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा गुलाम कश्मीर से होकर गुजरता है और यह वह जमीन है जिस पर पाकिस्तान ने गैरकानूनी कब्जा कर रखा है।

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